📅 19 मार्च 2026 | HeadlinesNow Desk

🔑 मुख्य बातें
- तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान को अमेरिका के लिए सबसे बड़े परमाणु खतरों में से एक बताया।
- खुफिया समुदाय का आकलन है कि कई देश मिसाइल सिस्टम विकसित कर रहे हैं जो अमेरिका को निशाना बना सकते हैं।
- गबार्ड ने उत्तर कोरिया के रूस और चीन के साथ मजबूत होते संबंधों पर भी प्रकाश डाला।
📋 इस खबर में क्या है
अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने बुधवार को पाकिस्तान को अमेरिका के सामने मौजूद सबसे बड़े परमाणु खतरों में से एक बताया है। उन्होंने पाकिस्तान को रूस और चीन जैसी बड़ी ताकतों के समकक्ष रखा है। गबार्ड ने ईरान समेत कई देशों द्वारा विकसित की जा रही मिसाइल क्षमताओं को लेकर बढ़ती चिंताओं की ओर भी इशारा किया।
पाकिस्तान से परमाणु खतरा
तुलसी गबार्ड ने सांसदों को बताया कि खुफिया समुदाय का आकलन है कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान कई तरह के नए, उन्नत या पारंपरिक मिसाइल डिलीवरी सिस्टम पर रिसर्च कर रहे हैं और उन्हें विकसित कर रहे हैं। इनमें परमाणु और पारंपरिक पेलोड शामिल हैं, जो अमेरिका को अपनी जद में ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका खुफिया एजेंसियों को उम्मीद है कि अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम मिसाइलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होगी। अनुमान है कि 2035 तक इनकी संख्या 16 हजार से ज़्यादा हो जाएगी, जो आज लगभग 3 हजार है। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
उत्तर कोरिया, रूस और चीन से पाकिस्तान के बढ़ते रिश्ते
ब्रीफिंग के दौरान गबार्ड ने उत्तर कोरिया के रूस और चीन दोनों के साथ मजबूत होते संबंधों पर भी रोशनी डाली। यह इस बात का संकेत है कि जिन देशों को वॉशिंगटन अपना विरोधी मानता है, उनके बीच रणनीतिक तालमेल और गहरा हो रहा है। यह एक वायरल मुद्दा है जिसपर सबकी नज़र है।
ईरान पर गबार्ड का बयान
ईरान के मामले में गबार्ड ने अमेरिका के उस रुख को दोहराया कि उसकी परमाणु क्षमताओं को काफी हद तक कम कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले साल जून में अमेरिका ने ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह से खत्म कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि उसके बाद से उन क्षमताओं को फिर से बनाने के किसी भी प्रयास का कोई सबूत नहीं मिला है। पिछले साल नवंबर में ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान उन देशों में से एक है जो सक्रिय रूप से परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में रूस, चीन और उत्तर कोरिया का भी नाम लिया था।
निष्कर्ष
तुलसी गबार्ड का यह बयान अमेरिका के लिए पाकिस्तान से बढ़ते खतरे को दर्शाता है। उन्होंने न केवल पाकिस्तान की परमाणु क्षमता को लेकर चिंता जताई है, बल्कि उत्तर कोरिया, रूस और चीन के साथ उसके बढ़ते संबंधों पर भी प्रकाश डाला है। यह खबर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी महत्वपूर्ण है।
🔍 खबर का विश्लेषण
तुलसी गबार्ड का यह बयान अमेरिका की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है। यह पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों को और जटिल बना सकता है। इसके अलावा, यह अन्य देशों को भी अपनी परमाणु नीति पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित कर सकता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ तुलसी गबार्ड ने पाकिस्तान को इतना बड़ा खतरा क्यों बताया?
गबार्ड ने पाकिस्तान की परमाणु क्षमता और उसके रूस और चीन के साथ बढ़ते संबंधों को देखते हुए यह बयान दिया है।
❓ अमेरिका के लिए अन्य खतरे कौन से हैं?
गबार्ड ने रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान को भी अमेरिका के लिए खतरे के रूप में गिनाया है।
❓ अमेरिका इन खतरों से कैसे निपट सकता है?
अमेरिका को इन खतरों से निपटने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाने की जरूरत है, जिसमें कूटनीति, सैन्य तैयारी और खुफिया जानकारी शामिल है।
❓ इस खबर का भारत पर क्या असर होगा?
इस खबर का भारत पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि पाकिस्तान भारत का पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं।
❓ क्या पाकिस्तान वाकई में अमेरिका के लिए इतना बड़ा खतरा है?
यह एक जटिल सवाल है जिसका जवाब देना मुश्किल है। हालांकि, गबार्ड का बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका पाकिस्तान को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है।
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Published: 19 मार्च 2026 | HeadlinesNow.in

