📅 08 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- योगी आदित्यनाथ ने सनातन समाज से एकजुट होने का आह्वान किया।
- उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए एकता की शक्ति बताई।
📋 इस खबर में क्या है
क्या सनातन धर्म को मानने वाले एकजुट होकर एक बड़ी ताकत बन सकते हैं? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का तो यही मानना है। मथुरा में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सनातन समाज से एकजुट होने का आह्वान किया। लखनऊ से आ रही खबर के अनुसार, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगर सभी सनातनी मिलकर अपनी ताकत दिखाएं, तो भारत को नुकसान पहुंचाने की साजिश करने वालों का कोई भी मंसूबा कामयाब नहीं हो पाएगा।
अयोध्या का उदाहरण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामनगरी अयोध्या का उदाहरण देते हुए बताया कि 2017 से पहले वहां क्या स्थिति थी। — और ये बात अहम है — उन्होंने कहा कि पहले अयोध्या में सिर्फ तीन घंटे बिजली मिलती थी, और “जय श्रीराम” बोलने पर लाठियां मिलती थीं, लड्डू नहीं। गलियां संकरी थीं और भवन जर्जर हालत में थे। आवागमन के साधन भी सीमित थे। लेकिन आज, अयोध्या त्रेतायुग की याद दिलाती है। योगी ने कहा कि जब संत एक मंच पर आए और एक स्वर में बोले, तो 500 साल का कलंक मिट गया और अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ।
योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि जब संतों की एकता में इतनी शक्ति है तो सभी सनातनी एकजुट होकर अपनी ताकत का अहसास कराना शुरू कर दें। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से कोई भी विधर्मी और उनकी आड़ में हिंदू विरोधी षड्यंत्र करने वाले भारत का बाल भी बांका नहीं कर पाएंगे। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में राजनीति गरमाई हुई है, और विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी विचारधाराओं को आगे बढ़ाने में लगे हैं।
सनातन और देशहित सर्वोपरि
वृंदावन में संत श्रीमद् जगद्गुरु द्वाराचार्य श्री मलूकदास जी महाराज की 452वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी का भी हित सनातन और देशहित से बड़ा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि बिना रुके, थके, डिगे और झुके, इस यात्रा को हमेशा आगे बढ़ाना होगा। योगी ने कहा कि व्यक्तिगत स्वार्थ, भारत राष्ट्र और सनातन धर्म के मार्ग में बाधा नहीं बनना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संतों ने जब व्यक्तिगत, आश्रम, संप्रदाय और पंथ के हितों को एक तरफ रखकर सनातन हित के बारे में सोचना शुरू किया, तब यह व्यापक जागृति और दिव्य तेज देखने को मिला। उन्होंने राम मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि कई पीढ़ियां राम मंदिर का दर्शन नहीं कर पाईं, लेकिन आज हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि वह अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन, जन्मभूमि की मुक्ति, श्रीराम मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा की साक्षी बनी।
संभल का जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने संभल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1526 में बाबर की औलादों ने वहां श्री हरिहर मंदिर को तोड़ा था। वहां 67 तीर्थ और 19 कूप थे, जिन्हें मिटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि 1976-78 में दंगे हुए, जिसमें सैकड़ों हिंदुओं को मार दिया गया। 1995-96 में सपा सरकार में दरिंदों के मुकदमे वापस कर दिए गए। योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने 84 कोसी परिक्रमा के लिए पैसा दिया और प्रशासन से टू-लेन सड़क, सराय और धर्मशाला बनाने के लिए कहा।
आगे क्या होगा?
योगी आदित्यनाथ का यह बयान राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे सकता है। क्या सनातन समाज एकजुट होकर एक राजनीतिक ताकत बनेगा? या यह सिर्फ एक विचारधारात्मक आह्वान है? यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इसका क्या असर होता है। फिलहाल, योगी आदित्यनाथ के इस बयान ने देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। राजनीति के गलियारों में इस बात की चर्चा है कि योगी का यह आह्वान किस दिशा में जाएगा। राजनीति के जानकारों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ का यह बयान 2024 के चुनावों को देखते हुए महत्वपूर्ण है। एक और राजनीति विश्लेषक ने कहा कि इस बयान से बीजेपी को फायदा हो सकता है।
🔍 खबर का विश्लेषण
योगी आदित्यनाथ का यह बयान देश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इसका क्या असर होता है। इस बयान से बीजेपी को फायदा हो सकता है, खासकर 2024 के चुनावों में।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ योगी आदित्यनाथ ने सनातन समाज से एकजुट होने का आह्वान क्यों किया?
योगी आदित्यनाथ का मानना है कि अगर सनातनी एकजुट होंगे तो भारत को नुकसान पहुंचाने की साजिश करने वालों का कोई भी मंसूबा कामयाब नहीं हो पाएगा।
❓ योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या का उदाहरण क्यों दिया?
योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या का उदाहरण इसलिए दिया क्योंकि वहां संतों की एकता से 500 साल का कलंक मिट गया और भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ।
❓ इस बयान का राजनीति पर क्या असर होगा?
इस बयान से देश की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इसका क्या असर होता है, खासकर 2024 के चुनावों में।
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Published: 08 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

