📅 21 मार्च 2026 | HeadlinesNow Desk

🔑 मुख्य बातें
- निशिकांत दुबे ने आपातकाल को ‘कांग्रेस का काला अध्याय’ बताया।
- उन्होंने इंदिरा गांधी सरकार पर नागरिक अधिकारों के हनन का आरोप लगाया।
- दुबे ने जनसंख्या नियंत्रण अभियान की भी आलोचना की।
📋 इस खबर में क्या है
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल की कड़ी आलोचना की है। 21 मार्च 1977 को आपातकाल समाप्त हुआ था। दुबे ने इसे ‘कांग्रेस का काला अध्याय’ बताते हुए दमनकारी नीतियों, लोकतंत्र की हत्या और नागरिक अधिकारों के हनन का काल बताया। उन्होंने कहा कि 21 मार्च 1977 को इंदिरा गांधी की दमनकारी नीतियों के कारण लागू आपातकाल समाप्त हुआ था। 20 मार्च 1977 को जनता ने गांधी परिवार के अहंकार को परास्त किया था, और स्वयं इंदिरा गांधी चुनाव हार गईं थीं।
आपातकाल: लोकतंत्र पर आघात
दुबे ने आपातकाल की निंदा करते हुए कहा कि लाखों लोगों को जबरन जेल में डाला गया, और हजारों लोग पुलिस हिरासत में मारे गए या अत्याचारों के शिकार हुए। उन्होंने बताया कि लगभग एक करोड़ लोगों की जबरन नसबंदी की गई। दुबे ने 42वें संवैधानिक संशोधन का उल्लेख किया, जिसके द्वारा लोकसभा का कार्यकाल छह साल तक बढ़ा दिया गया और राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को कानूनी कार्यवाही से ऊपर का दर्जा दिया गया था।
संवैधानिक संशोधन और नागरिक अधिकार
उन्होंने आगे कहा कि आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों को समाप्त कर दिया गया और प्रेस पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे बाबासाहेब अंबेडकर द्वारा बनाए गए मूल संविधान में महत्वपूर्ण बदलाव हुए। दुबे ने भारत के राजपत्र की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें आपातकाल के दौरान लागू किए गए संवैधानिक संशोधनों की सूची थी। इन संशोधनों में न्यायिक समीक्षा और संस्थागत नियंत्रण को कमजोर करने वाले प्रावधान शामिल थे। यह एक ऐसा दौर था जब राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर नागरिकों के अधिकारों का हनन किया गया।
जनसंख्या नियंत्रण और कांग्रेस पर आरोप
दुबे ने इंदिरा गांधी सरकार द्वारा शुरू किए गए सामूहिक नसबंदी और जनसंख्या नियंत्रण अभियान का भी उल्लेख किया। 19 मार्च को, दुबे ने कांग्रेस पार्टी को कई राष्ट्रीय समस्याओं की जड़ बताया, विशेषकर घुसपैठ के आरोपों पर जोर देते हुए। उन्होंने कहा कि देश में जो भी समस्याएं दिखाई दे रही हैं, उनकी जड़ में नेहरू-गांधी परिवार या कांग्रेस पार्टी है। इसी आधार पर उन्होंने ‘कांग्रेस का काला अध्याय’ नाम से एक श्रृंखला शुरू की है।
निष्कर्ष
निशिकांत दुबे का यह बयान आपातकाल के दौरान हुई घटनाओं की याद दिलाता है और उस समय के राजनीतिक माहौल पर प्रकाश डालता है। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे देश की कई समस्याओं का कारण बताया है। यह घटनाक्रम राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है।
🔍 खबर का विश्लेषण
निशिकांत दुबे का यह बयान कांग्रेस पार्टी और इंदिरा गांधी के नेतृत्व पर एक गंभीर आरोप है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण है। इस बयान का राष्ट्रीय राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस पार्टी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ आपातकाल कब लागू किया गया था?
आपातकाल 25 जून 1975 को लागू किया गया था और 21 मार्च 1977 को समाप्त हुआ था।
❓ निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी को कई राष्ट्रीय समस्याओं की जड़ बताया है, विशेषकर घुसपैठ के आरोपों पर जोर देते हुए।
❓ 42वें संवैधानिक संशोधन में क्या बदलाव किए गए थे?
42वें संवैधानिक संशोधन में लोकसभा का कार्यकाल छह साल तक बढ़ा दिया गया और राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को कानूनी कार्यवाही से ऊपर का दर्जा दिया गया था।
❓ आपातकाल के दौरान कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया था?
आपातकाल के दौरान लाखों लोगों को जबरन जेल में डाला गया था।
❓ निशिकांत दुबे ने किस राजपत्र की तस्वीर साझा की?
दुबे ने भारत के राजपत्र की एक तस्वीर साझा की, जिसमें आपातकाल के दौरान लागू किए गए संवैधानिक संशोधनों की सूची थी।
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Published: 21 मार्च 2026 | HeadlinesNow.in

