📅 18 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- लक्षित परमार ने RBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी में 100% अंक प्राप्त किए।
- लिखने में असमर्थ लक्षित को परीक्षा में 9वीं कक्षा के छात्र ने पेपर लिखने में मदद की।
- लक्षित का सपना सिविल सर्विसेज में जाकर कलेक्टर बनना है और वह रोजाना 3-4 घंटे पढ़ाई करता है।
📋 इस खबर में क्या है
राजस्थान के लक्षित परमार ने साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी शारीरिक अक्षमता की मोहताज नहीं होती। सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित 18 वर्षीय लक्षित ने RBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी में 100% अंक प्राप्त कर एक मिसाल कायम की है। यह कहानी प्रेरणादायक है, और आपको बताएगी कि कैसे मजबूत इरादे से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
संघर्ष भरा जीवन, अटूट हौसला
लक्षित के लिए यह राह आसान नहीं थी। लिखने में असमर्थ, यहाँ तक कि अपना नाम भी खुद से न लिख पाने वाले लक्षित को परीक्षा के दौरान एक राइटर की मदद मिली। बोर्ड के नियमों के अनुसार, उन्हें 9वीं कक्षा के एक छात्र ने पेपर लिखने में मदद की। लक्षित के पिता, दिनेश कुमार परमार, अपने बेटे की इस उपलब्धि पर भावुक हो गए।
दिनेश कुमार ने बताया कि कैसे कुछ लोग लक्षित की शारीरिक क्षमता पर सवाल उठाते थे, लेकिन आज वही लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं। लक्षित अपने हाथ-पैर से कोई काम नहीं कर सकता और ज्यादा हिल भी नहीं पाता। दिनेश कुमार उसे गोद में उठाकर स्कूल ले जाते थे। लक्षित का सपना है कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी कर कलेक्टर बने।
लक्षित का कहना है कि हमें दिक्कतों को छोड़कर खुद पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। वह रोजाना 3 से 4 घंटे पढ़ाई करते थे और सभी विषयों को पढ़ते थे। विज्ञान उनका पसंदीदा विषय है, और उन्हें दर्शनशास्त्र पढ़ने में भी बहुत मजा आता है। स्कूल में उनके साथ हमेशा सामान्य व्यवहार किया गया और दोस्तों ने हमेशा उनका साथ दिया। लक्षित को अपनी हालत पर कभी दुख नहीं होता, क्योंकि वह जो हैं, उसमें बहुत खुश हैं। — सोचने वाली बात है — वह हमेशा लेटे-लेटे पढ़ाई करते थे और ज्यादातर समय उन्होंने ऑनलाइन पढ़ाई की।
परिवार का अटूट समर्थन
लक्षित के परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया है। उनके माता-पिता और बहनों ने उन्हें कभी भी उनकी बीमारी का एहसास नहीं होने दिया। लक्षित को हमेशा लगता है कि जो परिवार उनके लिए इतना कर रहा है, उसके लिए उन्हें कुछ करना चाहिए।
लक्षित की मां, रेखा परमार ने बताया कि बचपन से ही उन्हें चलने-फिरने में दिक्कत थी। देशभर के अस्पतालों में इलाज करवाया गया, लेकिन इस बीमारी का कोई इलाज नहीं हो पाया। लक्षित की दो छोटी बहनें हैं, जो लगातार उनके हर काम में मदद करती हैं। रेखा ने बताया कि लक्षित ज्यादा देर बैठ नहीं पाता, बस इसी वजह से वह लेटे हुए लगातार कभी मोबाइल फोन से तो कभी किताबों से पढ़ता रहता था। लक्षित स्कूल में सामान्य बच्चों के साथ पढ़ता था और उनसे भी ज्यादा नंबर लाने में कामयाब रहा। लगातार कुछ न कुछ पढ़ते रहना और स्कूल की पढ़ाई को रोजाना 3 से 4 घंटे तक दोहराना उसकी आदत में था। लक्षित को नॉवेल्स पढ़ने का बहुत शौक है। वह आए दिन नए नॉवेल्स मंगवाकर पढ़ता है। उसे एटॉमिक हैबिट्स, साइकोलॉजी ऑफ मनी, डीप वर्क जैसे नॉवेल्स में बहुत दिलचस्पी है।
लक्षित की क्लास टीचर निर्मला सालवी ने बताया कि लक्षित काफी जिज्ञासु बच्चा है। वह एक बार जिस चीज को देखता या पढ़ता है, उसे आसानी से याद हो जाता है। लक्षित की कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी भी तरह की चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनकी सफलता दिखाती है कि मजबूत इरादे और परिवार के समर्थन से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। यह शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल है। लक्षित जैसे छात्र यह साबित करते हैं कि शिक्षा हर किसी के लिए है, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। यह शिक्षा प्रणाली के लिए भी एक सबक है कि हर बच्चे को उसकी जरूरत के अनुसार सहायता मिलनी चाहिए।
लक्षित की कहानी दिखाती है कि सच्ची शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति भी है।
🔍 खबर का विश्लेषण
लक्षित की कहानी दिखाती है कि दृढ़ संकल्प और परिवार का समर्थन किसी भी चुनौती को पार कर सकता है। यह शिक्षा प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है कि हर बच्चे को उसकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच सकें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ लक्षित परमार किस बीमारी से पीड़ित हैं?
लक्षित परमार सेरेब्रल पाल्सी नामक बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके कारण उन्हें चलने-फिरने और लिखने में कठिनाई होती है।
❓ लक्षित ने 10वीं बोर्ड परीक्षा में कितने अंक प्राप्त किए?
लक्षित परमार ने RBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी में 100% अंक प्राप्त किए हैं।
❓ लक्षित को परीक्षा में किसने मदद की?
बोर्ड के नियमों के अनुसार, लक्षित को 9वीं कक्षा के एक छात्र ने परीक्षा लिखने में मदद की, क्योंकि वह खुद लिखने में असमर्थ हैं।
❓ लक्षित का भविष्य में क्या लक्ष्य है?
लक्षित का सपना है कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी कर कलेक्टर बने और देश की सेवा करे।
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Published: 18 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

