📅 02 मई 2026 | HeadlinesNow Desk

🔑 मुख्य बातें
- RBI गवर्नर ने कहा, वैश्विक तनावों के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है।
- उन्होंने वित्तीय बाजारों को मजबूत करने और सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने की बात कही।
📋 इस खबर में क्या है
वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय एक नाजुक दौर से गुजर रही है, ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा का बयान काफी मायने रखता है। एम्स्टर्डम में फिक्स्ड इनकम मनी मार्केट एंड डेरिवेटिव्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफआईएमएमडीए) और प्राइमरी डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (पीडीएआई) की 25वीं वार्षिक बैठक में उन्होंने वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार युद्धों के कारण दुनिया भर में अनिश्चितता का माहौल है, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है।
वैश्विक चुनौतियों का भारत पर असर
मल्होत्रा ने साफ तौर पर कहा कि वैश्विक व्यवस्था कई तरह के शुल्क, व्यापार प्रतिबंधों और अलग-अलग औद्योगिक नीतियों के कारण विभाजित हो रही है। — और ये बात अहम है — इससे न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि पूंजी का प्रवाह भी बाधित हो रहा है, जिससे वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियां और भी ज्यादा प्रभावित हो रही हैं। अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो निश्चित तौर पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
लेकिन, इन चुनौतियों के बीच, आरबीआई गवर्नर ने भारत की आर्थिक ताकत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि घरेलू मांग में मजबूती, उपभोग और सार्वजनिक निवेश के कारण अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय पर ध्यान केंद्रित करने से निजी निवेश को बढ़ावा मिला है और उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ है। आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2021-25 के दौरान भारत की औसत आर्थिक वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत रही है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 7.6 प्रतिशत और 2026-27 में 6.9 प्रतिशत रहेगी।
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत बुनियाद
मल्होत्रा ने यह भी बताया कि भारतीय कंपनियों के बहीखातों में सुधार हुआ है और उनकी वित्तीय स्थिति भी बेहतर हुई है। पिछले दो सालों में भारतीय कंपनियों ने पूंजी बाजारों के माध्यम से धन जुटाने में भी सफलता हासिल की है। भारतीय वित्तीय बाजार पिछले कुछ सालों में काफी परिपक्व हुए हैं, जिसका श्रेय नीतिगत सुधारों और सोच-समझकर लिए गए निर्णयों को जाता है। उद्योग जगत में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।
मगर उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वित्तीय बाजारों को और मजबूत बनाने के लिए अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। आरबीआई गवर्नर ने कहा, “हम वित्तीय बाजारों को सुदृढ़ बनाने, भागीदारी बढ़ाने और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे। हम दक्षता, उपभोक्ता संरक्षण, निष्पक्षता, पारदर्शिता और नैतिक आचरण को बढ़ावा देते रहेंगे।”
आगे की राह
आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक जरूरत पड़ने पर बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए उचित नीतिगत कदम उठाने के लिए तैयार है। वित्तीय स्थिरता को मजबूत करना सभी हितधारकों की साझा जिम्मेदारी है। ट्रेड रिपॉजिटरी जैसी संस्थाओं को आंकड़ों की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार करना होगा ताकि जोखिम का आकलन और नीतिगत निर्णय अधिक प्रभावी हो सकें। वही दूसरी तरफ, वैश्विक स्थिति पर उन्होंने कहा कि कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उच्च सार्वजनिक ऋण चिंता का विषय बना हुआ है। महामारी के बाद अपेक्षित राजकोषीय संतुलन की ओर वापसी कठिन हो गई है, क्योंकि सरकारें अभी भी खर्च बढ़ा रही हैं। उद्योग और अर्थव्यवस्था के जानकारों का मानना है कि आरबीआई का यह बयान निवेशकों और आम जनता के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
मल्होत्रा ने यह भी कहा कि वैश्विक दबावों के कारण रक्षा खर्च में वृद्धि हो रही है। ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इन चुनौतियों का सामना कैसे करता है और अपनी आर्थिक वृद्धि को कैसे बनाए रखता है। मेरा मानना है कि आरबीआई की नीतियों और सरकार के प्रयासों से भारत इस मुश्किल दौर से सफलतापूर्वक निकल जाएगा। उद्योग जगत को भी सरकार और आरबीआई पर भरोसा रखना चाहिए। उद्योग से जुड़े लोगों को अब भविष्य की तरफ देखना चाहिए।
🔍 खबर का विश्लेषण
RBI गवर्नर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने भारत की आर्थिक ताकत पर जोर दिया है, लेकिन साथ ही वित्तीय बाजारों को और मजबूत बनाने की जरूरत पर भी बल दिया है। यह स्पष्ट है कि RBI आने वाले समय में बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ RBI गवर्नर ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता और चुनौतियों के दौर से गुजर रही है, जिसका असर वित्तीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।
❓ भारत की आर्थिक स्थिति कैसी है?
RBI गवर्नर ने कहा कि घरेलू मांग में मजबूती और सार्वजनिक निवेश के कारण भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
❓ RBI वित्तीय बाजारों को मजबूत करने के लिए क्या करेगा?
RBI वित्तीय बाजारों को सुदृढ़ बनाने, भागीदारी बढ़ाने और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए काम करता रहेगा।
📰 और पढ़ें:
देश-दुनिया की हर बड़ी खबर के लिए HeadlinesNow.in पर बने रहें।
Published: 02 मई 2026 | HeadlinesNow.in

