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हरियाणा बिजली उपभोक्ताओं को राहत? ईंधन अधिभार वसूली में बदलाव की तैयारी

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उद्योग
📅 12 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
हरियाणा बिजली उपभोक्ताओं को राहत? ईंधन अधिभार वसूली में बदलाव की तैयारी - HeadlinesNow Hindi News

🔑 मुख्य बातें

  • हरियाणा डिस्कॉम ने ईंधन अधिभार की मासिक वसूली टालने का प्रस्ताव दिया, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
  • बिजली कंपनियां अब उपभोक्ताओं से 47 पैसे प्रति यूनिट की दर से अगले वित्त वर्षों में वसूली करने का प्रस्ताव रख रही हैं।
  • हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने इस मामले पर जन परामर्श शुरू किया है, 14 मई को सार्वजनिक सुनवाई होगी।

हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक अच्छी खबर आ सकती है। पिछले कुछ समय से बिजली की दरों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, राज्य की बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) उपभोक्ताओं को राहत देने की तैयारी में हैं। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) से संपर्क किया है। मकसद? ईंधन अधिभार की वसूली को आसान बनाना।

क्या है डिस्कॉम का प्रस्ताव?

दरअसल, UHBVN और DHBVN ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बहु-वर्ष शुल्क (MYT) विनियम, 2024 के विनियमन 68 में बदलाव की मांग की है। अभी के नियम के अनुसार, ईंधन और बिजली खरीदने पर होने वाला अतिरिक्त खर्च हर महीने उपभोक्ताओं से ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार (FPPA) के ज़रिए वसूला जाता है। अब बिजली कंपनियों ने आयोग से कहा है कि इस मासिक वसूली को कुछ समय के लिए रोक दिया जाए। इसकी जगह, वे चाहते हैं कि यह पैसा अगले कुछ सालों में उपभोक्ताओं से 47 पैसे प्रति यूनिट की दर से वसूला जाए।

कंपनियों ने यह भी कहा है कि बकाया राशि वसूलने के लिए ‘कैरींग कॉस्ट’ को भी शामिल किया जाए। यानी, इस पर ब्याज जैसी अतिरिक्त लागत भी लगनी चाहिए। इससे कंपनियों को नुकसान नहीं होगा। यह प्रस्ताव अगर मंजूर हो जाता है तो उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिल सकती है।

यह बड़ी बात है।

आयोग का रुख और आगे की राह

बस एक बात — आयोग ने अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। आयोग का कहना है कि पहले वह इस मामले पर लोगों की राय जानेगा। इसके लिए, HERC ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है, जिसमें सभी संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। कोई भी व्यक्ति या संस्था 1 मई तक अपनी राय दे सकता है। इसके बाद, 14 मई को पंचकूला में आयोग के दफ्तर में इस मामले पर सार्वजनिक सुनवाई होगी।

अब देखना यह है कि इस प्रक्रिया के बाद आयोग क्या फैसला लेता है। क्या उपभोक्ताओं को वाकई राहत मिलेगी? या उन्हें अभी और इंतजार करना होगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन फिलहाल, यह खबर उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण लेकर आई है, जो बिजली की बढ़ती दरों से परेशान हैं। उद्योग जगत भी इस फैसले पर नज़र बनाए हुए है।

विशेषज्ञों की राय

उद्योग एक्सपर्ट्स कह रहे हैं — अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तो इससे उपभोक्ताओं को तो फायदा होगा ही, साथ ही बिजली कंपनियों को भी अपनी वित्तीय स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि मासिक वसूली को टालने से उपभोक्ताओं पर एक साथ पड़ने वाला बोझ कम होगा। 47 पैसे प्रति यूनिट की दर से वसूली धीरे-धीरे होगी, जिससे लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी। लेकिन, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कैरींग कॉस्ट को शामिल करने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
यह देखना होगा कि आयोग इस पर क्या रुख अपनाता है।

यह भी ध्यान देने वाली बात है कि बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय हालत सुधारना भी ज़रूरी है। अगर कंपनियां घाटे में चलती रहीं, तो इसका असर बिजली की आपूर्ति पर पड़ सकता है। तभी तो , आयोग को एक ऐसा फैसला लेना होगा, जो उपभोक्ताओं और कंपनियों दोनों के लिए फायदेमंद हो। उद्योग से जुड़े लोगों की भी यही राय है।

ऐसे में, सबकी निगाहें अब 14 मई को होने वाली सार्वजनिक सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन यह साफ हो जाएगा कि हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी या नहीं। और अगर मिलेगी, तो किस रूप में। उद्योग और आम जनता दोनों को इस फैसले का बेसब्री से इंतजार है।

🔍 खबर का विश्लेषण

अगर हरियाणा सरकार डिस्कॉम के प्रस्ताव को मान लेती है तो यह राज्य के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत होगी। मासिक ईंधन अधिभार वसूली से लोगों को हर महीने अपनी जेब से ज्यादा पैसे निकालने पड़ते थे। अब अगर वसूली अगले कुछ सालों में फैलाई जाती है तो उपभोक्ताओं पर एक साथ बोझ नहीं पड़ेगा। लेकिन, कैरींग कॉस्ट को शामिल करने से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, इसलिए आयोग को सोच-समझकर फैसला लेना होगा। यह कदम बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय हालत सुधारने में भी मददगार साबित हो सकता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ ईंधन अधिभार क्या है?

ईंधन अधिभार बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की लागत में बदलाव के कारण लगने वाला अतिरिक्त शुल्क है। इसे बिजली कंपनियां उपभोक्ताओं से वसूलती हैं।

❓ डिस्कॉम ने क्या प्रस्ताव दिया है?

डिस्कॉम ने प्रस्ताव दिया है कि ईंधन अधिभार की मासिक वसूली को टाल दिया जाए और इसकी जगह अगले वित्त वर्षों में 47 पैसे प्रति यूनिट की दर से वसूली की जाए।

❓ इस प्रस्ताव से उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा?

इस प्रस्ताव से उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिलेगी क्योंकि उन्हें हर महीने ईंधन अधिभार नहीं देना होगा। इससे उन पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम होगा।

❓ आगे क्या होगा?

हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने इस मामले पर जन परामर्श शुरू किया है। 14 मई को सार्वजनिक सुनवाई होगी, जिसके बाद आयोग अपना फैसला सुनाएगा।

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Published: 12 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

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Journalist covering politics and technology.
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