📅 25 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- मुजतबा खामेनेई एक हमले में घायल हो गए हैं, जिससे उनके चेहरे और पैर को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
- उनकी जगह अब सेना के जनरल देश के अहम फैसले ले रहे हैं, जिससे सत्ता का समीकरण बदल गया है।
- सुरक्षा कारणों से मुजतबा तक संदेश पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है, जिसके चलते फैसले लेने में दिक्कतें आ रही हैं।
📋 इस खबर में क्या है
क्या ईरान में सत्ता का समीकरण बदल रहा है? क्या पर्दे के पीछे कोई और ही खेल चल रहा है? दरअसल, खबरों के मुताबिक, मुजतबा खामेनेई, जो कभी ईरान के सुप्रीम लीडर के तौर पर जाने जाते थे, अब गंभीर रूप से घायल हैं और उनके फैसलों पर सेना का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि पहले सारे बड़े फैसले मुजतबा ही लेते थे।
मुजतबा खामेनेई को क्या हुआ?
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान में एक ठिकाने पर हमला किया था। इस हमले में मुजतबा खामेनेई के पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी पत्नी और बेटे की मौत हो गई थी। मुजतबा खुद भी बुरी तरह घायल हो गए थे। उनकी हालत इतनी गंभीर है कि डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी देखभाल कर रही है। उनसे मिलना भी आसान नहीं है। यहां तक कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, जो पेशे से हार्ट सर्जन हैं, वो भी उनकी इलाज करने वाली टीम में शामिल हैं।
सुरक्षा कारणों से बड़े अधिकारी और सेना के कमांडर भी उनसे मिलने से डरते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इजराइल उनके जरिए ठिकाने का पता लगा सकता है। मुजतबा का एक पैर बुरी तरह से जख्मी हो गया है, जिसकी तीन बार सर्जरी हो चुकी है। अब उन्हें नकली पैर लगाने की नौबत आ गई है। उनका एक हाथ भी जख्मी है, जिसकी सर्जरी हुई है और वो धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। लेकिन सबसे बुरी बात यह है कि उनके चेहरे और होंठ बुरी तरह जल गए हैं, जिसकी वजह से उन्हें बोलने में दिक्कत हो रही है और प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत पड़ेगी।
सेना के हाथ में सत्ता?
अयातुल्ला अली खामेनेई जब ईरान के सुप्रीम लीडर थे, तब युद्ध, शांति और अमेरिका से बातचीत जैसे बड़े फैसले वही लेते थे। उनके पास पूरी ताकत थी। लेकिन उनके बेटे मुजतबा का रोल अब वैसा नहीं है। मार्च में पद संभालने के बाद से उन्हें किसी ने देखा नहीं है और उनकी आवाज भी सार्वजनिक रूप से नहीं सुनी गई है।
उनकी जगह अब ईरान की सेना, खासकर इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बड़े कमांडर और उनसे जुड़े लोग देश के अहम फैसले ले रहे हैं। सुरक्षा, युद्ध और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर अब उन्हीं का सबसे ज्यादा प्रभाव है। एक पूर्व सलाहकार अब्दुल रजा दावरी के मुताबिक, मुजतबा देश को ऐसे चला रहे हैं, जैसे कोई कंपनी का डायरेक्टर चलाता है, लेकिन असली फैसले ‘बोर्ड’ यानी सेना के जनरल मिलकर लेते हैं। मुजतबा उनके सुझावों पर काफी निर्भर हैं और फैसले सामूहिक रूप से होते हैं।
आगे क्या होगा?
मुजतबा ने अब तक कोई वीडियो या ऑडियो मैसेज नहीं दिया है, क्योंकि वो कमजोर नहीं दिखना चाहते। उनकी तरफ से सिर्फ लिखित बयान जारी किए जाते हैं, जो ऑनलाइन डाले जाते हैं या टीवी पर पढ़े जाते हैं। उन तक संदेश पहुंचाने का तरीका भी बहुत अलग है। कागज पर लिखे संदेश लिफाफे में बंद करके एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाए जाते हैं, जो कार या बाइक से उनके छिपे ठिकाने तक जाते हैं। उनके जवाब भी इसी तरह वापस आते हैं।
उनकी सुरक्षा, चोटें और उनसे संपर्क की कठिनाई की वजह से फिलहाल फैसले लेने की जिम्मेदारी सेना के जनरलों को दे दी गई है। पर देश में अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं अभी भी मौजूद हैं, लेकिन असली ताकत अब सेना के पास है। यह बदलाव ईरान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है, क्योंकि ईरान में किसी भी तरह का बदलाव पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस खबर पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। ईरान के भविष्य पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान में सत्ता का यह बदलाव एक नई दिशा की ओर इशारा कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
क्या यह सिस्टम में बदलाव है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि इस युद्ध और ईरान के कई बड़े नेताओं की मौत के बाद ‘सिस्टम बदल गया है’ और नए नेता ज्यादा समझदार हैं। लेकिन हकीकत यह है कि ईरान की सरकार खत्म नहीं हुई है, बल्कि अब ताकत एक मजबूत सेना के हाथ में चली गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान की सेना किस तरह देश को चलाती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है।
🔍 खबर का विश्लेषण
ईरान में सत्ता का यह बदलाव एक महत्वपूर्ण मोड़ है। सेना के हाथ में ताकत आने से देश की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं। यह देखना होगा कि सेना किस तरह देश को चलाती है और क्या इससे क्षेत्र में स्थिरता आएगी या नहीं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ मुजतबा खामेनेई की हालत कैसी है?
मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं। उनके चेहरे और पैर में गंभीर चोटें आई हैं, जिसके कारण उन्हें प्लास्टिक सर्जरी और नकली पैर की जरूरत पड़ सकती है।
❓ अब ईरान में फैसले कौन ले रहा है?
फिलहाल, ईरान में फैसले लेने की जिम्मेदारी सेना के जनरलों को दे दी गई है। वे सुरक्षा, युद्ध और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर अहम फैसले ले रहे हैं।
❓ क्या इस बदलाव से अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर कोई असर पड़ेगा?
हां, ईरान में सत्ता के इस बदलाव से अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर असर पड़ सकता है। यह देखना होगा कि सेना किस तरह दूसरे देशों के साथ संबंध बनाती है और क्या इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ेगा या कम होगा।
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Published: 25 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

