📅 24 जुलाई 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर NEET विवाद में छात्रों से ‘कायरता और क्रूरता’ से पेश आने का आरोप लगाया।
- उन्होंने शिक्षा बजट में कटौती, सरकारी स्कूलों के बंद होने और NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
📋 इस खबर में क्या है
क्या देश का भविष्य माने जाने वाले छात्र वाकई सरकार के दुश्मन हैं? यह सवाल शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला करते हुए उठाया। उन्होंने NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और उसके बाद छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर मोदी सरकार पर ‘कायरता और क्रूरता’ का आरोप लगाया। गांधी ने सरकार से तुरंत पुलिस कार्रवाई रोकने और प्रदर्शनकारी छात्रों से संवाद शुरू करने की अपील की।
छात्रों पर ‘क्रूरता’ और पुलिसिया कार्रवाई
आपको बता दें, दिल्ली में 20 जुलाई 2026 को NEET परीक्षा में कथित धांधली के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस की हिंसक कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। सोनिया गांधी के अनुसार, दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और यहां तक कि पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया, जिसमें कई निर्दोष छात्र घायल हुए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि पैलेट गन के इस्तेमाल को निश्चित रूप से उनकी मंजूरी मिली होगी। कांग्रेस नेता ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है जब इस सरकार के कार्यकाल में ऐसी हिंसा हुई हो; 2020 के CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी पुलिस विश्वविद्यालय परिसरों में घुसी थी, और महिला पहलवानों के साथ भी इसी तरह का दुर्व्यवहार किया गया था।
शिक्षा व्यवस्था का पतन: बजट कटौती और स्कूल बंद
सोनिया गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था में आ रही गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण गिनाए। पहला, सरकारी शिक्षा से सरकार का पीछे हटना। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने अपने कुल बजट में से स्कूल शिक्षा के हिस्से में 50 प्रतिशत और उच्च शिक्षा के हिस्से में 33 प्रतिशत की कटौती की है। पिछले 12 वर्षों में लगभग 1 लाख सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जबकि 43,000 निजी स्कूल खोले गए हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे जुड़े संगठनों द्वारा संचालित होता है। यह जानना ज़रूरी है कि देश के परिवार अकेले NEET कोचिंग पर जितना पैसा खर्च करते हैं, केंद्र सरकार कुल मिलाकर सरकारी शिक्षा पर भी उतना निवेश नहीं करती। यह आंकड़ों का एक गंभीर पहलू है जो शिक्षा क्षेत्र की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।
परीक्षा प्रणाली में सेंध: NTA पर सवाल
शिक्षा संकट का दूसरा बड़ा कारण परीक्षा प्रणाली का ध्वस्त होना है। सोनिया गांधी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि NTA का केंद्रीयकरण और निजीकरण कर दिया गया है। एजेंसी में कर्मचारियों की भारी कमी है और यह निजी ठेकेदारों के भरोसे चल रही है। विशेषज्ञों के नाम पर राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को इसमें शामिल किया गया है, जिससे इसकी निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। इन कमियों का सीधा परिणाम पेपर लीक की घटनाओं में वृद्धि के रूप में सामने आया है।
पिछले 12 वर्षों में देश भर में कुल 152 पेपर लीक हुए हैं, जिनमें से 9 पेपर लीक तो अकेले 2017 में बनी NTA के कार्यकाल में हुए हैं। इन घटनाओं के बावजूद, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसदीय समिति की सिफारिशों को खारिज कर दिया और इतनी बड़ी घटनाओं के बाद भी अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। यह स्थिति छात्रों के भविष्य और देश की शिक्षा प्रणाली के लिए चिंताजनक है।
राजनीतिक निहितार्थ और जवाबदेही
इस पूरे मामले की राजनीति गहन है। सोनिया गांधी के इस बयान ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है, खासकर जब छात्र अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को उठाकर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है। छात्रों की मांगें स्पष्ट हैं: सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी और शिक्षा में सुधार लाना होगा। यह देखना होगा कि सरकार इस गंभीर स्थिति से कैसे निपटती है और क्या वह छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करती है।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह घटनाक्रम सरकार और छात्रों के बीच बढ़ते भरोसे के संकट को उजागर करता है। सोनिया गांधी के बयान से यह मुद्दा अब केवल परीक्षा अनियमितता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकारी नीतियों और पुलिसिया कार्रवाई की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है। सरकार पर छात्रों की चिंताओं को संबोधित करने और शिक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार लाने का दबाव बढ़ गया है। यदि यह गतिरोध जारी रहता है, तो इसका सीधा असर लाखों छात्रों के भविष्य और देश की राजनीति पर पड़ेगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ NEET विवाद क्या है?
NEET विवाद मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं से जुड़ा है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा की शुचिता भंग हुई है, जिसके कारण वे न्याय और दोबारा परीक्षा की मांग कर रहे हैं।
❓ सोनिया गांधी ने सरकार पर क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?
सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर छात्रों के साथ ‘कायरता और क्रूरता’ से पेश आने, पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करने और शिक्षा व्यवस्था में गिरावट लाने का आरोप लगाया है। उन्होंने NTA की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
❓ शिक्षा बजट में क्या बदलाव हुए हैं, जैसा कि सोनिया गांधी ने बताया?
गांधी के अनुसार, मोदी सरकार ने अपने कुल बजट में से स्कूल शिक्षा के हिस्से में 50% और उच्च शिक्षा के हिस्से में 33% की कटौती की है। उन्होंने यह भी बताया कि 1 लाख सरकारी स्कूल बंद हुए हैं।
❓ नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर क्या आरोप हैं?
NTA पर केंद्रीयकरण, निजीकरण, कर्मचारियों की कमी और निजी ठेकेदारों पर अत्यधिक निर्भरता के आरोप हैं। यह भी कहा गया है कि इसमें राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को विशेषज्ञ के तौर पर रखा गया है, जिससे पेपर लीक जैसी घटनाओं में वृद्धि हुई है।
❓ छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?
छात्रों की मुख्य मांगें हैं कि सरकार अपनी जवाबदेही तय करे, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार लाए और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। वे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के माध्यम से न्याय की मांग कर रहे हैं।
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Published: 24 जुलाई 2026 | HeadlinesNow.in

