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ईरान में सरकार और सेना के बीच टकराव बढ़ा, IRGC के हाथ में नियंत्रण

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अंतरराष्ट्रीय
📅 01 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
ईरान में सरकार और सेना के बीच टकराव बढ़ा, IRGC के हाथ में नियंत्रण - HeadlinesNow Hindi News

🔑 मुख्य बातें

  • ईरान में सरकार और सेना के बीच सत्ता को लेकर टकराव की खबरें आ रही हैं।
  • IRGC राष्ट्रपति के फैसलों में दखल दे रहा है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ रही है।
  • सुप्रीम लीडर की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।

ईरान में सरकार और सेना के बीच सत्ता को लेकर टकराव की खबरें सामने आ रही हैं। तेहरान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने देश का नियंत्रण अपने हाथों में ले लिया है और राष्ट्रपति मसूद पजशकियान के फैसलों में दखल दे रहा है। यह घटनाक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के उस दावे के बाद सामने आया है जिसमें उन्होंने ईरान के साथ बातचीत जारी रहने की बात कही थी, जिसे ईरानी अधिकारियों ने खारिज कर दिया था।

IRGC का बढ़ता दखल

रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यममार्गी माने जाने वाले राष्ट्रपति पजशकियान कोई भी बड़ा फैसला लेने में सक्षम नहीं हैं। IRGC, जिसका मुख्य काम अमेरिका के हमलों का जवाब देना है, अब सरकार के अहम फैसलों में भी दखल दे रहा है। अखबार के सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति पजशकियान ने 26 मार्च को नया खुफिया मंत्री नियुक्त करने की कोशिश की थी, लेकिन IRGC चीफ अहमद वहीदी ने इसे रोक दिया। वहीदी का कहना है कि युद्ध की स्थिति में सभी अहम और संवेदनशील पदों पर नियुक्ति IRGC ही करेगा।

सुप्रीम लीडर की भूमिका पर सवाल

ईरान में सुप्रीम लीडर की भूमिका को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को जंग की शुरुआत में ही अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई बड़े नेता मारे गए थे। इसके बाद खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता बनाया गया, लेकिन तब से वे न तो सामने आए हैं और न ही उन्होंने कोई सीधा बयान दिया है। उनके संदेश केवल टीवी पर पढ़कर सुनाए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति और IRGC के बीच मतभेद

राष्ट्रपति पजशकियान और IRGC के बीच मतभेद पहले से ही सामने आने लगे थे। पजशकियान इस बात से नाराज थे कि IRGC पड़ोसी देशों को निशाना बनाकर तनाव बढ़ा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर लंबे समय तक बुरा असर पड़ेगा। पहले से ही कई हफ्तों के युद्ध के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हो चुकी है और गोला-बारूद भी कम होता जा रहा है।

निष्कर्ष

ईरान में सत्ता का खालीपन पैदा हो गया है, जिसके कारण अब IRGC, जो नियमित सेना से अलग काम करता है, देश की कमान संभालता हुआ दिख रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की भूमिका और स्थिरता पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। इस घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर है, और इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चिंता का विषय है, क्योंकि इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।

🔍 खबर का विश्लेषण

ईरान में सरकार और सेना के बीच बढ़ता टकराव देश की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को और भी कमजोर कर सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ईरान की सरकार और सेना इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और क्या वे किसी समझौते पर पहुँच पाते हैं या नहीं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ IRGC क्या है?

IRGC का मतलब है इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स। यह ईरान की एक शक्तिशाली सेना जैसी संस्था है जिसका मुख्य काम अमेरिका के हमलों का जवाब देना है।

❓ राष्ट्रपति पजशकियान और IRGC के बीच मतभेद क्यों हैं?

राष्ट्रपति पजशकियान इस बात से नाराज हैं कि IRGC पड़ोसी देशों को निशाना बनाकर तनाव बढ़ा रहा है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

❓ ईरान में सुप्रीम लीडर की भूमिका क्या है?

ईरान में सुप्रीम लीडर देश का सर्वोच्च नेता होता है और सुरक्षा से जुड़े मामलों में अंतिम अधिकार उसी के पास होता है।

❓ IRGC ने देश का नियंत्रण क्यों अपने हाथ में लिया?

ईरान में सत्ता का खालीपन पैदा हो गया है, जिसके कारण अब IRGC देश की कमान संभालता हुआ दिख रहा है।

❓ इस घटनाक्रम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

इस घटनाक्रम से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है।

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Published: 01 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

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Journalist covering politics and technology.
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