📅 23 मार्च 2026 | HeadlinesNow Desk
.webp)
🔑 मुख्य बातें
- RGPV कैंटीन में खाने में छिपकली मिलने का दावा, वीडियो वायरल
- कैंटीन कर्मचारी ने छिपकली को शिमला मिर्च बताकर खाया
- विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की
📋 इस खबर में क्या है
भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) की UIT कैंटीन में 23 मार्च 2026 को एक अजीबोगरीब घटना सामने आई। कैंटीन में भोजन कर रहे छात्रों ने खाने में छिपकली होने का दावा किया, जबकि कैंटीन कर्मचारियों ने उसे शिमला मिर्च बताया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी इस बात की जांच करेगी कि क्या वास्तव में कैंटीन कर्मचारी ने छिपकली को शिमला मिर्च बताकर खा लिया था, या छात्र ने शिमला मिर्च को छिपकली बताकर हंगामा खड़ा किया। यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।
वायरल वीडियो में, कुछ छात्रों को कैंटीन में खाना खाते हुए देखा जा सकता है। एक छात्र को अपनी थाली में कुछ संदिग्ध दिखाई दिया। करीब से देखने पर छात्रों ने उसे छिपकली बताया। जब उन्होंने कैंटीन कर्मचारी से इस बारे में पूछा, तो उसने उसे शिमला मिर्च बताया। छात्र ने उस संदिग्ध वस्तु के पैर जैसी आकृति दिखाते हुए उसे छिपकली कहा, लेकिन कर्मचारी ने उसे उठाकर खुद खा लिया और शिमला मिर्च होने का दावा किया। छात्रों का कहना है कि उस वस्तु का बचा हुआ हिस्सा अब भी संदिग्ध दिख रहा था।
RGPV कैंटीन विवाद: क्या यह भोजन में छिपकली थी या शिमला मिर्च?
मामला सामने आने के बाद, यूआईटी डायरेक्टर ने जांच कमेटी गठित कर दी है। दूसरी ओर, कैंटीन संचालक का कहना है कि छात्रों के आरोप गलत हैं। कैंटीन के संचालक सुनील अग्रवाल का कहना है कि कर्मचारी पूरी तरह स्वस्थ है। थाली में छिपकली नहीं, शिमला मिर्च थी। उन्होंने बताया कि कर्मचारी ने छात्र की शंका दूर करने के लिए उसे खाया था। अग्रवाल ने यह भी कहा कि शिमला मिर्च में रेशे और दाने होते हैं, जबकि छिपकली में ऐसा नहीं होता। उनका तर्क है कि यदि वह छिपकली होती, तो कर्मचारी उसे क्यों खाता?
जांच कमेटी का गठन
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी का गठन किया है। कमेटी को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी कि वास्तव में खाने में छिपकली थी या शिमला मिर्च। इस घटना ने कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना राष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियां बटोर रही है।
कैंटीन संचालक का दावा
कैंटीन संचालक सुनील अग्रवाल ने दावा किया है कि उनके कैंटीन में हमेशा स्वच्छ और ताजा भोजन परोसा जाता है। उन्होंने छात्रों के आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वे भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए और अधिक सावधानी बरतेंगे। यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि छात्रों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस घटना ने विश्वविद्यालय के छात्रों और कर्मचारियों के बीच चिंता पैदा कर दी है। हर कोई सच्चाई जानना चाहता है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। जांच कमेटी की रिपोर्ट का सभी को बेसब्री से इंतजार है। इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता की जांच के लिए नियमित निरीक्षण करने का निर्णय लिया है। यह राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है।
निष्कर्षतः, RGPV कैंटीन में हुई यह घटना एक गंभीर मामला है जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि छात्रों को स्वच्छ और सुरक्षित भोजन मिले। कैंटीन संचालकों को भी भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करना चाहिए।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह घटना RGPV कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है। विश्वविद्यालय प्रशासन को कैंटीन में स्वच्छता और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना चाहिए। ऐसी घटनाओं से छात्रों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और विश्वविद्यालय की छवि भी खराब हो सकती है। यह राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय है और अन्य संस्थानों को भी इससे सबक लेना चाहिए।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ RGPV कैंटीन में क्या हुआ?
छात्रों ने खाने में छिपकली मिलने का दावा किया, जबकि कर्मचारी ने उसे शिमला मिर्च बताया। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया।
❓ विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
विश्वविद्यालय प्रशासन ने घटना की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है, जो मामले की जांच करेगी और रिपोर्ट सौंपेगी।
❓ कैंटीन संचालक का क्या कहना है?
कैंटीन संचालक का कहना है कि छात्रों के आरोप गलत हैं और खाने में छिपकली नहीं, शिमला मिर्च थी।
❓ इस घटना का छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ा?
इस घटना से छात्रों में चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा हुई है। वे कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं।
❓ आगे क्या हो सकता है?
जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता में सुधार के लिए कदम उठा सकता है।
📰 और पढ़ें:
ताज़ा और विश्वसनीय समाचारों के लिए HeadlinesNow.in से जुड़े रहें।
Published: 23 मार्च 2026 | HeadlinesNow.in

