📅 04 अगस्त 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- लश्कर आतंकी रिजवान हनीफ ने भारतीय एजेंट्स पर पाकिस्तान में 30 सदस्यों की हत्या का आरोप लगाया है।
- भारत ने इन आरोपों को सिरे से नकारा है, कहता है टारगेट किलिंग उसकी नीति का हिस्सा नहीं है।
- ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने 2020 के बाद 20 आतंकियों की अज्ञात हत्याओं की रिपोर्ट दी थी।
📋 इस खबर में क्या है
मंगलवार, 4 अगस्त 2026, इस्लामाबाद: पाकिस्तान से एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तनाव बढ़ा दिया है। लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी, रिजवान हनीफ ने आरोप लगाया है कि पिछले तीन से चार वर्षों में भारतीय खुफिया एजेंट्स ने उनके संगठन के तीस से अधिक सदस्यों को मौत के घाट उतारा है। ये घटनाएं पाकिस्तान के पेशावर, कराची, रावलपिंडी और यहां तक कि पाक अधिकृत कश्मीर के रावलकोट व मुजफ्फराबाद जैसे शहरों में गुमनाम हमलावरों द्वारा अंजाम दी गईं। यह एक गंभीर आरोप है।
वायरल हो रहे एक वीडियो में, हनीफ साफ तौर पर कहते हुए दिखाई देते हैं, “हमारे लोगों को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने आजाद कश्मीर में अमन और चैन से नहीं रहने दिया। अपने एजेंट्स के जरिए उन्होंने हमारे लोगों को शहीद किया।” यह बयान उस समय आया है, जब पाकिस्तान लगातार भारत पर अपनी जमीन पर आतंकियों की लक्ष्यभेदी हत्याओं में शामिल होने का आरोप लगाता रहा है। जनवरी 2024 में, तत्कालीन विदेश सचिव मुहम्मद साइरस सज्जाद काजी ने इसी तरह के दावे किए थे, जिसका भारत ने तुरंत खंडन किया था। भारत का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि दूसरे देशों में टारगेट किलिंग उसकी नीति का हिस्सा नहीं है।
भारत के खिलाफ आरोपों का लंबा सिलसिला
भारत ने अतीत में भी पाकिस्तान के ऐसे सभी आरोपों को निराधार बताया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित भारतीय अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि भारत सरकार किसी भी देश में ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होती है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इस विषय पर खबरें उठती रही हैं। अप्रैल 2024 में ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि 2020 के बाद से पाकिस्तान में लगभग 20 आतंकियों और उग्रवादियों की अज्ञात हमलावरों ने हत्या की है। इन मृतकों में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोग शामिल थे। गार्डियन की रिपोर्ट में पाकिस्तानी अधिकारियों और कथित खुफिया सूत्रों के हवाले से इन घटनाओं के पीछे भारतीय एजेंसियों की भूमिका का दावा किया गया था।
लश्कर-ए-तैयबा: एक संक्षिप्त परिचय
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को भी दृढ़ता से खारिज करते हुए इसे झूठा और भारत-विरोधी प्रचार करार दिया था। यह विवाद कोई नया नहीं, बल्कि भारत-पाकिस्तान के जटिल संबंधों का एक और पहलू है। लश्कर-ए-तैयबा, जिसका अरबी में अर्थ ‘पवित्र लोगों की सेना’ है, की स्थापना 1987 में पाकिस्तान में हुई थी। इसका उद्भव सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान बने जिहादी नेटवर्क से हुआ था। ओसामा बिन लादेन के गुरु कहे जाने वाले अब्दुल्ला अज्जाम और उनके दो साथियों ने मरकज-अद-दावा-वल-इरशाद नाम के एक धार्मिक संगठन की नींव रखी थी, जिसका सशस्त्र विंग ही बाद में लश्कर-ए-तैयबा कहलाया। शुरुआती दौर में इसके लड़ाकों को अफगानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ लड़ने के लिए भेजा गया, लेकिन 1989 में सोवियत सेना की वापसी के बाद संगठन का मुख्य ध्यान जम्मू-कश्मीर पर केंद्रित हो गया। भारत, अमेरिका और कई पश्चिमी देश लंबे समय से लश्कर-ए-तैयबा को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का समर्थन मिलने का आरोप लगाते रहे हैं, जिसे पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर नकारता है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त रुख
मगर अंतरराष्ट्रीय मंच पर आरोपों का यह खेल जारी है, भारत अपनी धरती पर आतंकवाद के खिलाफ लगातार ठोस कार्रवाई कर रहा है। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में हाल ही में प्रशासन ने लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों के घरों को आईईडी लगाकर ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई पुलिस हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या के एक दिन बाद की गई, जिसमें बिजबेहड़ा के आदिल ठोकर और हसनपोरा के हारून गनई शामिल थे। यह दिखाता है कि भारत अपनी सुरक्षा के प्रति कितना गंभीर है और आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा। यह घटनाक्रम भारत-पाकिस्तान संबंधों में पहले से जल रही आग में घी डालने जैसा है, जहां सीमा पार से आतंकवाद का मुद्दा हमेशा से एक बड़ी बाधा रहा है।
पाकिस्तान से आ रहे इन आरोपों और भारत के सख्त खंडन के बीच, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए हालात और पेचीदा हो गए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच किसी भी तरह का तनाव पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। समय की मांग है कि तथ्यों की गहराई से जांच हो और जवाबदेही तय की जाए, ताकि इस तरह के संगीन आरोपों से उपजे अविश्वास का चक्र तोड़ा जा सके।
🔍 खबर का विश्लेषण
ये आरोप भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे छद्म युद्ध की गहराई को दर्शाते हैं। भले ही भारत ने इन दावों को खारिज किया हो, लेकिन पाकिस्तान में लगातार हो रहीं आतंकियों की मौतें क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकती हैं। यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के लिए असहज स्थिति पैदा करता है, क्योंकि यह उसकी धरती से संचालित आतंकी समूहों पर नियंत्रण की कमी उजागर करता है। भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे आरोप भारत के दृढ़ संकल्प को कम नहीं कर सकते।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ लश्कर आतंकी रिजवान हनीफ ने क्या दावा किया है?
रिजवान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले 3-4 सालों में भारतीय एजेंट्स ने पेशावर, कराची और PoK समेत विभिन्न स्थानों पर उनके संगठन के 30 से अधिक सदस्यों को मार डाला है। एक वीडियो में उसने ये आरोप लगाए हैं।
❓ भारत ने इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
भारत ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर स्पष्ट कर चुके हैं कि दूसरे देशों में टारगेट किलिंग भारत सरकार की नीति नहीं है। भारत इसे भारत-विरोधी प्रचार बताता है।
❓ क्या पाकिस्तान ने पहले भी ऐसे आरोप लगाए हैं?
जी हां, पाकिस्तान ने पहले भी भारत पर अपने देश में आतंकियों की हत्याओं का आरोप लगाया है। जनवरी 2024 में तत्कालीन विदेश सचिव मुहम्मद साइरस सज्जाद काजी ने भी ऐसे दावे किए थे।
❓ द गार्डियन की रिपोर्ट में क्या कहा गया था?
अप्रैल 2024 में द गार्डियन ने रिपोर्ट किया था कि 2020 के बाद पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से जुड़े लगभग 20 आतंकियों की हत्या हुई है, जिसमें भारतीय एजेंसियों की भूमिका का दावा किया गया था।
❓ लश्कर-ए-तैयबा का गठन कब और कैसे हुआ?
लश्कर-ए-तैयबा का गठन 1987 में पाकिस्तान में हुआ था। यह सोवियत-अफगान युद्ध के दौरान बने जिहादी नेटवर्क से निकला और बाद में इसका फोकस जम्मू-कश्मीर पर आ गया।
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Published: 04 अगस्त 2026 | HeadlinesNow.in

