📅 17 जुलाई 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- आज 17 जुलाई को गुप्त नवरात्रि और विनायकी चतुर्थी का शुभ योग है, जो विशेष फलदायी माना जा रहा है।
- भगवान गणेश के साथ देवी महालक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा से घर-परिवार में सुख-शांति आती है।
- शुक्र ग्रह के दोषों को दूर करने के लिए दूध का दान और शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाना फायदेमंद होता है।
📋 इस खबर में क्या है
उज्जैन, 17 जुलाई 2026: आज का दिन कई मायनों में बेहद खास है। आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि चल रही है, और इसी के साथ आज विनायकी चतुर्थी का शुभ व्रत भी है। ऊपर से शुक्रवार का दिन, इस संयोग ने आज के धार्मिक महत्व को और बढ़ा दिया है। उज्जैन के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा बताते हैं कि इस तरह के दिन घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए बेहद फलदायी होते हैं। कई भक्त तो सालभर की सभी चतुर्थियों पर व्रत रखते हैं, क्योंकि इसी तिथि पर भगवान गणेश प्रकट हुए थे। एक साल में आमतौर पर 24 चतुर्थियां आती हैं, लेकिन जिस साल अधिकमास लगता है, तब यह संख्या 26 तक पहुंच जाती है।
ज्योतिष में शुक्रवार को शुक्र ग्रह का दिन माना जाता है, जो कुंडली में कमजोर हो तो वैवाहिक जीवन में अड़चनें पैदा करता है या सुख-सुविधाओं में कमी लाता है। ऐसे में शुक्र दोषों को शांत करने के लिए हर शुक्रवार को शुक्रदेव की पूजा करने का विधान है। आप शिवलिंग पर ‘ऊँ शुक्राय नम:’ मंत्र का जाप करते हुए जल और दूध चढ़ा सकते हैं। ऊपर से, दूध का दान करना भी इस ग्रह के दोषों को कम करने में काफी मददगार साबित होता है।
गणेश जी की पूजा ऐसे करें
सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनें और घर के मंदिर में गणेश जी की पूजा की तैयारी करें। भगवान गणेश को जल, दूध और पंचामृत चढ़ाएं। — और ये बात अहम है — फिर सिंदूर, दूर्वा, फूल, चावल और मौसमी फल अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर लड्डू या मोदक का भोग लगाएं। ‘श्री गणेशाय नम:’ मंत्र का जाप करते हुए आरती करें और चतुर्थी व्रत का संकल्प लें। पूजा के बाद प्रसाद बांटना न भूलें, और अगर संभव हो तो जरूरतमंदों को धन या अनाज का दान करें। गणेश जी को दूर्वा चढ़ाने का एक खास तरीका है। 22 दूर्वा को एक साथ जोड़कर 11 जोड़े बनाएं और उन्हें भगवान को अर्पित करें। दूर्वा किसी साफ जगह से लें और चढ़ाने से पहले धोना जरूरी है।
महालक्ष्मी और विष्णु जी को भी पूजें
शुक्रवार को देवी महालक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा की भी पुरानी परंपरा है। गणेश पूजा के बाद महालक्ष्मी और विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें जल, दूध और पंचामृत चढ़ाएं, फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं। कुमकुम, चंदन, अबीर, गुलाल, हार-फूल और नए वस्त्र जैसी पूजन सामग्री से भगवान का श्रृंगार करें। महालक्ष्मी को लाल चुनरी और भगवान विष्णु को पीले वस्त्र अर्पित करें। मौसमी फल, तुलसी और मिठाई का भोग लगाएं। ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए धूप-दीप जलाएं और आरती करें। आखिर में अपनी गलतियों के लिए भगवान से क्षमा याचना करें। पूजा के बाद प्रसाद वितरित करें और खुद भी ग्रहण करें।
आज का यह दुर्लभ संयोग भक्तों को अपनी आस्था और श्रद्धा प्रकट करने का एक सुनहरा अवसर दे रहा है। ऐसे धार्मिक दिन न सिर्फ आध्यात्मिक शांति देते हैं बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा भी फैलाते हैं, जिससे हर कोई अपने जीवन में सुख और समृद्धि की कामना करता है।
🔍 खबर का विश्लेषण
इस तरह के धार्मिक संयोग समाज में आस्था और एकजुटता का माहौल बनाते हैं। लोग व्रत-पूजा के बहाने अपने घरों में सकारात्मक ऊर्जा महसूस करते हैं, जिससे मानसिक शांति मिलती है। यह परंपराएं न सिर्फ हमारी संस्कृति को जीवित रखती हैं, बल्कि लोगों को दान-पुण्य और सेवा जैसे नेक कामों के लिए भी प्रेरित करती हैं। ऐसे दिन सामाजिक सद्भाव बढ़ाने और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने में मदद करते हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ आज कौन-कौन से खास योग बन रहे हैं?
आज 17 जुलाई को आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि चल रही है। साथ ही, विनायकी चतुर्थी व्रत भी है। शुक्रवार होने से इन दोनों का महत्व और बढ़ गया है, जिससे यह दिन बहुत शुभ माना जा रहा है।
❓ शुक्र ग्रह दोषों को शांत करने के लिए क्या करें?
शुक्र ग्रह के दोषों को शांत करने के लिए शुक्रवार को शुक्रदेव की पूजा करनी चाहिए। शिवलिंग पर “ऊँ शुक्राय नम:” मंत्र बोलते हुए जल और दूध चढ़ाएं। दूध का दान करना भी बहुत लाभकारी होता है।
❓ गणेश जी को दूर्वा कैसे चढ़ाई जाती है?
गणेश जी को दूर्वा खास तरीके से चढ़ाई जाती है। 22 दूर्वा को एक साथ जोड़कर 11 जोड़े बनाएं। इन 11 जोड़ों को गणेश जी को अर्पित करें। दूर्वा साफ जगह से लें और धोकर चढ़ाएं।
❓ महालक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा क्यों करें?
शुक्रवार का दिन देवी महालक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के लिए भी खास माना जाता है। इस दिन इनकी पूजा से घर में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की वृद्धि होती है, और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
❓ इस दिन दान-पुण्य का क्या महत्व है?
इस शुभ अवसर पर पूजा के बाद जरूरतमंदों को धन, अनाज या दूध का दान करना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। इससे आपकी पूजा सफल होती है और ग्रहों के दोष भी शांत होते हैं, सुख-शांति बनी रहती है।
📰 और पढ़ें:
Top Cricket Updates | Technology Trends | Latest National News
हर अपडेट सबसे पहले पाने के लिए HeadlinesNow.in को बुकमार्क करें।
Published: 17 जुलाई 2026 | HeadlinesNow.in

