📅 10 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- लगभग 2840 सिख श्रद्धालु बैसाखी मनाने पाकिस्तान रवाना हुए।
- श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित पवित्र गुरुधामों के दर्शन करेंगे, 10 दिन का वीजा मिला।
- SGPC की ओर से 1763 श्रद्धालुओं का जत्था भेजा गया, 32 के वीजा रद्द हुए।
📋 इस खबर में क्या है
जब से देश बना है, तब से ही लोगों का एक दूसरे के मुल्कों में जाना-आना लगा रहता है। कुछ लोग घूमने जाते हैं, तो कुछ अपने धर्म से जुड़े स्थलों के दर्शन करने। अब, बैसाखी के मौके पर, भारत से लगभग 2840 सिख श्रद्धालु पाकिस्तान गए हैं। ये लोग वहां जाकर अपने पवित्र गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे और बैसाखी का त्योहार मनाएंगे। उन्हें इसके लिए 10 दिन का वीज़ा मिला है।
श्रद्धालुओं का जत्था रवाना
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस मौके पर 1763 श्रद्धालुओं का एक जत्था भेजा। माहौल भक्तिमय था, लोग “बोले सो निहाल… सत श्री अकाल” के नारे लगा रहे थे। — और ये बात अहम है — इस जत्थे को एसजीपीसी सदस्य सुरजीत सिंह तुगलवाल लीड कर रहे हैं। ये जत्था अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गया है।
मगर कुछ लोगों को निराशा भी हुई, क्योंकि उनके वीज़ा रद्द हो गए। एसजीपीसी ने 1795 लोगों के वीज़ा के लिए अप्लाई किया था, लेकिन 32 लोगों को वीज़ा नहीं मिल पाया। बाकी लोगों को वीज़ा मिल गया और वे खुशी-खुशी पाकिस्तान के लिए रवाना हो गए।
दर्शन और वापसी
ये जत्था पाकिस्तान में अलग-अलग धार्मिक स्थलों के दर्शन करेगा। इसके बाद, 19 अप्रैल को ये सभी श्रद्धालु वापस भारत लौट आएंगे। अधिकारियों के मुताबिक, ये पूरी यात्रा 10 दिन की होगी। खालसा सृजना दिवस (बैसाखी) पर पाकिस्तान के गुरुधामों के दर्शन के लिए अलग-अलग कमेटियों के श्रद्धालु गए हैं।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से 409, हरियाणा कमेटी से 255 और एसजीपीसी से 1763 श्रद्धालुओं को वीज़ा मिला है। कुल मिलाकर 2840 श्रद्धालु पाकिस्तान जा रहे हैं।
करतारपुर साहिब का रास्ता खोलने की मांग
श्रद्धालुओं ने सरकार से अपील की है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को वीज़ा दिया जाए। उन्होंने करतारपुर साहिब का रास्ता खोलने की भी मांग की है। उनका कहना है कि पाकिस्तान जो 20 डॉलर का शुल्क लेता है, उसे भी खत्म कर देना चाहिए। जिन लोगों को वीज़ा नहीं मिला, वे थोड़े निराश ज़रूर थे।
14 अप्रैल को खालसा सृजना दिवस
एसजीपीसी के सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने बताया कि 14 अप्रैल को खालसा सृजना दिवस मनाया जाएगा। इसी मौके पर ये जत्था पाकिस्तान भेजा गया है। उन्होंने ये भी बताया कि 1795 पासपोर्ट भेजे गए थे, जिनमें से 32 रद्द हो गए और 1763 श्रद्धालु यात्रा पर जा रहे हैं। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा है, जो भारत और पाकिस्तान के लोगों को आपस में जोड़ती है। धर्म के प्रति लोगों की आस्था ही उन्हें इतनी दूर ले जाती है।
आगे क्या होगा?
अब देखना ये है कि क्या सरकार श्रद्धालुओं की मांगों पर ध्यान देगी? क्या करतारपुर साहिब का रास्ता खुलेगा? और क्या पाकिस्तान 20 डॉलर का शुल्क हटाएगा? ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन, एक बात तो तय है कि धर्म के प्रति लोगों की आस्था हमेशा बनी रहेगी। और लोग ऐसे ही जत्थों में धर्म स्थलों के दर्शन करने जाते रहेंगे। आखिर, धर्म ही तो है, जो हमें एक दूसरे से जोड़े रखता है।
🔍 खबर का विश्लेषण
इस घटना से पता चलता है कि लोगों में अपने धर्म के प्रति कितनी आस्था है। सरकार को चाहिए कि वह श्रद्धालुओं की मांगों पर ध्यान दे और करतारपुर साहिब का रास्ता खोले, इससे दोनों देशों के बीच संबंध भी सुधरेंगे। अगर पाकिस्तान शुल्क हटा दे तो और भी लोग दर्शन करने जा पाएंगे, जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ कितने सिख श्रद्धालु पाकिस्तान गए हैं?
लगभग 2840 सिख श्रद्धालु बैसाखी मनाने के लिए पाकिस्तान गए हैं। इनमें दिल्ली, हरियाणा और SGPC के श्रद्धालु शामिल हैं।
❓ उन्हें कितने दिन का वीज़ा मिला है?
श्रद्धालुओं को पाकिस्तान में गुरुद्वारों के दर्शन करने और बैसाखी मनाने के लिए 10 दिन का वीज़ा मिला है।
❓ SGPC ने कितने श्रद्धालुओं का जत्था भेजा है?
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने 1763 श्रद्धालुओं का एक जत्था पाकिस्तान भेजा है।
❓ क्या सभी श्रद्धालुओं को वीज़ा मिल गया था?
नहीं, एसजीपीसी ने 1795 वीज़ा के लिए आवेदन भेजे थे, जिनमें से 32 श्रद्धालुओं के वीज़ा रद्द कर दिए गए थे।
❓ श्रद्धालुओं ने सरकार से क्या मांग की है?
श्रद्धालुओं ने सरकार से करतारपुर साहिब का रास्ता खोलने और पाकिस्तान द्वारा लगाए गए 20 डॉलर के शुल्क को खत्म करने की मांग की है।
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Published: 10 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

