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उज्जैन: 5 महीने की काशी को दुर्लभ बीमारी, इलाज के लिए 15 करोड़ की दरकार

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राष्ट्रीय
📅 17 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
उज्जैन: 5 महीने की काशी को दुर्लभ बीमारी, इलाज के लिए 15 करोड़ की दरकार - HeadlinesNow Hindi News

🔑 मुख्य बातें

  • उज्जैन की 5 महीने की काशी SMA टाइप-1 से जूझ रही है, जिसके इलाज के लिए 15 करोड़ रुपये की जरूरत है।
  • परिवार ने फंड रेज शुरू किया है और मुख्यमंत्री से भी गुहार लगाई है, क्योंकि जीन थेरेपी ही एकमात्र विकल्प है।

उज्जैन से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। पांच महीने की एक बच्ची, काशी, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 नामक एक दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी से जूझ रही है। इस बीमारी का इलाज बेहद महंगा है, और काशी को ठीक करने के लिए करीब 15 करोड़ रुपये के जीन थेरेपी इंजेक्शन की जरूरत है। यह इंजेक्शन भारत में उपलब्ध नहीं है, जिससे परिवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

बेटी के इलाज के लिए माता-पिता की गुहार

काशी के माता-पिता, डॉ. रोहित दुबे पुरिया और डॉ. प्रकृति, अपनी बेटी को बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने फंड जुटाना शुरू कर दिया है और लोगों से मदद की अपील की है। डॉ. रोहित भोपाल एम्स में मेडिसिन विभाग में सीनियर रेजिडेंट हैं, जबकि डॉ. प्रकृति हमीदिया अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ थीं। वे पिछले एक साल से बेटी की देखभाल के लिए नौकरी नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी गुहार लगाई है।

डॉ. रोहित बताते हैं कि काशी का जन्म 14 नवंबर, 2025 को हुआ था। जन्म के एक महीने बाद भी उसके हाथ-पैरों में सामान्य हरकत नहीं दिखी। फिजियोथेरेपी से भी कोई फायदा नहीं हुआ। बाद में, भोपाल के डॉ. महेश माहेश्वरी ने बताया कि काशी को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-1 है। यह एक गंभीर जेनेटिक डिसऑर्डर है, जिसमें मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।

जीन थेरेपी ही एकमात्र उम्मीद

काशी का इलाज फिलहाल भोपाल एम्स की मेडिसिन एचओडी डॉ. भावना डिगरे की निगरानी में चल रहा है। इस बीमारी का प्रभावी इलाज ‘जीन थेरेपी’ है, जिसके लिए ‘जोलजेनस्मा’ इंजेक्शन लगाया जाता है। वालटिश कंपनी का यह इंजेक्शन विदेश से मंगवाना पड़ेगा, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 1.72 मिलियन डॉलर है। यानी लगभग 15 करोड़ रुपये। परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना नामुमकिन सा है।

डॉ. प्रकृति का कहना है कि उन्होंने अब तक करीब 30 लाख रुपये ही जुटा पाए हैं। उन्होंने ऑनलाइन फंड रेजर शुरू किया है और हाल ही में एक चैरिटी शो का आयोजन भी किया था, लेकिन अभी भी बड़ी राशि की जरूरत है। समय की कमी को देखते हुए परिवार लगातार प्रयास कर रहा है कि जल्द से जल्द जीन थेरेपी उपलब्ध हो जाए। काशी की नानी, कुसुम सिसोदिया, अपनी पोती की हालत देखकर बेहद दुखी हैं। वे कहती हैं कि वे बस यही चाहती हैं कि जल्द से जल्द उसका इलाज हो जाए और सभी से मदद करने की विनती करती हैं। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रहा है, क्योंकि दुर्लभ बीमारियों के इलाज की उपलब्धता और लागत एक गंभीर मुद्दा है।

एक और बच्ची भी जूझ रही है इसी बीमारी से

उधर, एक और खबर है कि तीन महीने से डाइट पर चल रही 3 साल की मासूम अनिका शर्मा भी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप- 2 बीमारी से ग्रसित है। उसके पास इलाज का आखिरी मौका बचा है, लेकिन अगर उसका वजन 13.5 किलो हो गया तो उसका इलाज हो पाना भी मुश्किल है। तो उसके माता-पिता ने उसे डाइट पर रखा है और तीन महीने से उसे खाना नहीं दिया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इन बीमारियों के इलाज के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। ऐसे में देखना यह है कि सरकार और समाज मिलकर इन बच्चों को बचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाना भी बेहद जरूरी है।

क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA)?

स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) एक आनुवंशिक बीमारी है जो मांसपेशियों को कमजोर करती है और उन्हें बेकार कर देती है। यह बीमारी स्पाइनल कॉर्ड और मस्तिष्क के निचले हिस्से में स्थित मोटर न्यूरॉन्स को प्रभावित करती है। SMA के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से टाइप 1 सबसे गंभीर है। SMA टाइप 1 वाले बच्चे आमतौर पर दो साल से अधिक जीवित नहीं रहते हैं। SMA का कोई इलाज नहीं है, लेकिन जीन थेरेपी जैसे उपचार लक्षणों को प्रबंधित करने और जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

🔍 खबर का विश्लेषण

यह खबर दुर्लभ बीमारियों के इलाज की मुश्किलों को उजागर करती है। 15 करोड़ रुपये का इंजेक्शन एक आम आदमी के लिए पहुंच से बाहर है। सरकार को ऐसे मामलों में मदद के लिए आगे आना चाहिए और जीन थेरेपी जैसी महंगी दवाओं को सस्ता करने के लिए कदम उठाने चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य योजनाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) क्या है?

SMA एक आनुवंशिक बीमारी है जो मांसपेशियों को कमजोर करती है। यह स्पाइनल कॉर्ड और मस्तिष्क के निचले हिस्से में स्थित मोटर न्यूरॉन्स को प्रभावित करती है।

❓ SMA टाइप 1 कितना गंभीर है?

SMA टाइप 1 सबसे गंभीर प्रकार है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चे आमतौर पर दो साल से अधिक जीवित नहीं रहते हैं।

❓ SMA का इलाज क्या है?

SMA का कोई इलाज नहीं है, लेकिन जीन थेरेपी जैसे उपचार लक्षणों को प्रबंधित करने और जीवन प्रत्याशा को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

❓ काशी के इलाज के लिए कितने पैसे की जरूरत है?

काशी के इलाज के लिए करीब 15 करोड़ रुपये के जीन थेरेपी इंजेक्शन की जरूरत है, जो भारत में उपलब्ध नहीं है।

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Published: 17 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

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Journalist covering politics and technology.
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