📅 25 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- ईरान युद्ध में अमेरिका ने चीन के लिए रिजर्व मिसाइलें भी खर्च कर दीं, जिससे हथियारों का भंडार तेजी से घट रहा है।
- व्हाइट हाउस ने हथियारों की कमी के दावों को खारिज किया, लेकिन एशिया और यूरोप से सैन्य संसाधन मिडिल ईस्ट भेजने पड़े।
📋 इस खबर में क्या है
अमेरिका ने ईरान के साथ हुए हालिया युद्ध में भारी मात्रा में मिसाइलें खर्च कर दीं, जिससे उसके हथियारों का भंडार तेजी से घट गया है। स्थिति यह है कि चीन जैसे देशों के साथ संभावित युद्ध के लिए रिजर्व रखी गई मिसाइलें भी इस्तेमाल हो गईं। इस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
मिसाइलों की बरसात, खजाना खाली!
38 दिनों तक चले इस युद्ध में अमेरिका ने लगभग 1100 लंबी दूरी की स्टील्थ मिसाइलें (JASSM-ER) दागीं, जो विशेष रूप से चीन के खिलाफ इस्तेमाल के लिए थीं। इसके अतिरिक्त, 1000 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें, 1200 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें और 1000 से ज्यादा अन्य स्ट्राइक मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया गया। सीधा गणित है, इतना मार करोगे तो असर तो होगा ही!
इस पूरे युद्ध पर 28 से 35 अरब डॉलर (लगभग 90 अरब रुपए प्रतिदिन) खर्च हुए। युद्ध को रुके हुए दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन अमेरिका ने अभी तक इस्तेमाल किए गए हथियारों की कुल संख्या का खुलासा नहीं किया है। पेंटागन के अनुसार, 13,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले किए गए, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि एक ही लक्ष्य पर कई बार हमला किया गया। आप सोच रहे होंगे, क्या अमेरिका के पास हथियार खत्म हो गए? जवाब थोड़ा जटिल है।
सबसे ज्यादा इस्तेमाल JASSM-ER मिसाइलों का हुआ, जो 600 मील से अधिक दूरी तक मार कर सकती हैं और दुश्मन की वायु रक्षा से बचकर हमला करने में सक्षम हैं। टॉमहॉक मिसाइलों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इस युद्ध में एक साल में खरीदी जाने वाली मिसाइलों से लगभग 10 गुना ज्यादा मिसाइलें दाग दीं। अब उसके पास लगभग 3000 टॉमहॉक मिसाइलें ही बची हैं। पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें भी तेजी से खत्म हुईं, जिनकी एक मिसाइल की कीमत लगभग 4 मिलियन डॉलर है।
व्हाइट हाउस का इनकार, सवाल बरकरार
मगर व्हाइट हाउस ने हथियारों के खत्म होने के दावों को खारिज किया है। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है और उसके पास पर्याप्त हथियार हैं। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने भी किसी विशेष क्षेत्र या हथियारों के स्टॉक के बारे में जानकारी देने से इनकार कर दिया और इसे सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया। लेकिन सवाल यह है कि अगर सब कुछ ठीक है, तो इतनी गोपनीयता क्यों?
हथियारों की कमी के कारण अमेरिका को एशिया और यूरोप से भी अपने सैन्य संसाधन मिडिल ईस्ट भेजने पड़े। इसका असर वहां तैनात सेना की तैयारियों पर पड़ा है। यूरोप में नाटो की पूर्वी सीमा की सुरक्षा से जुड़े कुछ हथियार कम हो गए हैं, वहीं एशिया में भी इसका असर देखा गया है। साउथ चाइना सी से यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर ग्रुप को हटाकर मिडिल ईस्ट भेजा गया। दक्षिण कोरिया में तैनात THAAD मिसाइल सिस्टम के इंटरसेप्टर भी पहली बार वहां से हटाए गए। यह सिस्टम उत्तर कोरिया के खतरे से निपटने के लिए लगाया गया था। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से यह एक गंभीर चिंता का विषय है।
सीधी बात है, अमेरिका को अपनी सैन्य रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हथियारों की होड़ और बढ़ेगी। छोटे देश भी अपनी सुरक्षा को लेकर और सतर्क हो जाएंगे। देखना होगा कि बाइडेन प्रशासन इस चुनौती का कैसे सामना करता है। यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक सबक है कि हथियारों पर निर्भरता कम की जाए और शांतिपूर्ण समाधानों की तलाश की जाए। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव कम करने की दिशा में काम करना होगा, तभी जाकर दुनिया सुरक्षित रह पाएगी।
🔍 खबर का विश्लेषण
अमेरिका का मिसाइल भंडार खाली होना एक गंभीर चिंता का विषय है। इससे न केवल अमेरिका की सैन्य क्षमता पर सवाल उठते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति संतुलन भी बिगड़ सकता है। अन्य देशों को अपनी सुरक्षा नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता होगी। यह घटनाक्रम हथियारों की होड़ को और बढ़ावा दे सकता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ ईरान युद्ध में अमेरिका ने कितनी मिसाइलें खर्च कीं?
अमेरिका ने लगभग 1100 लंबी दूरी की स्टील्थ मिसाइलें, 1000 से ज्यादा टॉमहॉक मिसाइलें, 1200 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें और 1000 से ज्यादा अन्य स्ट्राइक मिसाइलें दागीं।
❓ इस युद्ध में अमेरिका का कितना खर्च हुआ?
इस पूरे युद्ध पर 28 से 35 अरब डॉलर खर्च हुए, यानी हर दिन लगभग 90 अरब रुपए खर्च हुए।
❓ क्या अमेरिका के पास हथियारों की कमी हो गई है?
व्हाइट हाउस ने हथियारों की कमी के दावों को खारिज किया है, लेकिन एशिया और यूरोप से सैन्य संसाधन मिडिल ईस्ट भेजे गए हैं, जिससे कमी की आशंका बनी हुई है।
❓ अमेरिका ने चीन के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली कौन सी मिसाइलें खर्च कीं?
अमेरिका ने लगभग 1100 लंबी दूरी की स्टील्थ मिसाइलें (JASSM-ER) दागीं, जो विशेष रूप से चीन के खिलाफ इस्तेमाल के लिए थीं।
❓ इस घटनाक्रम का अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस घटनाक्रम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है और हथियारों की होड़ को बढ़ावा मिल सकता है। अन्य देशों को अपनी सुरक्षा नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता होगी।
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Published: 25 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

