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टचवुड क्यों कहते हैं? क्या है मतलब और कहां से आई ये परंपरा?

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राष्ट्रीय
📅 14 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
टचवुड क्यों कहते हैं? क्या है मतलब और कहां से आई ये परंपरा? - HeadlinesNow Hindi News

🔑 मुख्य बातें

  • टचवुड एक पुरानी परंपरा है, जिसका मतलब है बुरी नजर से बचना।
  • ये परंपरा 19वीं सदी में ब्रिटेन में बच्चों के एक खेल से शुरू हुई।
  • आजकल के दौर में टचवुड कहना एक मजाक की तरह है, पर कुछ लोग इसे मानते हैं।

भोपाल, मंगलवार, 14 अप्रैल 2026। आपने भी कभी न कभी ‘टचवुड’ तो जरूर कहा होगा। अक्‍सर जब कोई अच्‍छी बात होती है, या हम किसी मनोकामना के बारे में बात करते हैं, तो चाहते हैं कि उसे नजर न लगे। ऐसे में ‘टचवुड’ कहकर किसी लकड़ी की चीज को छू लेते हैं। पर क्‍या कभी सोचा है कि हम ऐसा क्‍यों करते हैं? टचवुड ही क्‍यों कहते हैं? इसका मतलब क्‍या होता है और ये परंपरा कहां से शुरू हुई? चलिए, आज इसी बारे में बात करते हैं।

टचवुड कहने के पीछे क्‍या है कहानी?

सबसे पहली बात तो ये है कि दुनिया के किसी भी धर्म में टचवुड बोलने या लकड़ी छूने के बारे में कोई सीधी जानकारी नहीं मिलती। कोई ऐसी कहानी या किवदंती भी नहीं है, जो ये बताए कि टचवुड बोलने या लकड़ी छूने से कोई मनोकामना पूरी हो गई, या किसी को नजर नहीं लगी। फिर भी, पूरी दुनिया में लोग इसका इस्‍तेमाल करते हैं।

दरअसल, एक मान्यता है कि लकड़ी को छूने से भगवान ये मानते हैं कि आप ‘होली क्रॉस’ को छू रहे हैं। ऐसे में भगवान आपकी मनोकामना पूरी करते हैं और आपकी रक्षा करते हैं। कुछ लोग ये भी मानते हैं कि पुराने समय में पेड़-पौधों में भगवान का वास होता था, तो लकड़ी छूने से उनका आशीर्वाद मिलता है।

कहां से शुरू हुई टचवुड की परंपरा?

जैसा कि हमने ऊपर बताया कि किसी भी धर्म में इसका जिक्र नहीं है और न ही किसी धर्मगुरु ने इस परंपरा को शुरू किया। ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी में 19वीं सदी से पहले ये शब्द मिलता ही नहीं था। थोड़ी खोजबीन करने पर पता चला कि 19वीं सदी में ब्रिटेन के बच्चे एक खेल खेलते थे, जिसका नाम था ‘टिग्गी-टच-वुड’। हमारे यहां भी ऐसा ही एक खेल खेला जाता है, जिसे मध्‍य भारत में ‘लकड़ी पकड़’ या ‘लोहा पकड़’ कहते हैं।

इस खेल में जो खिलाड़ी लकड़ी को छू लेता है, वो सुरक्षित हो जाता है और आउट नहीं होता। बच्चे अलग-अलग लकड़ियों को छूते हुए अपने टारगेट की ओर बढ़ते हैं। वे तभी आउट होते हैं, जब उनका विरोधी उन्‍हें उस वक्‍त छू ले, जब उन्‍होंने किसी लकड़ी को न छुआ हो। माना जाता है कि इसी खेल से टचवुड की परंपरा शुरू हुई। धीरे-धीरे ये खेल लोगों की जिंदगी में इस कदर घुल गया कि आज हर कोई अच्छी खबर सुनकर या सुनाकर टचवुड कहता है।

टचवुड का मतलब क्‍या होता है?

टचवुड का सीधा सा मतलब होता है ‘नजर न लगे’। जब हम कोई अच्छी बात बताते हैं, तो हमें डर लगता है कि कहीं उसे बुरी नजर न लग जाए। बस इसी वजह से हम टचवुड कहकर उस बात को सुरक्षित करने की कोशिश करते हैं। ये एक तरह का अंधविश्वास ही है, लेकिन लोगों को इसमें सुकून मिलता है।

आजकल के दौर में टचवुड कितना सही?

देखना ये है कि टचवुड कहने में कोई बुराई नहीं है। ये सिर्फ एक तरीका है अपनी खुशी को जाहिर करने का और बुरी नजर से बचाने का। लेकिन, हमें ये भी याद रखना चाहिए कि सिर्फ टचवुड कहने से कुछ नहीं होता। हमें मेहनत भी करनी पड़ती है और खुद पर भरोसा रखना होता है। ज्‍यादातर लोग इसे एक मजाक के तौर पर लेते हैं। लेकिन कुछ लोग आज भी इसे बहुत मानते हैं, खासकर राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले आयोजनों में।

तो अगली बार जब आप टचवुड कहें, तो याद रखिएगा कि ये एक पुरानी परंपरा है, जिसका मतलब है कि आप अपनी खुशी को बचाना चाहते हैं और बुरी नजर से दूर रहना चाहते हैं। लेकिन, सिर्फ इस पर निर्भर मत रहिए, अपनी मेहनत पर भी भरोसा रखिए।

🔍 खबर का विश्लेषण

टचवुड एक दिलचस्प परंपरा है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है। ये हमें याद दिलाती है कि हमें अपनी खुशियों को संजोकर रखना चाहिए और बुरी नजर से बचाना चाहिए। लेकिन, हमें ये भी याद रखना चाहिए कि सिर्फ परंपराओं से कुछ नहीं होता, हमें मेहनत भी करनी पड़ती है और खुद पर भरोसा रखना होता है। अगर हम इन दोनों चीजों को साथ लेकर चलेंगे, तो हम जरूर सफल होंगे।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ टचवुड का मतलब क्या होता है?

टचवुड का मतलब होता है ‘नजर न लगे’। जब हम कोई अच्छी बात बताते हैं, तो डर लगता है कि कहीं उसे बुरी नजर न लग जाए। इसलिए हम टचवुड कहकर उस बात को सुरक्षित करने की कोशिश करते हैं।

❓ टचवुड की परंपरा कहां से शुरू हुई?

ये परंपरा 19वीं सदी में ब्रिटेन में बच्चों के एक खेल से शुरू हुई थी। इस खेल में जो खिलाड़ी लकड़ी को छू लेता है, वो सुरक्षित हो जाता है। धीरे-धीरे ये खेल लोगों की जिंदगी में घुल गया और टचवुड कहने का चलन शुरू हो गया।

❓ क्या टचवुड कहना जरूरी है?

टचवुड कहना जरूरी नहीं है। ये सिर्फ एक तरीका है अपनी खुशी को जाहिर करने का और बुरी नजर से बचाने का। अगर आप चाहें तो इसे कह सकते हैं, और अगर न चाहें तो नहीं भी कह सकते हैं।

❓ क्या टचवुड कहने से मनोकामना पूरी होती है?

टचवुड कहने से मनोकामना पूरी होती है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ये सिर्फ एक मान्यता है। लेकिन, अगर आपको इससे सुकून मिलता है, तो आप इसे कह सकते हैं।

❓ आजकल के दौर में टचवुड कितना सही है?

आजकल के दौर में टचवुड को ज्यादातर लोग मजाक के तौर पर लेते हैं। लेकिन, कुछ लोग आज भी इसे बहुत मानते हैं। ये आपकी मर्जी है कि आप इसे कितना मानते हैं।

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Published: 14 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

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