📅 27 मार्च 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- रामनवमी पर रामलला का सूर्य तिलक, ललाट पर 9 मिनट तक नीली किरणें पड़ीं।
- सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइप से 65 फीट लंबा सिस्टम बनाया गया था।
- आज लगभग 10 लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे।
📋 इस खबर में क्या है
अयोध्या में रामलला का दिव्य सूर्य तिलक
अयोध्या में रामनवमी के अवसर पर शुक्रवार को एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। दोपहर 12 बजे, रामलला का सूर्य तिलक किया गया। प्राण-प्रतिष्ठा के बाद यह दूसरा अवसर था जब रामलला का सूर्य तिलक हुआ। अभिजीत मुहूर्त में हुए इस सूर्य तिलक के दौरान, भगवान राम के ललाट पर 9 मिनट तक नीली किरणें पड़ीं। इस अद्भुत दृश्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी टेलीविजन पर देखा। सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का जन्म उत्सव मनाया गया।
गर्भगृह में विशेष पूजा और आरती
सूर्य तिलक के दौरान 14 पुजारी गर्भगृह में मौजूद रहे, जिन्होंने विशेष पूजा अर्चना की। इसके बाद रामलला की आरती की गई। सूर्य तिलक संपन्न होने के बाद, कुछ समय के लिए मंदिर के द्वार बंद कर दिए गए। रामलला को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। यह एक विशेष अवसर था, जिसमें भगवान राम के प्रति भक्तों की अपार श्रद्धा और भक्ति का प्रदर्शन हुआ। धर्म का यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
सूर्य तिलक के लिए विशेष व्यवस्था
सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइपों से 65 फीट लंबा एक विशेष सिस्टम बनाया गया था। इसमें 4 लेंस और 4 मिरर का उपयोग किया गया, जिसके माध्यम से सूर्य की किरणें गर्भगृह में रामलला के मस्तक तक पहुंचाई गईं। इससे पहले, गर्भगृह को सुंदर फूलों से सजाया गया था, जो इस अवसर की भव्यता को और बढ़ा रहा था। यह अनूठा आयोजन धर्म और विज्ञान का अद्भुत संगम था।
दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़
सुबह 5:30 बजे रामलला की आरती की गई, और भगवान को स्वर्ण जड़ित पीतांबर पहनाया गया। आम दिनों की तुलना में, भक्तों को 3 घंटे अधिक रामलला के दर्शन करने का अवसर मिला। सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक, यानी 18 घंटे तक दर्शन जारी रहे, जबकि पहले यह समय सुबह 6:30 बजे से रात 9:30 बजे तक था। आज लगभग 10 लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे। राम जन्मभूमि परिसर में लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।
रामनवमी पर विशेष आयोजन
रामनवमी के इस पावन अवसर पर, राम मंदिर के मुख्य पुजारी ने आसान पूजन विधि और आरती करने का शास्त्रीय तरीका भी बताया। रामलला के सूर्य तिलक से जुड़े पल-पल के अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग भी चलाया गया, जिससे देश-विदेश के भक्तों को इस अद्भुत क्षण का अनुभव हुआ। रामनवमी का यह पर्व धर्म और संस्कृति के प्रति हमारी अटूट आस्था का प्रतीक है।
निष्कर्ष
अयोध्या में रामनवमी का यह उत्सव अद्वितीय था, जिसमें रामलला का सूर्य तिलक एक अद्भुत और अविस्मरणीय अनुभव रहा। लाखों भक्तों की उपस्थिति और भगवान राम के प्रति उनकी श्रद्धा ने इस अवसर को और भी विशेष बना दिया।
🔍 खबर का विश्लेषण
अयोध्या में रामलला का सूर्य तिलक एक ऐतिहासिक घटना है जो धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और अयोध्या की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। यह घटना हिंदू समुदाय के लिए गर्व का विषय है और राम मंदिर के प्रति उनकी आस्था को और मजबूत करेगी। इस आयोजन ने देश और दुनिया में सकारात्मक संदेश दिया है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ रामनवमी पर रामलला का सूर्य तिलक कब हुआ?
रामनवमी पर रामलला का सूर्य तिलक दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में हुआ।
❓ सूर्य तिलक के दौरान रामलला के ललाट पर कितनी देर तक किरणें पड़ीं?
सूर्य तिलक के दौरान रामलला के ललाट पर 9 मिनट तक नीली किरणें पड़ीं।
❓ राम मंदिर में दर्शन का समय क्या था?
रामनवमी पर राम मंदिर में दर्शन का समय सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक था, यानी 18 घंटे।
❓ सूर्य तिलक के लिए किस प्रकार की व्यवस्था की गई थी?
सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइपों से 65 फीट लंबा सिस्टम बनाया गया था, जिसमें लेंस और मिरर का उपयोग किया गया।
❓ रामनवमी पर अयोध्या में कितने श्रद्धालु पहुंचे?
रामनवमी पर लगभग 10 लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे।
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Published: 27 मार्च 2026 | HeadlinesNow.in

