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टेक्सास में हादसा: हरियाणा के युवक की फूड स्टोर में जलकर मौत

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अंतरराष्ट्रीय
📅 28 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
टेक्सास में हादसा: हरियाणा के युवक की फूड स्टोर में जलकर मौत - HeadlinesNow Hindi News

🔑 मुख्य बातें

  • हरियाणा के करनाल का युवक सुखविंद्र सिंह अमेरिका में फूड स्टोर में आग लगने से मारा गया।
  • परिवार ने 50 लाख खर्च करके उसे डंकी रूट से अमेरिका भेजा था, स्टोर मालिक विक्रांत भी मरा।

अमेरिका के टेक्सास शहर में एक दर्दनाक हादसा हुआ है। हरियाणा के करनाल जिले के एक 22 वर्षीय युवक, सुखविंद्र सिंह, की एक फूड स्टोर में आग लगने से जिंदा जलकर मौत हो गई। इस हादसे में स्टोर के मालिक, पंजाब के मोहाली निवासी विक्रांत की भी जान चली गई।

पुलिस के अनुसार, आग लगने के समय सुखविंद्र और विक्रांत दोनों स्टोर के अंदर सो रहे थे। आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। जब तक दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया, तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी, और पूरा स्टोर जलकर राख हो गया था। फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है।

डंकी रूट से अमेरिका का सफर

सुखविंद्र करनाल के गंगाटेहड़ी गांव का रहने वाला था। वह अपने परिवार का इकलौता बेटा था। परिवार ने उसे बेहतर भविष्य के लिए करीब 50 लाख रुपए खर्च करके ‘डंकी रूट’ के जरिए अमेरिका भेजा था। ‘डंकी रूट’ यानी अवैध तरीके से, कई देशों की सीमाओं को पार करते हुए अमेरिका पहुंचना। सुखविंद्र के परिवार को क्या पता था कि उनका यह फैसला इतनी बड़ी त्रासदी लेकर आएगा।

इस दुखद खबर से गांव में मातम पसर गया है। सुखविंद्र के परिवार में माता-पिता और दो बहनें हैं, जिनमें से एक की शादी हो चुकी है। उसके पिता, शीशपाल, खेती करते हैं। बेटे की मौत की खबर सुनकर पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

पिता ने समझाया था, पर…

शीशपाल का कहना है कि सुखविंद्र तीन साल पहले अमेरिका गया था। इसके लिए उन्होंने अपनी कुछ जमीन भी बेच दी थी। उन्होंने सुखविंद्र को समझाया था कि वह न जाए, लेकिन वह परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहता था। उसका कहना था कि अगर वह अमेरिका में बस गया तो सब ठीक हो जाएगा।

विक्रांत मानता था बेटे जैसा

बताया जा रहा है कि स्टोर मालिक विक्रांत के साथ सुखविंद्र की अच्छी दोस्ती थी। वे दोनों मिलकर काम करते थे। समाजसेवी रणबीर लोहान ने बताया कि विक्रांत, सुखविंद्र को अपने बेटे जैसा मानता था और उसने स्टोर की पूरी जिम्मेदारी उसे सौंप रखी थी। वह खुद कई महीनों में एक बार स्टोर पर आता था।

बाथरूम में भी नहीं बची जान

लोहान ने बताया कि उनकी अमेरिका में सुखविंद्र के साथियों से बात हुई है। उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद दोनों ने अपनी जान बचाने की बहुत कोशिश की थी। वे बाथरूम में भी घुसे, लेकिन आग वहां तक भी पहुंच गई। बाद में अमेरिकी पुलिस को दोनों के शव बाथरूम में मिले। विक्रांत के शव की पहचान उसके भाई ने की, लेकिन सुखविंद्र का शव बुरी तरह जल जाने के कारण उसकी पहचान डीएनए के जरिए ही हो सकेगी।

शव लाने में लगेगा समय

सुखविंद्र के शव को भारत लाने में करीब 8 से 10 दिन का समय लग सकता है। डॉक्टरों की सलाह के बाद ही शव को भारत लाया जाएगा। अगर शव लाने की स्थिति नहीं बनती है, तो उसका अंतिम संस्कार अमेरिका में ही किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर ‘डंकी रूट’ से होने वाले खतरों को उजागर कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की अवैध यात्राओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की मांग

यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि यह अवैध आप्रवासन के खतरों को उजागर करती है। — जो कि उम्मीद से अलग है — अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

करनाल में भी पहले हुआ है ऐसा

यह दुखद संयोग है कि करनाल जिले में ही कुछ समय पहले एक और युवक की अमेरिका में सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उस युवक का शव भी कई दिनों बाद भारत लाया जा सका था।

🔍 खबर का विश्लेषण

यह घटना डंकी रूट के खतरों को दर्शाती है। परिवारों को अवैध तरीकों से विदेश भेजने के परिणामों के बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है। सरकार को इस तरह के मानव तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। इसके साथ ही, युवाओं को भारत में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान देना होगा, ताकि वे बेहतर भविष्य की तलाश में अपनी जान जोखिम में न डालें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ डंकी रूट क्या है?

डंकी रूट एक अवैध तरीका है, जिसमें लोग बिना वैध दस्तावेजों के कई देशों की सीमाओं को पार करते हुए किसी दूसरे देश में जाते हैं। यह तरीका बहुत खतरनाक होता है और इसमें जान का जोखिम भी होता है।

❓ सुखविंद्र को अमेरिका भेजने में कितना खर्च आया?

सुखविंद्र के परिवार ने उसे अमेरिका भेजने के लिए करीब 50 लाख रुपए खर्च किए थे। यह पैसा उन्होंने जमीन बेचकर और कर्ज लेकर जुटाया था।

❓ क्या सुखविंद्र का शव भारत लाया जाएगा?

डॉक्टरों की सलाह के बाद ही यह तय किया जाएगा कि सुखविंद्र का शव भारत लाया जा सकता है या नहीं। अगर शव लाने की स्थिति नहीं बनती है, तो उसका अंतिम संस्कार अमेरिका में ही किया जाएगा।

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Published: 28 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

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Journalist covering politics and technology.
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