📅 05 अगस्त 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- 34 साल की कामकाजी महिला अपने दोस्तों से मिलना चाहती हैं, पर पति को ये बात रास नहीं आती।
- क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जया सुकुल के अनुसार, शादी में पर्सनल स्पेस और आज़ादी भी ज़रूरी है।
- पति की सोच बदलने के लिए ‘मैं’ वाले वाक्यों का इस्तेमाल कर के शांत बातचीत करना असरदार होता है।
📋 इस खबर में क्या है
दिल्ली की अंजलि (नाम बदला हुआ) आजकल थोड़ी परेशान हैं। शादी को छह साल हो गए हैं, वैसे तो सब ठीक है, पर एक बात है जो उनके मन में कांटे सी चुभती है। अंजलि, जो कि 34 साल की कामकाजी महिला हैं, अपने स्कूल-कॉलेज के दोस्तों से मिलना चाहती हैं। लेकिन उनके पति को यह बात बिल्कुल रास नहीं आती। उनका सीधा-सा फंडा है, शादी के बाद पति-पत्नी के दोस्त, शौक और सोशल लाइफ सब एक जैसी होनी चाहिए। अब ये बात अंजलि को समझ नहीं आती, कि भला क्यों सिर्फ पति के साथ ही रहना ज़रूरी है, क्यों उनकी अपनी एक अलग दुनिया नहीं हो सकती?
अंजलि की ये उलझन सिर्फ उनकी अकेले की नहीं है। ऐसे कई रिश्ते हैं जहां ‘साथ रहने’ की परिभाषा इतनी बदल जाती है कि एक पार्टनर को घुटन महसूस होने लगती है। यह वाकई एक बड़ी बहस का मुद्दा है। इस मामले में नोएडा की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जया सुकुल ने कुछ अहम बातें बताई हैं, जो हर उस जोड़े के लिए काम की हैं, जो ऐसे ही किसी मोड़ पर खड़े हैं।
क्या है पूरा मामला? शादी में पर्सनल स्पेस क्यों जरूरी?
अंजलि बताती हैं कि उनके पति चाहते हैं कि वो अपना सारा खाली समय साथ बिताएं। उनके हिसाब से शादी का मतलब ही यही है कि पति-पत्नी की दुनिया एक हो जाए। अब अंजलि को लगता है कि उनकी अपनी पहचान, उनकी अपनी दोस्तियां और उनकी अपनी पसंद-नापसंद शादी के बाद खत्म क्यों हो जानी चाहिए? यह सवाल कहीं न कहीं हर उस इंसान के मन में उठता है, जिसे रिश्ते में अपनी आज़ादी पर आंच आती महसूस होती है।
डॉ. जया सुकुल साफ कहती हैं कि अंजलि की यह इच्छा बिल्कुल गलत नहीं है। शादी का मतलब यह नहीं होता कि आपकी अपनी पहचान, दोस्तियां और पसंद-नापसंद सब खत्म हो जाएं। जिस तरह पति आपके जीवन का ज़रूरी हिस्सा हैं, वैसे ही आपकी अपनी दुनिया भी आपके मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व के लिए उतनी ही अहम है। एक्सपर्ट के मुताबिक, शादी के बाद पति-पत्नी की सोशल लाइफ एक ही हो, ये ज़रूरी नहीं है। एक स्वस्थ रिश्ते में साथ और आज़ादी, दोनों का संतुलन होना चाहिए। अगर सिर्फ साथ-साथ रहें और पर्सनल स्पेस न हो, तो घुटन महसूस होने लगती है। वहीं, अगर सिर्फ आज़ादी हो और जुड़ाव न हो, तो दूरियां बढ़ जाती हैं।
क्यों होती है ऐसी सोच? पति का डर और उसका इलाज
लेकिन सवाल है, आखिर पति ऐसी सोच रखते क्यों हैं? हर व्यवहार के पीछे कोई न कोई भावनात्मक ज़रूरत होती है। कई बार ऐसा नहीं होता कि पार्टनर जानबूझकर आपको कंट्रोल करना चाहता हो। हो सकता है, उनके मन में कोई असुरक्षा हो, या उन्हें लगता हो कि अगर आप अकेले दोस्तों के साथ समय बिताएंगी, तो उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। ये डर कई बार रिश्ते में बेवजह की तकरार पैदा कर देता है।
एक्सपर्ट बताती हैं कि ऐसे में CBT (Cognitive Behavioral Therapy) का एक आसान मॉडल, ABC मॉडल, काम आ सकता है। इसे ऐसे समझिए: A- Activating Event (घटना) जब आप दोस्तों से मिलने की बात करती हैं। B- Belief (विश्वास) पति सोचते हैं कि आप उन्हें पसंद नहीं करतीं। C- Consequence (परिणाम) वे नाराज़ हो जाते हैं या बहस शुरू हो जाती है। अब आपको उनके इस विश्वास को ही चुनौती देनी है। उन्हें समझाना होगा कि दोस्तों के साथ समय बिताना, उनसे दूर होना नहीं है।
आगे क्या? रिश्ते में संतुलन बनाने का मंत्र
अब बात आती है कि उनके मन में बैठे इन विचारों को कैसे बदला जाए। इसके लिए बातचीत बेहद ज़रूरी है। लेकिन बातचीत आरोप-प्रत्यारोप वाली नहीं होनी चाहिए।
🔍 खबर का विश्लेषण
आज के दौर में जब महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, ऐसे में रिश्ते में पर्सनल स्पेस की ज़रूरत बढ़ जाती है। यह खबर दिखाती है कि कैसे पारंपरिक सोच और आधुनिक जीवनशैली के बीच तालमेल बिठाना ज़रूरी है। इस तरह के मुद्दों पर जागरूकता और सही बातचीत से न सिर्फ रिश्ते मज़बूत होते हैं बल्कि दोनों पार्टनर का मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। समाज को यह समझना होगा कि व्यक्तिगत आज़ादी, रिश्ते की नींव को कमज़ोर नहीं करती, बल्कि उसे और समृद्ध बनाती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ क्या शादी के बाद पति-पत्नी के दोस्त एक ही होने चाहिए?
नहीं, ऐसा बिल्कुल ज़रूरी नहीं है। शादी का मतलब ये नहीं कि आपकी अपनी पहचान और दोस्तियां खत्म हो जाएं। अपनी अलग सोशल लाइफ रखना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।
❓ अगर पति को मेरे दोस्तों से मिलना पसंद न आए तो क्या करूं?
सबसे पहले शांति से उनसे बात करें। उन्हें अपनी ज़रूरत समझाएं कि दोस्तों से मिलकर आपको कैसा महसूस होता है। उन्हें विश्वास दिलाएं कि आपकी दोस्तियां आपके रिश्ते को कमज़ोर नहीं करतीं।
❓ पार्टनर ऐसा व्यवहार क्यों कर सकता है?
कई बार पार्टनर आपको कंट्रोल करना नहीं चाहता, बल्कि उसके मन में असुरक्षा या अकेलापन महसूस होने का डर हो सकता है। ऐसे में उनकी भावनात्मक ज़रूरतों को समझना ज़रूरी है।
❓ बातचीत की शुरुआत कैसे करें ताकि लड़ाई न हो?
आरोप लगाने के बजाय ‘मैं’ वाले वाक्यों का इस्तेमाल करें, जैसे ‘मुझे अपने दोस्तों से मिलकर अच्छा लगता है।’ इससे सामने वाला डिफेंसिव नहीं होता और बात आगे बढ़ती है।
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Published: 05 अगस्त 2026 | HeadlinesNow.in

