📅 08 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
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🔑 मुख्य बातें
- हाईकोर्ट का फैसला: महिला अतिथि विद्वानों को मातृत्व अवकाश का लाभ मिलेगा।
- 12 महीनों में 80 दिन कार्य करने की शर्त अब राज्य सरकार के अधीन संस्थानों पर लागू नहीं होगी।
- याचिकाकर्ता ने कॉलेज प्रिंसिपल पर जातिवाद का आरोप भी लगाया।
📋 इस खबर में क्या है
मध्य प्रदेश में महिला अतिथि विद्वानों के लिए एक बड़ी खबर है। हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे कई महिलाओं को राहत मिलेगी। यह मामला श्रीमती प्रीति साकेत बनाम मध्य राज्य का है, जिसमें मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की व्याख्या की गई।
क्या है पूरा मामला?
जबलपुर, 8 अप्रैल 2026— हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मातृत्व अवकाश का लाभ पाने के लिए ’12 महीनों में 80 दिन कार्य करने’ की शर्त राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले संस्थानों पर लागू नहीं होगी। मामला यह है कि श्रीमती प्रीति साकेत, जो गवर्नमेंट तिलक PG कॉलेज कटनी में अतिथि विद्वान के तौर पर कार्यरत थीं, उन्हें पहले प्रिंसिपल ने 5 अप्रैल 2023 को छह महीने का मातृत्व अवकाश दिया था। साथ ही, यह भी आदेश दिया गया था कि उन्हें इस दौरान मानदेय भी दिया जाए।
लेकिन, कॉलेज के दूसरे प्रिंसिपल ने 16 जून 2023 को एक और आदेश जारी किया, जिसमें पहले दिए गए मातृत्व अवकाश को अवैतनिक कर दिया गया। इस फैसले को श्रीमती साकेत ने चुनौती दी। न्यायमूर्ति श्री विशाल धगट की खंडपीठ ने इस मामले की शुरुआती सुनवाई की।
क्यों हुआ यह विवाद?
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, हितेंद्र कुमार गोल्हानी और काजल विश्वकर्मा ने अदालत को बताया कि संशोधित आदेश कानून के खिलाफ है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के संबंध में दिए गए विस्तृत व्याख्या के आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें संविधान के भाग तीन में निहित मौलिक अधिकारों को मातृत्व अवकाश के कानून से जोड़ा गया था। पर बात यहीं खत्म नहीं होती — कोर्ट को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता अनुसूचित जाति से संबंध रखती हैं, बस इसी वजह से कॉलेज प्रिंसिपल द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि अन्य सामान्य महिलाओं को ऐसे मामलों में लाभ दिया गया।
आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस फैसले से मध्य प्रदेश की उन सभी महिला अतिथि विद्वानों को बड़ी राहत मिलेगी, जो मातृत्व अवकाश के लिए संघर्ष कर रही थीं। अब उन्हें बिना किसी बाधा के मातृत्व अवकाश मिल सकेगा, और उन्हें वेतन भी मिलेगा। यह फैसला महिलाओं के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह फैसला राष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल कायम कर सकता है, जिससे अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित होंगे।
यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इस फैसले को किस तरह से लागू करती है। क्या सरकार इस फैसले के बाद अपनी नीतियों में बदलाव करेगी? क्या अन्य विभागों में भी महिलाओं को इस फैसले का लाभ मिलेगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। राष्ट्रीय स्तर पर इस फैसले का असर जरूर देखने को मिलेगा।
सीधी बात है, यह फैसला उन सभी महिलाओं के लिए एक जीत है जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। राष्ट्रीय परिदृश्य में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह मामला जातिवाद के आरोपों से भी जुड़ा हुआ है। अगर यह आरोप सही साबित होता है, तो यह और भी गंभीर मामला बन सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
🔍 खबर का विश्लेषण
हाईकोर्ट का यह फैसला महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल मध्य प्रदेश की महिला अतिथि विद्वानों को लाभ होगा, बल्कि यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस फैसले को पूरी तरह से लागू किया जाए और महिलाओं को उनके अधिकार मिलें। यह फैसला उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रही हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ यह फैसला किस बारे में है?
यह फैसला मध्य प्रदेश की महिला अतिथि विद्वानों को मातृत्व अवकाश देने से संबंधित है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उन्हें मातृत्व अवकाश का लाभ मिलना चाहिए।
❓ क्या है ’12 महीनों में 80 दिन’ की शर्त?
पहले मातृत्व अवकाश के लिए यह शर्त थी कि महिला को 12 महीनों में कम से कम 80 दिन काम करना होगा। अब हाईकोर्ट ने कहा है कि यह शर्त राज्य सरकार के अधीन संस्थानों पर लागू नहीं होगी।
❓ इस फैसले से किसे फायदा होगा?
इस फैसले से मध्य प्रदेश की उन सभी महिला अतिथि विद्वानों को फायदा होगा जो मातृत्व अवकाश के लिए पात्र हैं। उन्हें अब बिना किसी बाधा के अवकाश मिल सकेगा।
❓ क्या यह फैसला अन्य राज्यों पर भी लागू होगा?
यह फैसला फिलहाल मध्य प्रदेश पर लागू है, लेकिन यह अन्य राज्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है। उम्मीद है कि अन्य राज्य भी इस दिशा में कदम उठाएंगे।
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Published: 08 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

