📅 15 जुलाई 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- अमरकंटक मंदिर में दान किए गए सोने-चांदी के जेवरात का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड मौजूद नहीं है, जिससे अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
- मंदिर ट्रस्ट और अमरकंटक थाने के टीआई के बयान एक-दूसरे के उलट हैं; ट्रस्ट जेवरात थाने में जमा करने का दावा कर रहा है, पुलिस इससे इनकार कर रही है।
- नर्मदा उद्गम मंदिर ट्रस्ट के पास अपना बायलॉज तक नहीं है, जिससे दान प्रबंधन, जेवरात संरक्षण और जवाबदेही के स्पष्ट नियम नहीं बन पाए।
📋 इस खबर में क्या है
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक का पवित्र मंदिर आजकल गंभीर सवालों के घेरे में है। यहां के मुख्य उद्गम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने और चांदी के जेवरातों के प्रबंधन पर बड़े आरोप लगे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन कीमती चढ़ावों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। यह घटना नर्मदा क्षेत्र के भक्तों और पूरे देश के धर्म प्रेमियों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
मंदिर ट्रस्ट का दावा है कि दान में मिले सोने-चांदी के सभी आभूषण अमरकंटक थाने में जमा कराए जाते हैं, और उनके पास इसकी रसीदें भी हैं। लेकिन, इस दावे पर अमरकंटक थाने के प्रभारी अधिकारी (टीआई) ने सीधा विरोधाभास व्यक्त किया है। टीआई का कहना है कि उनके थाने में मंदिर का कोई चढ़ावा या जेवरात नहीं रखे जाते। यह विरोधाभासी बयान पूरे मामले को और उलझा देता है। आखिर, इतने कीमती जेवरात हैं कहां?
यह पूरा मामला श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, जिसका गठन 2001 में हुआ था। ट्रस्ट पर मंदिर के संचालन, निर्माण, दानपेटियों की राशि और सोने-चांदी के प्रबंधन की जिम्मेदारी है। जानकारी के अनुसार, ट्रस्ट के खाते में लगभग 1.41 करोड़ रुपये जमा हैं, लेकिन 2001 से अब तक दान में मिले सोने-चांदी का पूरा रिकॉर्ड नदारद है। इन दिनों 2021 से व्यवस्था संभाल रहे कर्मचारी गणेश पाठक कहते हैं कि उनके आने के बाद सूची बनाई गई, मगर पुराने रजिस्टरों की प्रविष्टियां साफ नहीं हैं। यही वजह है कि मंदिर में कुल कितने जेवरात हैं, इसका सही विवरण किसी के पास नहीं। राम मंदिर में चोरी की घटना के बाद जरूर नए जेवरातों की फोटो के साथ रिकॉर्डिंग शुरू हुई, पर पुराने चढ़ावों का ब्यौरा आज भी अधूरा है।
बैंक लॉकर की बजाय थाने में क्यों?
अक्सर देखा जाता है कि देश के बड़े मंदिरों के कीमती जेवरात और चढ़ावे बैंक लॉकरों में सुरक्षित रखे जाते हैं। यह एक मानक प्रक्रिया है, मगर अमरकंटक मंदिर में ऐसा नहीं है। यहां के जेवरात बैंक की जगह सीधे थाने में जमा किए जाने का दावा किया जा रहा है। यह व्यवस्था कब और किन नियमों के तहत शुरू हुई, इसकी जानकारी न तो ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और सीएमओ चैन सिंह परस्ते को है और न ही इस बारे में कोई लिखित प्रमाण मिलता है। चैन सिंह परस्ते ने खुद माना कि उनके पास सोने-चांदी के कुल रिकॉर्ड की स्पष्ट जानकारी नहीं। जेवरात कब और किसकी मौजूदगी में थाने भेजे जाते हैं, इस पूरी प्रक्रिया का भी कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
नगर परिषद, जो मंदिर का संचालन करती है, उसके पास ट्रस्ट का बायलॉज (नियम-कानून) भी उपलब्ध नहीं है। यह एक गंभीर चूक है। दान की गिनती, सोने-चांदी के संरक्षण और जवाबदेही से जुड़े नियमों का कोई लिखित दस्तावेज न होने से पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। सीएमओ परस्ते ने इसकी पुष्टि की है कि बायलॉज उनके पास नहीं है और काम पुरानी, बिना दस्तावेजीकरण की व्यवस्था के अनुसार हो रहा है।
दान गिनती में भी अनियमितताएं
दानपेटियों की राशि की गिनती फिलहाल मंदिर परिसर के प्रसाद कक्ष में होती है, जो करीब सात साल पहले बना था। इससे पहले गिनती किसी और जगह होती थी। चौंकाने वाली बात यह है कि वर्षों तक दान की गिनती बिना किसी सीसीटीवी निगरानी के ही होती रही। हाल ही में इस गणना कक्ष में एक सीसीटीवी कैमरा तो लगाया गया, लेकिन निरीक्षण के दौरान वह कैमरा बंद पाया गया। यह बात पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा करती है।
इतना ही नहीं, दानपेटी खोलने और हस्ताक्षर करने वालों में भी अंतर के आरोप हैं। मंदिर के पुजारी दुर्गेश द्विवेदी ने दावा किया है कि दानपेटी खोलने के लिए बुलाए गए कुछ सदस्य गिनती के समय मौजूद नहीं रहते, जबकि बाद में रजिस्टर पर अन्य लोगों के हस्ताक्षर कराए जाते हैं। उनके अनुसार, हस्ताक्षर प्रक्रिया में भी कई अनियमितताएं हैं, कई मामलों में तो फर्जी हस्ताक्षर या बाद में हस्ताक्षर कराए गए। यह पूरी स्थिति मंदिर के धर्म और पवित्रता पर बड़ा दाग लगा सकती है, और श्रद्धालुओं के मन में अनेक प्रश्न खड़े करती है। इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है ताकि सत्य सामने आ सके।
🔍 खबर का विश्लेषण
अमरकंटक मंदिर में सोने-चांदी के चढ़ावे को लेकर चल रहा यह विवाद सिर्फ वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का भी प्रश्न है। ऐसे पवित्र स्थल पर पारदर्शिता की कमी और विरोधाभासी बयानबाजी से भक्तगण ठगा हुआ महसूस कर सकते हैं। सरकार और संबंधित विभागों को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर एक निष्पक्ष और त्वरित जांच करानी चाहिए, ताकि न केवल सत्य सामने आए बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह घटना मंदिरों के प्रबंधन में जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ नर्मदा उद्गम मंदिर में क्या विवाद चल रहा है?
नर्मदा उद्गम मंदिर में दान में मिले सोने-चांदी के जेवरातों के रिकॉर्ड गायब होने और उनके भंडारण को लेकर विवाद चल रहा है। मंदिर ट्रस्ट का दावा है कि जेवरात पुलिस थाने में हैं, जबकि पुलिस इससे इनकार कर रही है।
❓ मंदिर ट्रस्ट पर मुख्य आरोप क्या हैं?
मुख्य आरोप यह है कि 2001 से अब तक दान में मिले सोने-चांदी का कोई पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, जेवरात को बैंक लॉकर के बजाय थाने में रखने और दान गिनती में पारदर्शिता की कमी के आरोप भी हैं।
❓ मंदिर का संचालन कौन करता है और इसमें क्या समस्या है?
मंदिर का संचालन स्थानीय नगर परिषद के माध्यम से होता है, लेकिन श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट के पास अपना बायलॉज (नियम-कानून) ही नहीं है। इस वजह से दान के प्रबंधन, संरक्षण और जवाबदेही के कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं।
❓ दानपेटियों की गिनती में क्या अनियमितताएं सामने आई हैं?
दानपेटियों की गिनती वर्षों तक बिना सीसीटीवी निगरानी के होती रही। हाल ही में लगाया गया सीसीटीवी कैमरा बंद पाया गया। साथ ही, दानपेटी खोलने वाले सदस्यों की अनुपस्थिति में दूसरों के हस्ताक्षर लेने के आरोप भी लगे हैं।
❓ इस विवाद का श्रद्धालुओं पर क्या असर हो सकता है?
पारदर्शिता की कमी और विरोधाभासी बयानों से श्रद्धालुओं का मंदिर प्रबंधन पर से विश्वास डगमगा सकता है। यह उनकी आस्था और दान की पवित्रता पर सवाल उठाता है, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है।
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Published: 15 जुलाई 2026 | HeadlinesNow.in

