📅 22 मार्च 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री योगी ने प्रकृति को ‘मां’ मानकर संरक्षण का संदेश दिया।
- उत्तर प्रदेश में वनाच्छादन और पौधरोपण अभियान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
- योगी ने जनभागीदारी को सफलता की कुंजी बताते हुए सबका सहयोग मांगा।
📋 इस खबर में क्या है
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में प्रकृति को ‘मां’ मानकर उसके संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वनों का महत्व और भी बढ़ गया है। यह कार्यक्रम शनिवार, 22 मार्च 2026 को आयोजित किया गया था।
प्रकृति का संरक्षण: वैदिक परंपरा का संदेश
मुख्यमंत्री योगी ने भारतीय वैदिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले ही यह संदेश दिया था कि ‘धरती हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं’। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से धरती की रक्षा करने और इसके साथ खिलवाड़ न करने का आह्वान किया। उन्होंने वन महोत्सव के दौरान प्रदेश में हुए पौधरोपण अभियानों की सफलता का भी जिक्र किया।
जनभागीदारी से मिली सफलता
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में वनाच्छादन को बढ़ाने में सफलता मिली है, क्योंकि इसे एक जन आंदोलन बनाया गया। उन्होंने कहा कि जब भी कोई अभियान जन आंदोलन बनता है, तो सफलता मिलती है, क्योंकि तब उसका नेतृत्व समाज करता है, सरकार और विभाग पीछे रहते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में केवल एक रामसर साइट थी, जबकि आज 11 हैं और सरकार का प्रयास इसे 100 तक पहुंचाने का है।
‘फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स’: इस वर्ष की थीम
मुख्यमंत्री ने इस वर्ष की थीम ‘फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने, वनों से आर्थिक विकास और मानव कल्याण के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत करने की आवश्यकता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि वन, जीवन के आधार और प्रकृति के संतुलन का एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत करते हैं। यदि वन है तो जल है, जल है तो वन, वन है तो वायु और वायु है तो जीवन है।
उत्तर प्रदेश में वनाच्छादन में वृद्धि
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वन महोत्सव के अवसर पर पहले वर्ष केवल 5.5 करोड़ पौधरोपण हो पाए थे, जिसमें भी निजी नर्सरी का सहारा लेना पड़ा था। वहीं, गत वर्ष वन महोत्सव के अवसर पर 37 करोड़ पौधे एक ही दिन में प्रदेश भर में लगाए गए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राजनीति से प्रेरित होकर काम नहीं करती बल्कि जनहित को सर्वोपरि रखती है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर दिया गया संदेश प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने वनों के महत्व को रेखांकित करते हुए सभी से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया है।
🔍 खबर का विश्लेषण
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संबोधन पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वनों के संरक्षण और वनाच्छादन में वृद्धि के प्रयासों से प्रदेश में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। यह खबर राजनीति और पर्यावरण दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकार की नीतियों और जन जागरूकता को बढ़ावा देने का संदेश देती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ अंतरराष्ट्रीय वन दिवस कब मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय वन दिवस हर साल 21 मार्च को मनाया जाता है। इस दिन वनों के महत्व और उनके संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाई जाती है।
❓ इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय वन दिवस की थीम क्या है?
इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय वन दिवस की थीम ‘फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स’ है, जो पारिस्थितिकी संतुलन और आर्थिक विकास के बीच संबंध को दर्शाती है।
❓ उत्तर प्रदेश में रामसर साइट्स की संख्या कितनी है?
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 11 रामसर साइट्स हैं, और सरकार का लक्ष्य इसे 100 तक पहुंचाना है।
❓ मुख्यमंत्री योगी ने जनभागीदारी के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जब कोई अभियान जन आंदोलन बनता है, तो सफलता मिलती है, क्योंकि तब उसका नेतृत्व समाज करता है।
❓ पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में कितने पौधे लगाए गए?
पिछले वर्ष वन महोत्सव के अवसर पर उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में 37 करोड़ पौधे लगाए गए।
📰 और पढ़ें:
ताज़ा और विश्वसनीय समाचारों के लिए HeadlinesNow.in से जुड़े रहें।
Published: 22 मार्च 2026 | HeadlinesNow.in

