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G6PD: पुरुषों के लिए एक जेनेटिक ख़तरा, लाल रक्त कोशिकाओं पर असर

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स्वास्थ्य
📅 03 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
G6PD: पुरुषों के लिए एक जेनेटिक ख़तरा, लाल रक्त कोशिकाओं पर असर - HeadlinesNow Hindi News

🔑 मुख्य बातें

  • G6PD की कमी एक जेनेटिक बीमारी है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। पुरुषों में इसका खतरा ज्यादा होता है।
  • इसके लक्षणों में थकान, सांस लेने में तकलीफ और पेशाब का रंग बदलना शामिल है। सही समय पर पहचान से खतरे को कम किया जा सकता है।

जब बात आती है हमारे शरीर के ठीक से काम करने की, तो ब्लड सर्कुलेशन का सही होना बहुत ज़रूरी है। ये खून ही है जो हमारे अंगों तक ज़रूरी पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचाता है। लेकिन, कुछ मामलों में, खून की कमी का खतरा बढ़ जाता है। G6PD डिफिशिएंसी एक ऐसी ही स्थिति है जिसके बारे में जानना ज़रूरी है।

G6PD, यानी ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज, एक एंजाइम है जो हमारी लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells) को नुकसान से बचाता है। जब शरीर में इसकी कमी हो जाती है, तो लाल रक्त कोशिकाएं बहुत जल्दी damage होने लगती हैं। और ये कोशिकाएं ही फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर पूरे शरीर में पहुंचाती हैं। इस कमी से एनीमिया यानी खून की कमी का खतरा बढ़ जाता है।

G6PD की कमी: क्या है और क्यों होती है?

ये एक जेनेटिक बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में आती है। तो , आपका G6PD लेवल कम हो जाता है। महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में इसका खतरा ज़्यादा देखा जाता है। मेडिकल रिपोर्ट्स बताती हैं कि G6PD की कमी होना आम है। दुनिया भर में करीब 40 से 50 करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं। कई लोगों में तो इसके लक्षण भी नहीं दिखते, तो समय पर पता भी नहीं चलता। कुछ दवाएं लेने से हीमोलिटिक एनीमिया जैसी गंभीर समस्या हो सकती है, जिसमें बहुत सारी लाल रक्त कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होकर dead होने लगती हैं। नए जन्मे बच्चों में G6PD की कमी से गंभीर पीलिया हो सकती है।

डॉक्टरों का कहना है कि G6PD की कमी होने पर आमतौर पर कोई लक्षण नहीं दिखते। जब तक कि कोई ट्रिगर आपकी लाल रक्त कोशिकाओं पर दबाव न डाले और उनके टूटने की वजह न बने।

कैसे पहचानें G6PD की कमी को?

G6PD की कमी की पहचान कुछ लक्षणों से हो सकती है, जैसे:

  • दिल की धड़कन का तेज़ होना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • पेशाब का रंग गहरा पीला या नारंगी होना
  • हमेशा थकान और कमजोरी महसूस होना

जब ये लक्षण गंभीर हो जाते हैं, तो इसे हीमोलिटिक क्राइसिस कहा जाता है।

क्या हैं G6PD की कमी के कारण?

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फवा बीन्स खाना इसका एक आम ट्रिगर हो सकता है। अगर G6PD की कमी वाला कोई व्यक्ति फवा बीन्स खाता है, तो उसे हीमोलिटिक एनीमिया हो सकता है। टाइफाइड बुखार, हेपेटाइटिस-ए, हेपेटाइटिस-बी और निमोनिया भी इसे ट्रिगर कर सकते हैं। शराब और स्मोकिंग भी मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है।

इसका इलाज क्या है?

जिन मरीजों का सीबीसी टेस्ट बार-बार लो रहता है, उनमें G6PD की कमी को चेक करने के लिए डॉक्टर टेस्ट कर सकते हैं। वैसे तो, इसकी कमी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे ट्रिगर करने वाली चीज़ों से बचकर आप इसके खतरे को कम कर सकते हैं। जिन लोगों को पीलिया की समस्या होती है, उन्हें डॉक्टर दवा और दूसरे उपचार दे सकते हैं। कई लोगों को पता भी नहीं चलता कि उन्हें G6PD की कमी है, क्योंकि उनमें लक्षण नहीं होते। लेकिन जिनका ब्लड काउंट हमेशा कम रहता है, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। सही समय पर जांच और सावधानी से स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सकता है।

निष्कर्ष

G6PD की कमी एक जेनेटिक स्थिति है जो पुरुषों में ज़्यादा देखी जाती है। इसके बारे में जागरूकता बढ़ाना ज़रूरी है ताकि लोग समय पर इसका पता लगा सकें और सही कदम उठा सकें। अगर आपको ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। स्वास्थ्य ही धन है, तभी तो इसे गंभीरता से लें। और हाँ, एक बात और — अपनी डाइट पर ध्यान दीजिये, क्योंकि आपकी डाइट का सीधा असर आपकी सेहत पर पड़ता है। सही खान-पान से आप इस कमी को काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं तक सबकी पहुँच होनी चाहिए।

🔍 खबर का विश्लेषण

G6PD की कमी को लेकर जागरूकता फैलाना बहुत ज़रूरी है। बहुत से लोगों को पता ही नहीं होता कि उन्हें ये बीमारी है, क्योंकि इसके लक्षण हमेशा दिखाई नहीं देते। अगर लोगों को इसके बारे में जानकारी होगी, तो वे समय पर टेस्ट करवा सकते हैं और जरूरी सावधानियां बरत सकते हैं। सरकार और स्वास्थ्य संगठनों को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को फायदा हो सके।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ G6PD की कमी क्या होती है?

यह एक जेनेटिक बीमारी है, जिसमें शरीर में ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज नामक एंजाइम की कमी हो जाती है। यह एंजाइम लाल रक्त कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है।

❓ इसके लक्षण क्या हैं?

इसके लक्षणों में थकान, कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ, दिल की धड़कन का तेज़ होना और पेशाब का रंग गहरा पीला या नारंगी होना शामिल हैं।

❓ इसका इलाज क्या है?

वैसे तो इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन ट्रिगर करने वाली चीज़ों से बचकर और डॉक्टर की सलाह से इसके खतरे को कम किया जा सकता है।

❓ क्या G6PD की कमी जानलेवा हो सकती है?

आमतौर पर यह जानलेवा नहीं होती, लेकिन गंभीर मामलों में हीमोलिटिक क्राइसिस हो सकता है, जिसके लिए तुरंत इलाज की ज़रूरत होती है।

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Published: 03 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

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