📅 19 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk

🔑 मुख्य बातें
- सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी के 29 मिनट के भाषण में 58 बार कांग्रेस का नाम लेने पर तंज कसा।
- महिला आरक्षण को ‘राजनीतिक ढाल’ बताते हुए, सरकार पर ‘अलोकतांत्रिक परिसीमन’ करने का आरोप लगाया।
- हाथरस और मणिपुर का हवाला देते हुए, बीजेपी के महिला सम्मान के दावों को खोखला बताया।
📋 इस खबर में क्या है
लोकसभा चुनावों के नज़दीक आते ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज़ हो गए हैं। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली से आई इस खबर में, उन्होंने पीएम के भाषण में बार-बार कांग्रेस का ज़िक्र होने पर तंज कसा है। उनका कहना है कि 29 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने 58 बार कांग्रेस का नाम लिया।
सुप्रिया श्रीनेत ने सवाल उठाया कि अगर कांग्रेस पार्टी नहीं होती, तो प्रधानमंत्री किस नाम की माला जपते? यह प्रधानमंत्री की घबराहट को दर्शाता है, उन्होंने कहा।
महिला आरक्षण पर घेराबंदी
कांग्रेस नेत्री ने महिला आरक्षण को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण को एक ‘राजनीतिक ढाल’ के रूप में इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना है कि मोदी सरकार महिला आरक्षण की आड़ में ‘अलोकतांत्रिक परिसीमन’ करना चाहती है, ताकि वह जाति जनगणना के मुद्दे से बच सके।
उनकी यह योजना अब पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है और प्रधानमंत्री इसी कारण घबराए हुए हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार सभी शर्तों को हटाकर बिना देरी के महिलाओं को 543 सीटों में से 181 सीटें दे। यह एक बड़ा मुद्दा है।
बीजेपी के रिकॉर्ड पर सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी सरकार के महिलाओं के प्रति रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोकसभा में बीजेपी के सिर्फ 12.9 फीसदी सांसद महिला हैं और देश भर में उनके 10 प्रतिशत से भी कम विधायक महिलाएं हैं। सुप्रिया जी ने बीजेपी पर सीधा निशाना साधा।
श्रीनेत ने हाथरस और मणिपुर जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए पीएम मोदी के ‘महिला सम्मान’ के दावे को कमजोर बताया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि देश की महिलाएं सब देख और समझ रही हैं और समय आने पर वे अपने अपमान का हिसाब ज़रूर लेंगी।
सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग?
सुप्रिया श्रीनेत ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनाव प्रक्रिया चल रही है, ऐसे समय में प्रधानमंत्री का इस तरह का भाषण देना चुनावी मानदंडों के खिलाफ है।
उन्होंने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री का जनता से सीधा संपर्क अब टूट चुका है और उनके आसपास के लोग उन्हें सच्चाई बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। सवाल यह है, आगे क्या होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रिया श्रीनेत के इन आरोपों से आने वाले दिनों में राष्ट्रीय स्तर पर और भी ज़्यादा राजनीतिक घमासान देखने को मिल सकता है। देखना होगा कि सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है। राष्ट्रीय मुद्दे पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को कितना आगे तक ले जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर यह बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और भी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
सुप्रिया श्रीनेत के आरोपों के बाद, बीजेपी की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब देखना यह है कि बीजेपी इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है। क्या बीजेपी इन आरोपों का खंडन करेगी, या फिर कोई और रणनीति अपनाएगी? राष्ट्रीय राजनीति में यह एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
🔍 खबर का विश्लेषण
सुप्रिया श्रीनेत के आरोपों से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बीजेपी के खिलाफ एक और मुद्दा मिल गया है। महिला आरक्षण और बीजेपी के महिला विरोधी रिकॉर्ड को लेकर जनता में गलत संदेश जा सकता है। बीजेपी को इन आरोपों का जल्द ही जवाब देना होगा, वरना नुकसान हो सकता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ सुप्रिया श्रीनेत ने पीएम मोदी पर मुख्य आरोप क्या लगाए?
उन्होंने महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और बीजेपी पर सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
❓ कांग्रेस ने बीजेपी के महिला रिकॉर्ड पर क्या कहा?
कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम है, जो उनके महिला सम्मान के दावों को झूठा साबित करता है।
❓ इस मुद्दे का आगे क्या असर हो सकता है?
इस मुद्दे से लोकसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच टकराव और बढ़ सकता है, खासकर महिला वोटरों को लुभाने के लिए।
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Published: 19 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

