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कैलाश मानसरोवर यात्रा में दो दिनों में दो मौतें: ऑक्सीजन की कमी बनी जानलेवा

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धर्म
📅 22 जुलाई 2026 | HeadlinesNow Desk
कैलाश मानसरोवर यात्रा में दो दिनों में दो मौतें: ऑक्सीजन की कमी बनी जानलेवा - HeadlinesNow Hindi News

🔑 मुख्य बातें

  • कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे दूसरे दल में दो दिनों में दो मौतें दर्ज की गईं, जिनमें एक यात्री और एक कुक शामिल हैं।
  • दोनों मौतों का प्राथमिक कारण उच्च ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी से हुआ दिल का दौरा बताया गया है, जो यात्रा के जोखिमों को उजागर करता है।

पिथौरागढ़, बुधवार, 22 जुलाई 2026: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे श्रद्धालुओं के दूसरे दल में दो दिनों के भीतर दूसरी मौत दर्ज की गई है। यह घटना तब सामने आई जब मंगलवार सुबह राजस्थान के 63 वर्षीय यात्री गौरी शंकर खंडेलवाल का नाभीढांग में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्हें सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई, जिसके बाद तुरंत सेना के चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, परंतु डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इससे दो दिन पहले, इसी दल के साथ चीन गए कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के एक कुक की भी हृदय गति रुकने से मौत हो गई थी, जिसे कम ऑक्सीजन स्तर से जुड़ा बताया गया है।

यात्रा में लगातार दूसरी दुखद घटना

धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार सुबह लगभग 08:45 बजे कैलाश मानसरोवर यात्रा के दूसरे दल ने लिपुलेख दर्रे से भारत में प्रवेश किया। इसी दौरान, जयपुर, राजस्थान के विद्याधरनगर निवासी गौरी शंकर खंडेलवाल को अचानक सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई। उन्हें तत्काल नाभीढांग स्थित सेना के एमआई रूम में ले जाया गया। दुखद रूप से, जांच के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। खंडेलवाल के पार्थिव शरीर को हेलीकॉप्टर द्वारा गुंजी से पिथौरागढ़ लाया गया है। यह घटना उस समय हुई है जब दो दिन पूर्व ही इसी दल के एक अन्य सदस्य की जान जा चुकी थी, जो इस पवित्र धर्म यात्रा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को उजागर करता है।

आपको बता दें, इससे पहले सोमवार रात को कुमाऊं मंडल विकास निगम के कुक जीवन राम की चीन के गुंफू में मृत्यु हो गई थी। अल्मोड़ा के छाना खोरकोटा निवासी जीवन राम की मौत का कारण भी दिल का दौरा बताया गया। चीन प्रशासन के अनुसार, अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन के कम स्तर के कारण उन्हें यह समस्या हुई। सूचना मिलते ही उनके परिजन धारचूला पहुंचे और पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार रात को ही शव अल्मोड़ा ले गए। दोनों ही मामलों में, अत्यधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी को एक प्रमुख कारक माना जा रहा है।

ऊंचाई और ऑक्सीजन का जानलेवा खेल

कैलाश मानसरोवर यात्रा को विश्व की सबसे चुनौतीपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक माना जाता है, जिसका एक मुख्य कारण इसकी अत्यधिक ऊंचाई है। मानसरोवर झील स्वयं समुद्र तल से 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी अधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर स्वाभाविक रूप से काफी कम होता है, जो यात्रियों और यात्रा स्टाफ दोनों के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। डॉक्टरों का मानना है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण दिल पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे हृदय संबंधी समस्याएं, जैसे कि दिल का दौरा, पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। यह जानना ज़रूरी है कि अत्यधिक ऊंचाई पर शरीर को अनुकूलन में समय लगता है, और यदि पर्याप्त सावधानी न बरती जाए तो परिणाम घातक हो सकते हैं। इस धर्म यात्रा पर निकलने से पहले व्यापक स्वास्थ्य जांच आवश्यक है।

यात्रा दलों का वर्तमान परिदृश्य

एसडीएम आशीष जोशी ने यात्रा से संबंधित अन्य जानकारी भी दी। मंगलवार सुबह 6:15 बजे, कैलाश मानसरोवर यात्रा का चौथा दल KMVN गुंजी से आईटीबीपी की सुरक्षा में लिपुलेख के लिए रवाना हुआ। इस दल में 33 पुरुष, 17 महिला यात्री और 2 सर्विस स्टाफ सहित कुल 52 सदस्य शामिल हैं। यह दल सुबह 08:30 बजे लिपुलेख से तिब्बत (चीन) में प्रवेश कर गया। वहीं, दूसरा दल, जिसमें ये दो दुखद घटनाएं हुई हैं, वह अब गुंजी से बुदी पड़ाव पहुंच गया है। यह दल अगले दिन धारचूला पहुंचेगा और फिर चौकोड़ी के लिए प्रस्थान करेगा। चौकोड़ी से यह दल पाताल भुवनेश्वर के दर्शन कर अल्मोड़ा के जागेश्वर के लिए रवाना होगा।

आगे की चुनौतियाँ और सुरक्षा उपाय

कैलाश मानसरोवर यात्रा का पांचवां दल भी चुनौतियों का सामना कर रहा है। धारचूला से गुंजी के लिए रवाना हुए इस दल को यात्रा मार्ग में दो स्थानों पर बोल्डर गिरने के कारण तवाघाट में रोकना पड़ा है। सीमा सड़क संगठन (BRO) सड़क खोलने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास कर रहा है। प्रशासन ने बताया कि यदि सड़क आज तक नहीं खुल पाती है, तो इस दल को वापस धारचूला लाया जाएगा। यह स्थिति यात्रा मार्ग की अस्थिरता और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाती है। ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन जाती है, जिसके लिए प्रशासन और विभिन्न एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। भविष्य में ऐसी धर्म यात्राओं के लिए यात्रियों को कठोर मेडिकल स्क्रीनिंग और पर्याप्त प्रशिक्षण प्रदान करना और भी महत्वपूर्ण होगा।

🔍 खबर का विश्लेषण

कैलाश मानसरोवर जैसी उच्च ऊंचाई वाली धर्म यात्राओं पर लगातार हो रही ये मौतें गंभीर चिंता का विषय हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि यात्रियों के लिए स्वास्थ्य जांच और ऊंचाई पर अनुकूलन संबंधी प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त करने की आवश्यकता है। केवल शारीरिक रूप से फिट लोगों को ही ऐसी कठिन यात्रा पर जाने की अनुमति मिलनी चाहिए, साथ ही मार्ग पर चिकित्सा सुविधाओं को भी मजबूत किया जाना चाहिए। इन घटनाओं से भविष्य की यात्राओं की योजना और सुरक्षा उपायों पर पुनर्विचार करना अनिवार्य हो गया है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान हुई इन मौतों का मुख्य कारण क्या है?

इन मौतों का मुख्य कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा की अत्यधिक ऊंचाई पर ऑक्सीजन के स्तर में कमी है। इससे दिल पर दबाव बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप हृदय गति रुकने या दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

❓ यात्रा पर गए अन्य दलों की वर्तमान स्थिति क्या है और उनकी सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?

तीसरा दल अभी चीन में है, चौथा दल तिब्बत के लिए रवाना हो चुका है। पांचवें दल को मार्ग में बोल्डर गिरने से तवाघाट में रोका गया है, जिसे BRO सड़क खुलने के बाद आगे भेजेगा। प्रशासन सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।

❓ मृतक यात्री और कुक कौन थे और वे कहाँ के निवासी थे?

मृतक यात्री गौरी शंकर खंडेलवाल (63) राजस्थान के जयपुर निवासी थे। दूसरे मृतक कुक जीवन राम अल्मोड़ा के छाना खोरकोटा निवासी थे, जो कुमाऊं मंडल विकास निगम के साथ यात्रा पर गए थे।

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Published: 22 जुलाई 2026 | HeadlinesNow.in

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