📅 04 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने 1.8 लाख किमी दूर से पृथ्वी की अद्भुत तस्वीरें भेजीं।
- यह मिशन 1972 के बाद पहली बार इंसानों को चांद के इतने करीब ले जा रहा है, पर वे लैंड नहीं करेंगे।
📋 इस खबर में क्या है
कभी सोचा है, 1.8 लाख किलोमीटर दूर से अपनी पृथ्वी कैसी दिखती होगी? नासा के आर्टेमिस-2 मिशन ने यह नजारा दिखाया है। 4 अंतरिक्ष यात्री चांद की ओर जा रहे हैं, और उन्होंने वहां से पृथ्वी की कुछ अद्भुत तस्वीरें भेजी हैं। तस्वीरें ऐसी हैं कि बस देखते रह जाओ — नीले रंग में लिपटी हमारी धरती, जैसे किसी ने प्यार से रंग दिया हो।
पृथ्वी का अद्भुत नजारा
इन तस्वीरों में पृथ्वी का घुमावदार किनारा दिखाई दे रहा है, और कुछ में पूरी धरती बादलों से ढकी हुई है। यह नजारा 1972 के बाद पहली बार देखने को मिल रहा है, जब इंसान चांद के इतने करीब जा रहा है। सोचिए, 50 साल से ज्यादा का वक्त गुजर गया।
मिशन पर गए चारों अंतरिक्ष यात्री (3 अमेरिकी और 1 कनाडाई) फिलहाल पृथ्वी से लगभग 1.8 लाख किलोमीटर दूर हैं। उन्हें अभी 2.4 लाख किलोमीटर का सफर और तय करना है। उम्मीद है कि वे 6 अप्रैल तक चंद्रमा के पास पहुंच जाएंगे। 1 अप्रैल को ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार होकर ये यात्री चांद की ओर रवाना हुए थे। यह एक ऐतिहासिक पल है, क्योंकि 1972 के बाद पहली बार कोई इंसान चांद के इतने करीब जाएगा।
चांद पर कदम नहीं, परिक्रमा ज़रूर
पर इस बार अंतरिक्ष यात्री चांद पर कदम नहीं रखेंगे। वे सिर्फ चांद की कक्षा का चक्कर लगाकर वापस आ जाएंगे। इस मिशन का मकसद चांद के चारों ओर मानवयुक्त उड़ान की संभावनाओं को तलाशना है। तकनीक का इस्तेमाल करके, नासा भविष्य के चंद्र अभियानों की तैयारी कर रहा है।
मिशन का अगला पड़ाव
अब आगे क्या होने वाला है? 5 अप्रैल को आर्टेमिस-2 चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति में प्रवेश करेगा। जैसे ही कैप्सूल चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, उसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और यह चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा। अगले दिन, ओरियन चांद की सतह से सिर्फ 6,400 किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा। उस दौरान, अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को देख पाएंगे जो पृथ्वी से कभी नहीं दिखता। यह नज़ारा ऐसा होगा जैसे कोई बास्केटबॉल आपके हाथ के पास रखी हो।
एक दिलचस्प बात यह है कि जब ओरियन चांद के पीछे से गुजरेगा, तो पृथ्वी से उसका संपर्क लगभग 50 मिनट के लिए टूट सकता है। इसे ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ कहा जा रहा है, क्योंकि उस दौरान मिशन कंट्रोल को यान से कोई सिग्नल नहीं मिलेगा। यह एक चुनौतीपूर्ण समय होगा, लेकिन नासा के इंजीनियरों ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है।
एक नया रिकॉर्ड
इस मिशन के दौरान, आर्टेमिस-2 अपोलो 13 द्वारा 1970 में बनाए गए पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी के रिकॉर्ड को भी तोड़ सकता है। उम्मीद है कि आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से 402,336 किलोमीटर की दूरी तक पहुंचेंगे। सोचिए, इंसान कितनी दूर तक जा सकता है! यह तकनीक और मानव साहस का एक अद्भुत उदाहरण है।
धरती पर वापसी
सातवें दिन, यान चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल ‘गुलेल’ की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किलोमीटर का सफर तय करेंगे। और 10 अप्रैल को, यह यान प्रशांत महासागर में गिरेगा — भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा।
आर्टेमिस-2: भविष्य की उड़ान
आर्टेमिस-2 सिर्फ एक मिशन नहीं है, यह भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं का रास्ता खोलता है। यह हमें चांद पर इंसानी बस्तियां बसाने और मंगल ग्रह पर जाने के सपने को साकार करने में मदद करेगा। तकनीक और विज्ञान की मदद से, हम नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं। यह तकनीक का ही कमाल है कि आज हम चांद के इतने करीब जा पा रहे हैं।
🔍 खबर का विश्लेषण
आर्टेमिस-2 मिशन न सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि यह मानव इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ता है। यह मिशन भविष्य में चांद और मंगल ग्रह पर मानव बस्तियां बसाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में क्रांति आएगी, जिससे हमारे जीवन में कई बदलाव आएंगे।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ आर्टेमिस-2 मिशन क्या है?
आर्टेमिस-2 नासा का एक मानवयुक्त चंद्र मिशन है। इसका मकसद चांद के चारों ओर उड़ान भरकर भविष्य के चंद्र अभियानों की तैयारी करना है।
❓ इस मिशन में कितने अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं?
इस मिशन में 4 अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं – 3 अमेरिकी और 1 कनाडाई।
❓ आर्टेमिस-2 मिशन कब लॉन्च हुआ था?
यह मिशन 1 अप्रैल, 2026 को लॉन्च हुआ था।
❓ यह मिशन कब तक चलेगा?
अनुमान है कि यह मिशन लगभग 10 दिनों तक चलेगा, और 11 अप्रैल को यान प्रशांत महासागर में गिरेगा।
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Published: 04 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

