📅 18 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- नेपाल में 2006 के बाद सार्वजनिक पद पर रहे लोगों की संपत्ति की जांच होगी।
- जांच के दायरे में 7 पूर्व प्रधानमंत्री, 3 राष्ट्रपति और पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह भी शामिल हैं।
- यह जांच बालेन शाह सरकार के अपने राजनीतिक दायरे तक भी जा सकती है।
📋 इस खबर में क्या है
क्या नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ वाकई एक बड़ा बदलाव आने वाला है? प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ सकता है। सरकार ने 2006 से 2025-26 तक सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों की संपत्ति की जांच के लिए 5 सदस्यों का एक न्यायिक पैनल गठित किया है। यह जांच सिर्फ कुछ लोगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूर्व प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और कई बड़े अधिकारी भी शामिल हैं।
कौन-कौन है जांच के दायरे में?
सबसे बड़ी बात यह है कि इस जांच के दायरे में 2006 के बाद के सभी सात प्रधानमंत्री शामिल हैं। इनमें सुशील कोईराला, पुष्प कमल दहल, माधव कुमार नेपाल, झलनाथ खनाल, बाबूराम भट्टराई, केपी शर्मा ओली और शेर बहादुर देउबा जैसे बड़े नाम हैं। साथ ही, दो अंतरिम सरकारों के प्रमुख खिलराज रेग्मी और सुशीला कार्की भी जांच के दायरे में आएंगे। — सोचने वाली बात है — हैरानी की बात यह है कि पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह भी इस जांच से नहीं बच पाएंगे।
सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि तीन राष्ट्रपति- राम बरन यादव, विद्या देवी भंडारी और मौजूदा राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल भी जांच के घेरे में हैं। देखा जाए तो यह जांच नेपाल के लगभग पूरे राजनीतिक नेतृत्व को कवर करेगी। लेकिन, यह जांच सिर्फ बड़े नेताओं तक ही सीमित नहीं है। इसमें मंत्री, संवैधानिक पदों पर बैठे 100 से ज्यादा लोग और वरिष्ठ नौकरशाह भी शामिल हैं। यहां तक कि मृत नेताओं की संपत्ति की भी जांच की जाएगी, जिससे उनके परिवार और राजनीतिक वारिसों पर भी असर पड़ सकता है।
यह जांच क्यों महत्वपूर्ण है?
नेपाल में 2006 के जन आंदोलन के बाद लोकतांत्रिक व्यवस्था शुरू हुई। इसके बाद से लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन उनकी जांच अक्सर सीमित दायरे में होती थी। इस बार, सत्ता, विपक्ष, पूर्व राजा और मौजूदा सिस्टम सब एक साथ शामिल हैं। नेपाल में गठबंधन सरकारों के कारण किसी के पास इतना मजबूत जनादेश नहीं था कि वह बड़े स्तर पर जांच शुरू कर सके। इस बार बालेन शाह के पास प्रचंड बहुमत है, जिससे वे यह कदम उठा पाए हैं।
इस 5 सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज राजेंद्र कुमार भंडारी कर रहे हैं। यह पैनल 5 मार्च के चुनाव के कुछ हफ्तों बाद बनाया गया है, जिसमें शाह की पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की थी। यह जीत पिछले साल हुए युवाओं के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद मिली थी। सरकार का कहना है कि जांच पूरी तरह सबूतों और कानून के आधार पर निष्पक्ष तरीके से होगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी इस पर नज़र रहेगी।
आगे क्या होगा?
माना जा रहा है कि इस फैसले से नेपाल की राजनीति में हलचल बढ़ेगी और आने वाले समय में बड़े खुलासे हो सकते हैं। बालेन शाह ने सत्ता में आने से पहले जनता से वादा किया था कि वे नेपाल से भ्रष्टाचार मिटाएंगे। 27 मार्च को कैबिनेट ने 15 दिनों के अंदर एक ऐसा तंत्र बनाने का फैसला किया था, जिसे अब पूरा कर लिया गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
जहां तक बात है नेपाल के बड़े भ्रष्टाचार मामलों की, तो भूटानी शरणार्थी घोटाला (2023) एक बड़ा उदाहरण है। इस मामले में कुछ नेताओं, अधिकारियों और बिचौलियों पर नेपाल के आम नागरिकों को फर्जी तरीके से भूटानी शरणार्थी बनाने का आरोप है। देखना यह है कि यह नई जांच क्या नतीजे लेकर आती है और क्या यह नेपाल में भ्रष्टाचार को कम करने में सफल हो पाती है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर नेपाल की छवि भी इस जांच से प्रभावित होगी।
जांच का दायरा
सबसे बड़ी बात यह है कि यह जांच शाह सरकार के अपने राजनीतिक दायरे तक भी जा सकती है। मौजूदा स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल, मंत्री बिराजभक्त श्रेष्ठ और शिशिर खानाल, और अपनी ही पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख रवि लामिछाने भी जांच के दायरे में आ सकते हैं, क्योंकि वे पहले भी सार्वजनिक पदों पर रह चुके हैं। इस जांच में गिरिजा प्रसाद कोईराला और सुषिल कोईराला जैसे नेताओं के परिवार भी शामिल हो सकते हैं, जो अब जीवित नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह जांच नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। अगर यह जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होती है, तो इससे देश में भ्रष्टाचार कम हो सकता है और जनता का विश्वास सरकार पर बढ़ सकता है। हालांकि, यह देखना होगा कि क्या यह जांच राजनीतिक रूप से प्रेरित है या वास्तव में भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए है। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ यह जांच कब से कब तक के कार्यकाल को कवर करेगी?
यह जांच 2006 से 2025-26 तक सार्वजनिक पदों पर रहे लोगों के कार्यकाल को कवर करेगी।
❓ जांच आयोग की अध्यक्षता कौन कर रहा है?
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज राजेंद्र कुमार भंडारी इस 5 सदस्यीय जांच आयोग की अध्यक्षता कर रहे हैं।
❓ क्या इस जांच में मृत नेताओं के परिवार भी शामिल होंगे?
हां, इस जांच में मृत नेताओं की संपत्ति की भी जांच की जाएगी, जिससे उनके परिवार और राजनीतिक वारिसों पर भी असर पड़ सकता है।
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Published: 18 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

