📅 10 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- परिक्रमा करते समय ‘यानि च पापानि’ मंत्र का जाप करने से पाप नष्ट होते हैं और मन शुद्ध होता है।
- हमेशा दाहिने हाथ की ओर से परिक्रमा शुरू करें, क्योंकि दक्षिण दिशा को दाहिना माना जाता है।
📋 इस खबर में क्या है
क्या आपने कभी सोचा है, मंदिर में भगवान की मूर्ति के चारों ओर क्यों घूमते हैं? ये सिर्फ एक रिवाज नहीं, इसके पीछे गहरा अर्थ छिपा है। इसे परिक्रमा कहते हैं, या प्रदक्षिणा भी। मंदिरों में ये दृश्य आम है, लोग श्रद्धा से मूर्ति के चारों ओर घूमते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं, इसके धार्मिक और वैज्ञानिक कारण भी हैं?
परिक्रमा: पुण्य और विज्ञान का संगम
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा बताते हैं कि शास्त्रों में परिक्रमा करने के कई फायदे बताए गए हैं। माना जाता है कि इससे पुराने पाप धुल जाते हैं और ऐसा पुण्य मिलता है जो जीवन भर साथ रहता है। ये मन और शरीर दोनों को शुद्ध करने का तरीका है।
विज्ञान की मानें तो, मंदिर और मूर्ति में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा परिक्रमा करने से हमारे शरीर में प्रवेश करती है। इससे नकारात्मक विचार दूर होते हैं और मन में पवित्रता आती है। ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव जागता है। जब हम घूमते हैं, तो हमारे शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है। ये बात तो है।
कैसे करें सही परिक्रमा?
परिक्रमा हमेशा दाहिने हाथ की तरफ से शुरू करनी चाहिए। क्यों? क्योंकि दक्षिण दिशा को दाहिना माना गया है। तो , जब भी मंदिर जाएं, दाहिने हाथ से ही परिक्रमा शुरू करें।
अलग-अलग देवताओं के लिए परिक्रमा की संख्या भी अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए, शिवजी के लिए आधी परिक्रमा का नियम है। इसका कारण यह है कि शिव मंदिर में जलधारी को पार नहीं करना चाहिए। जलधारी तक पहुंचने पर परिक्रमा पूरी मानी जाती है।
परिक्रमा करते समय कौन सा मंत्र बोलें?
शास्त्रों में एक खास मंत्र बताया गया है: “यानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सवार्णि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे-पदे।।” इसका अर्थ है, जाने-अनजाने में किए गए पाप और पिछले जन्मों के पाप, परिक्रमा के साथ नष्ट हो जाएं। ये मंत्र मन को शुद्ध करता है और भगवान से सही सोच और बुद्धि देने की प्रार्थना करता है।
परिक्रमा का तरीका
परिक्रमा करते समय मन में श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए। धीरे-धीरे चलें और भगवान का ध्यान करें। ये सिर्फ एक शारीरिक क्रिया नहीं है, ये एक आध्यात्मिक अनुभव है।
परिक्रमा: एक नजरिया
परिक्रमा, एक प्राचीन परंपरा, आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ये हमें अपने पापों से मुक्ति पाने और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का एक सरल, लेकिन शक्तिशाली तरीका प्रदान करती है। ये धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सवाल ये है, क्या हम इस परंपरा को सिर्फ एक रिवाज मानकर निभाते हैं, या इसके पीछे के गहरे अर्थ को समझने की कोशिश करते हैं? शायद, अब समय है कि हम इस पर विचार करें।
🔍 खबर का विश्लेषण
परिक्रमा भारतीय संस्कृति में गहरी जड़ें जमाए हुए है। यह न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया भी है जो हमारे मन और शरीर को सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। इस खबर से लोगों को परिक्रमा के महत्व को समझने और इसे सही तरीके से करने की प्रेरणा मिलेगी।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ परिक्रमा क्यों की जाती है?
परिक्रमा पापों से मुक्ति पाने, सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने और ईश्वर के प्रति समर्पण का भाव जगाने के लिए की जाती है।
❓ शिवजी के मंदिर में कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?
शिवजी के मंदिर में आधी परिक्रमा करने का नियम है, क्योंकि जलधारी (पानी की धार) को पार करना उचित नहीं माना जाता।
❓ परिक्रमा करते समय कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?
परिक्रमा करते समय ‘यानि च पापानि जन्मांतर कृतानि च। तानि सवार्णि नश्यन्तु प्रदक्षिणे पदे-पदे।।’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
📰 और पढ़ें:
ताज़ा और विश्वसनीय समाचारों के लिए HeadlinesNow.in से जुड़े रहें।
Published: 10 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

