📅 10 मार्च 2026 | HeadlinesNow Desk

🔑 मुख्य बातें
- बांग्लादेश में स्थित हैं मां दुर्गा के 7 दिव्य शक्तिपीठ, जो दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं।
- जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ मां काली को समर्पित है, जिसका वास्तुकला 13वीं शताब्दी का है।
- सुगंधा शक्तिपीठ में मां सती की नाक गिरी थी, यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के शिकारपुर में है।
📋 इस खबर में क्या है
सनातन धर्म में मां दुर्गा का विशेष महत्व है। शुक्रवार का दिन मां दुर्गा को समर्पित होता है और इस दिन उनकी भक्तिभाव से पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है, साथ ही सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है। भारत में मां दुर्गा के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी मां दुर्गा के 7 शक्तिपीठ स्थित हैं? ये शक्तिपीठ अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं और यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।
इस आर्टिकल में, हम आपको बांग्लादेश में स्थित इन 7 शक्तिपीठों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। इन मंदिरों का इतिहास, महत्व और उनसे जुड़ी कथाएं आपको निश्चित रूप से आकर्षित करेंगी। इन शक्तिपीठों की यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बांग्लादेश की संस्कृति और विरासत को भी समझने का एक शानदार अवसर है। तो आइये, इन दिव्य स्थलों के बारे में जानते हैं।
जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ: काली मां का दिव्य धाम
जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ बांग्लादेश के सतखिरा जिले में स्थित है। यह मंदिर मां काली को समर्पित है और माना जाता है कि इसका वास्तुकला 13वीं शताब्दी का है। मंदिर की वास्तुकला में उस दौर की झलक देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर मां सती की हथेलियां गिरी थीं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ की यात्रा की थी, जिससे इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ गया है। यह मंदिर न केवल हिंदुओं के लिए बल्कि पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। यहां आने वाले लोग मंदिर की सुंदरता और शांति से अभिभूत हो जाते हैं।
सुगंधा शक्तिपीठ: मां तारा का आशीर्वाद
सुगंधा शक्तिपीठ बांग्लादेश के शिकारपुर में सुगंधा नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर मां तारा को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि यहां पर मां सती की नाक गिरी थी। यह शक्तिपीठ हिंदुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। इस मंदिर में स्थित प्रतिमाओं की कई बार चोरी भी हुई है, लेकिन इसके बावजूद इसकी महिमा कम नहीं हुई है। सुगंधा शक्तिपीठ का शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां आने वाले भक्त मां तारा से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ: चंद्रनाथ पर्वत पर विराजमान
चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ बांग्लादेश के चटगांव जिले में चंद्रनाथ पर्वत के शिखर पर स्थित है। इसे भवानी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां पर मां सती के ठुड्डी का अंश गिरा था। यह शक्तिपीठ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। चंद्रनाथ पर्वत की चढ़ाई थोड़ी कठिन है, लेकिन यहां पहुंचने के बाद मिलने वाली शांति और सुकून अद्भुत है। चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ में दर्शन करने से भक्तों को मानसिक शांति और आत्मिक संतुष्टि मिलती है।
जयंती शक्तिपीठ: सिलहट का दिव्य स्थल
जयंती शक्तिपीठ बांग्लादेश के सिलहट जिले में स्थित है। यह शक्तिपीठ भी मां दुर्गा को समर्पित है और यहां साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है। इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। जयंती शक्तिपीठ न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह बांग्लादेश की सांस्कृतिक धरोहर का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु इस स्थान की सुंदरता और पवित्रता से प्रभावित होते हैं।
अन्य शक्तिपीठ
बांग्लादेश में इन चार प्रमुख शक्तिपीठों के अलावा, अन्य तीन शक्तिपीठ भी हैं जिनका उल्लेख कम मिलता है लेकिन उनका महत्व भी कम नहीं है। इन सभी शक्तिपीठों का अपना-अपना इतिहास और महत्व है। इन मंदिरों की यात्रा करने से भक्तों को मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके जीवन में सुख-शांति आती है। इन शक्तिपीठों की यात्रा एक अद्भुत और अविस्मरणीय अनुभव होता है।
निष्कर्ष
बांग्लादेश में स्थित ये 7 शक्तिपीठ न केवल धार्मिक स्थल हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर भी हैं। इन मंदिरों की यात्रा से भक्तों को मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और उन्हें अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। इन शक्तिपीठों का महत्व आज भी बना हुआ है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। इन मंदिरों की देखभाल करना और इनकी महिमा को बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह खबर बांग्लादेश में स्थित शक्तिपीठों के महत्व को उजागर करती है। यह न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करेगा। इन मंदिरों के बारे में जानकारी प्राप्त करके लोग अपनी आस्था को और अधिक गहरा कर सकते हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ बांग्लादेश में कितने शक्तिपीठ हैं?
बांग्लादेश में कुल 7 शक्तिपीठ हैं जो मां दुर्गा को समर्पित हैं और अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
❓ जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ किस देवी को समर्पित है?
जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ मां काली को समर्पित है और यह बांग्लादेश के सतखिरा जिले में स्थित है।
❓ सुगंधा शक्तिपीठ कहां स्थित है?
सुगंधा शक्तिपीठ बांग्लादेश के शिकारपुर में सुगंधा नदी के तट पर स्थित है, जहां मां सती की नाक गिरी थी।
❓ चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ कहां है?
चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ बांग्लादेश के चटगांव जिले में चंद्रनाथ पर्वत के शिखर पर स्थित है।
❓ इन शक्तिपीठों का क्या महत्व है?
इन शक्तिपीठों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है। यहां दर्शन करने से भक्तों को मां दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है और सुख-शांति प्राप्त होती है।
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Source: Agency Inputs
| Published: 10 मार्च 2026

