📅 23 मार्च 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- शंकराचार्य ने 2.18 लाख सैनिकों की चतुरंगिणी सेना बनाने का किया ऐलान
- सेना गोरक्षा, धर्म रक्षा, शास्त्र रक्षा और मंदिर रक्षा का करेगी कार्य
- अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात कर लिया आशीर्वाद
📋 इस खबर में क्या है
वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने 2 लाख 18 हजार 700 सैनिकों की चतुरंगिणी सेना बनाने का संकल्प लिया है। यह सेना देशभर में गाय, धर्म, शास्त्र और मंदिरों की रक्षा के लिए तत्पर रहेगी। शंकराचार्य ने बताया कि सेना का गठन श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी सभा करेगी, जिसके वे स्वयं अध्यक्ष होंगे।
शंकराचार्य ने सेना के कार्य करने के तरीके को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी रणनीति में पहले टोकना, फिर रोकना और अंत में ठोको शामिल है। उन्होंने ‘ठोको’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि इसमें संवैधानिक तरीके, जैसे मुकदमा करना, शिकायत करना और पंचायत करना शामिल हैं। सेना में हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सैनिक होंगे। प्रत्येक टीम में 10 सदस्य होंगे, जिससे कुल 21 हजार 870 टीमें बनेंगी।
चतुरंगिणी सेना का उद्देश्य
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि इस सेना का मुख्य उद्देश्य धर्म की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में धर्म पर कई तरह के संकट आ रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए एक सशक्त सेना की आवश्यकता है। यह सेना गोरक्षा, शास्त्र रक्षा और मंदिर रक्षा जैसे कार्यों को प्राथमिकता देगी। सेना के सदस्य पीले वस्त्र धारण करेंगे और उनके हाथों में परशु (फरसा) होगा, जो शक्ति और धर्म के प्रतीक के रूप में होगा।
गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर शंकराचार्य का मत
उत्तराखंड के बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक के मामले पर शंकराचार्य ने अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जैसे मक्का-मदीना में अन्य धर्मों के लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं है, उसी प्रकार हमारे धर्म स्थलों की पवित्रता भी बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक परिसरों में केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश मिलना चाहिए जो उस धर्म का पालन करते हैं।
अखिलेश यादव ने लिया शंकराचार्य का आशीर्वाद
हाल ही में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान अखिलेश यादव ने शंकराचार्य का आशीर्वाद लिया और कहा कि अब नकली संतों का अंत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं, उनका सच जल्द ही सामने आएगा।
निष्कर्ष
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा चतुरंगिणी सेना का गठन एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सेना धर्म, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए समर्पित होगी।
🔍 खबर का विश्लेषण
शंकराचार्य द्वारा चतुरंगिणी सेना का गठन एक महत्वपूर्ण घटना है, जो देश में धर्म और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सेना भविष्य में किस प्रकार से अपने उद्देश्यों को प्राप्त करती है और समाज पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ चतुरंगिणी सेना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
चतुरंगिणी सेना का मुख्य उद्देश्य गाय, धर्म, शास्त्र और मंदिरों की रक्षा करना है। यह सेना धर्म से जुड़े सभी कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेगी।
❓ सेना में कितने सैनिक होंगे?
चतुरंगिणी सेना में कुल 2 लाख 18 हजार 700 सैनिक होंगे, जो देशभर से भर्ती किए जाएंगे।
❓ सेना के सदस्यों की वेशभूषा कैसी होगी?
सेना के सदस्य पीले वस्त्र धारण करेंगे और उनके हाथों में परशु (फरसा) होगा।
❓ सेना किस प्रकार काम करेगी?
सेना पहले लोगों को गलत काम करने से टोकेगी, फिर उन्हें रोकेगी और अंत में संवैधानिक तरीकों से कार्रवाई करेगी।
❓ अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से मुलाकात क्यों की?
अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से आशीर्वाद लेने और धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करने वालों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए मुलाकात की।
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Published: 23 मार्च 2026 | HeadlinesNow.in

