📅 27 मार्च 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- शिवपुरी में नया शिक्षा सत्र शुरू, बाजार में किताबें गायब, अभिभावक परेशान।
- निजी स्कूल एनसीईआरटी के कोर्स को 5000-7000 रुपये में बेच रहे हैं।
- शिक्षा विभाग ने ‘पुस्तक मेला’ परंपरा को ठंडे बस्ते में डाला, देरी से नुकसान।
📋 इस खबर में क्या है
शिवपुरी जिले में 1 अप्रैल 2026 से नया शिक्षा सत्र शुरू होने जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर तैयारियां अधूरी हैं। एनसीईआरटी और सीबीएसई सहित किसी भी बोर्ड की कक्षा 1 से 12वीं तक की किताबें बाजार में पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हैं। कहीं दो किताबें गायब हैं तो कहीं तीन, जिससे अभिभावक दुकानों के चक्कर काट रहे हैं।
महंगाई की मार: 500 का कोर्स 7000 में
शहर के निजी स्कूलों ने एक बार फिर अभिभावकों की जेब पर डाका डालना शुरू कर दिया है। सरकारी आंकड़ों और बाजार की स्थिति की तुलना करें तो चौंकाने वाला अंतर सामने आता है। जो कोर्स एनसीईआरटी की किताबों के जरिए 500 से 1000 रुपये में पूरा हो सकता है, वही कोर्स निजी प्रकाशकों के नाम पर 5000 से 7000 रुपये में बेचा जा रहा है। प्रशासन की चुप्पी निजी स्कूलों के हौसले बुलंद कर रही है। यह एक गंभीर मुद्दा है जिस पर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
पुस्तक मेले का इंतजार, निजी स्कूलों का दबाव
शिक्षा विभाग ने पिछले दो वर्षों की ‘पुस्तक मेला’ परंपरा को इस बार ठंडे बस्ते में डाल दिया है। नियमानुसार यह मेला मार्च के अंतिम सप्ताह में लगना चाहिए था, ताकि अभिभावकों को उचित दामों पर किताबें मिल सकें। अब विभाग अप्रैल में मेला लगाने की बात कह रहा है, लेकिन तब तक अधिकांश अभिभावक स्कूलों के दबाव में महंगा कोर्स खरीद चुके होंगे। इस देरी से अभिभावकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सभी को समान अवसर मिलना चाहिए, लेकिन यहां ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
सरकारी स्कूलों का हाल: भोपाल से किताबों का इंतजार
सिर्फ निजी ही नहीं, सरकारी स्कूलों की स्थिति भी डांवाडोल है। संकुल केंद्रों पर किताबें पहुंचना शुरू तो हुई हैं, लेकिन कक्षा 11वीं और 12वीं का पूरा स्टॉक अभी भी लापता है। अधिकारियों का दावा है कि वितरण अप्रैल में होगा, लेकिन बिना किताबों के सत्र की शुरुआत केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी। शिक्षा के क्षेत्र में यह लापरवाही चिंताजनक है। सरकार को इस पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए ताकि छात्रों को समय पर किताबें मिल सकें।
विवेक श्रीवास्तव, डीईओ, शिवपुरी के अनुसार, सत्र 1 अप्रैल से ही शुरू होगा। शासकीय स्कूलों की किताबें संकुल केंद्रों पर भेजी जा रही हैं। पुस्तक मेला भी अप्रैल माह में ही आयोजित किया जाएगा।
निष्कर्ष: शिवपुरी में शिक्षा सत्र की शुरुआत कई चुनौतियों के साथ हो रही है। किताबों की अनुपलब्धता और निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। प्रशासन को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करके उचित कदम उठाने चाहिए ताकि छात्रों को बिना किसी बाधा के शिक्षा मिल सके। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।
🔍 खबर का विश्लेषण
शिवपुरी में शिक्षा सत्र की शुरुआत में किताबों की कमी और निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस वसूली की समस्या गंभीर है। इससे छात्रों की शिक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी छात्रों को समय पर किताबें मिलें और निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगे। यह मुद्दा शिक्षा प्रणाली की खामियों को उजागर करता है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ शिवपुरी में नया शिक्षा सत्र कब से शुरू हो रहा है?
नया शिक्षा सत्र 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है, लेकिन तैयारियां अधूरी हैं।
❓ बाजार में कौन सी किताबें उपलब्ध नहीं हैं?
एनसीईआरटी और सीबीएसई सहित कक्षा 1 से 12वीं तक की किताबें बाजार में पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हैं।
❓ निजी स्कूल एनसीईआरटी के कोर्स को कितने में बेच रहे हैं?
निजी स्कूल एनसीईआरटी के 500-1000 रुपये के कोर्स को 5000-7000 रुपये में बेच रहे हैं।
❓ शिक्षा विभाग पुस्तक मेला कब आयोजित करेगा?
शिक्षा विभाग अप्रैल में पुस्तक मेला आयोजित करने की बात कह रहा है।
❓ सरकारी स्कूलों में किताबों की क्या स्थिति है?
सरकारी स्कूलों में कक्षा 11वीं और 12वीं का पूरा स्टॉक अभी भी लापता है।
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Published: 27 मार्च 2026 | HeadlinesNow.in

