📅 02 मई 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- सूरत में NH-48 पर देश का पहला बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम शुरू किया गया।
- यह सिस्टम मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित है, जो 120kmph पर भी टोल काटने में सक्षम है।
- FASTag और ANPR तकनीक के इस्तेमाल से टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी।
📋 इस खबर में क्या है
क्या आप जानते हैं, हर साल टोल प्लाजा पर लगने वाले जाम से देश को हजारों करोड़ का नुकसान होता है? इसी समस्या को दूर करने के लिए एक नई शुरुआत हुई है। गुजरात के सूरत से एक बड़ी खबर सामने आई है। यहां देश का पहला बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम शुरू हो गया है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खुद इसका उद्घाटन किया। अब गाड़ियां बिना रुके टोल टैक्स भर सकेंगी।
क्या है ये नया सिस्टम?
यह सिस्टम सूरत-भरूच सेक्शन के NH-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा पर लगाया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब टोल भरने के लिए गाड़ियों को रुकना नहीं पड़ेगा। मल्टी-लेन फ्री फ्लो यानी MLFF तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यानी, अगर आपकी गाड़ी 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी चल रही है, तो भी टोल अपने आप कट जाएगा।
पारंपरिक टोल प्लाजा पर फिजिकल बैरियर होते हैं, लेकिन इस सिस्टम में सेंसर और कैमरे लगे हैं। ये कैमरे गाड़ियों को पहचान कर रियल टाइम में टोल काट लेंगे। सबसे खास बात यह है कि ये कैमरे 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरने वाली गाड़ियों की नंबर प्लेट भी पढ़ सकते हैं। तकनीक का कमाल है!
यह सिस्टम FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक को मिलाकर काम करता है। हाई-परफॉर्मेंस वाले AI कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट पढ़ेंगे, और RFID रीडर FASTag स्टिकर को स्कैन करेंगे। इसके बाद टोल की रकम सीधे आपके अकाउंट से कट जाएगी।
अब मान लीजिए, अगर किसी गाड़ी में FASTag नहीं लगा है, या वो काम नहीं कर रहा है, तो क्या होगा? चिंता मत कीजिए, कैमरा नंबर प्लेट के जरिए गाड़ी की पहचान कर मालिक को ई-नोटिस भेज देगा।
इस सिस्टम से क्या फायदे होंगे?
सबसे बड़ा फायदा तो यह होगा कि यात्रा का समय बचेगा। हाईवे पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी, जिससे ईंधन की बचत भी होगी। गडकरी ने ‘X’ पर लिखा कि यह सिस्टम आम लोगों के जीवन को आसान बनाएगा और व्यापार करने में भी सुविधा देगा, क्योंकि इससे माल और लॉजिस्टिक्स की आवाजाही तेज और अधिक प्रभावी होगी।
मंत्रालय का कहना है कि इस सिस्टम से प्रदूषण भी कम होगा, क्योंकि गाड़ियां कम समय तक सड़क पर रहेंगी। साथ ही, टोल प्लाजा पर कम लोगों की जरूरत होगी, जिससे संचालन में भी आसानी होगी।
यह MLFF की शुरुआत भारत के टोल सिस्टम के डिजिटलीकरण और राष्ट्रीय राजमार्गों के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।
वही दूसरी तरफ, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर भी सरकार ने सफाई दी है। कुछ खबरें आ रही थीं कि पेट्रोल-डीजल 28 रुपये तक महंगा हो सकता है, लेकिन सरकार ने कहा है कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। ये खबरें गलत हैं और डर फैलाने के लिए फैलाई जा रही हैं।
अब देखना यह है कि यह तकनीक पूरे देश में कब तक लागू होती है। लेकिन, शुरुआत अच्छी हुई है।
🔍 खबर का विश्लेषण
बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम निश्चित रूप से एक स्वागत योग्य कदम है। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि ईंधन की बचत और प्रदूषण में भी कमी आएगी। हालांकि, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह सिस्टम पूरे देश में कितनी जल्दी लागू होता है और क्या यह उतना ही प्रभावी साबित होता है जितना दावा किया जा रहा है। तकनीक का सही इस्तेमाल हो तो बहुत कुछ बदला जा सकता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ यह बैरियर-लेस टोलिंग सिस्टम कैसे काम करता है?
यह सिस्टम FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक को मिलाकर काम करता है। कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट पढ़ते हैं और RFID रीडर FASTag स्टिकर को स्कैन करते हैं, जिसके बाद टोल की रकम सीधे अकाउंट से कट जाती है।
❓ अगर गाड़ी में FASTag नहीं है तो क्या होगा?
अगर किसी गाड़ी में FASTag नहीं लगा है, तो कैमरा नंबर प्लेट के जरिए गाड़ी की पहचान कर मालिक को ई-नोटिस भेज देगा।
❓ इस सिस्टम से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
इस सिस्टम से यात्रा का समय बचेगा, हाईवे पर जाम कम होगा, ईंधन की बचत होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी। साथ ही, टोल प्लाजा पर कम लोगों की जरूरत होगी, जिससे संचालन में आसानी होगी।
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Published: 02 मई 2026 | HeadlinesNow.in

