📅 16 जुलाई 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- अखाड़ा परिषद ने कांवड़ मेले के बाद मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए कारसेवा की घोषणा की है।
- श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि अयोध्या की तर्ज पर मथुरा में भी संत और श्रद्धालु बड़ी संख्या में जुटेंगे।
- कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी इस कारसेवा में शामिल होने का न्योता भेजा जाएगा।
📋 इस खबर में क्या है
हरिद्वार के संत समाज में अयोध्या के बाद अब मथुरा को लेकर एक नई हलचल है। जैसे भव्य राम मंदिर बना, वैसे ही अब श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी उसका वास्तविक स्वरूप दिलाने की बात हो रही है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने ऐलान किया है कि कांवड़ मेला खत्म होते ही मथुरा में कार सेवा की तारीख बताई जाएगी, जिससे एक बड़े आंदोलन की नींव रखी जा सके।
मंगलवार को निरंजनी अखाड़े की एक अहम बैठक हुई, जहाँ संतों ने एक सुर में ‘चलो मथुरा चलें’ का नारा बुलंद किया। रविंद्रपुरी महाराज ने साफ कहा, जैसे अयोध्या में लाखों साधु-संत और महात्मा जुटे थे, ठीक उसी तरह अब मथुरा में भी सभी संत-महात्मा और श्रद्धालु पहुंचेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये आह्वान केवल कुछ संतों का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज की भावना है, जो अपने आराध्य श्रीकृष्ण की जन्मभूमि को लेकर संकल्पबद्ध है।
अयोध्या के बाद अब मथुरा की बारी?
महाराज रविंद्रपुरी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद संत समाज ने ठान लिया है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी उसका पुराना गौरव वापस दिलाना है। इस कार सेवा में देश के कोने-कोने से विभिन्न अखाड़ों के आचार्य, महामंडलेश्वर, संत और महंत शामिल होंगे, साथ ही वो सभी श्रद्धालु भी जुड़ेंगे जिनकी आस्था इस पवित्र भूमि से जुड़ी है। उनका प्रयास है कि जल्द से जल्द मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो सके।
कारसेवा का न्योता, सियासी गलियारों में हलचल
एक दिलचस्प बात ये भी है कि इस प्रस्तावित कार सेवा में राजनीतिक नेताओं को भी बुलाया जाएगा। रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी इस पावन कार्य में शामिल होने का निमंत्रण भेजा जाएगा। अब देखना यह है कि सियासत के ये धुरंधर संतों के इस आह्वान पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या वे इस बड़े धर्म कार्य का हिस्सा बनेंगे।
कब होगी कारसेवा और कौन-कौन आएगा?
कांवड़ मेला इस बार 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगा। इसके ठीक बाद ही अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविंद्रपुरी महाराज, श्री चित्रगुप्त पीठ, वृंदावन-मथुरा के पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद के साथ विचार-विमर्श करके कार सेवा की सही तारीख का ऐलान करेंगे। यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक पहल नहीं होगी, बल्कि इसे श्रीकृष्ण जन्मभूमि को उसके वास्तविक स्वरूप में स्थापित कराने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसमें देशभर से जन सैलाब उमड़ने की उम्मीद है।
काली सेना की शर्त और हिंदू-मुस्लिम एकता की बात
वहीं, काली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप ने भी इस कार सेवा में शामिल होने की बात कही है, लेकिन उनकी अपनी एक शर्त है। उनका कहना है कि अगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 9 अगस्त से पहले ही श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण की तारीख घोषित कर देते हैं, तो फिर कार सेवा की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन, यदि ऐसा नहीं होता है, तो संत प्रतीकात्मक कार सेवा करके अपना संदेश जरूर देंगे। स्वामी आनंद स्वरूप ने यह भी जोड़ा कि उन्हें लगता है कि मुस्लिम समाज का भी एक तबका चाहता है कि श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण हो, ताकि लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद समाप्त हो सके और देश में हिंदू-मुस्लिम एकता मजबूत हो। उनका मानना है कि यह कदम एक नया सद्भाव पैदा कर सकता है।
पर जहां एक तरफ मथुरा में धर्म की इस बड़ी तैयारी का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक कांवड़ मेले की तैयारियों में अभी भी कुछ ढिलाई दिख रही है। 30 जुलाई से शुरू होने वाले इस मेले में करोड़ों शिवभक्तों के हरिद्वार पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन अभी भी कहीं सड़कों के गड्ढे भरे जा रहे हैं तो कहीं काम अधूरा पड़ा है। ऐसे में संतों ने अपनी चिंता जताई है, लेकिन इन सबके बीच मथुरा में कार सेवा का मुद्दा अब जोर पकड़ता दिख रहा है, जो आने वाले समय में एक बड़ी खबर बन सकता है।
🔍 खबर का विश्लेषण
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए कारसेवा का ऐलान देश में एक नई बहस छेड़ सकता है। अयोध्या के बाद संतों का यह कदम धार्मिक और राजनीतिक दोनों ही मोर्चों पर महत्वपूर्ण होगा। राहुल और अखिलेश को निमंत्रण देना सियासी संदेश भी देता है, जो दिखाता है कि आयोजक इस मुद्दे को व्यापक बनाना चाहते हैं। अगर मुस्लिम समाज के कुछ लोग भी समर्थन में आते हैं, तो यह हिंदू-मुस्लिम एकता की दिशा में एक नया मोड़ हो सकता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ श्रीकृष्ण जन्मभूमि में कारसेवा की घोषणा किसने की है?
श्रीकृष्ण जन्मभूमि में कारसेवा की घोषणा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने की है। यह ऐलान निरंजनी अखाड़े की बैठक के बाद किया गया।
❓ कारसेवा कब शुरू होगी और इसकी तारीख कब घोषित की जाएगी?
कारसेवा कांवड़ मेला खत्म होने के बाद शुरू होगी। कांवड़ मेला 11 अगस्त को खत्म होगा, जिसके बाद श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज और डॉ. स्वामी सच्चिदानंद मिलकर इसकी तारीख का ऐलान करेंगे।
❓ किन राजनीतिक नेताओं को कारसेवा में आमंत्रित किया जाएगा?
अखाड़ा परिषद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा में शामिल होने के लिए निमंत्रण भेजने का फैसला किया है।
❓ काली सेना ने कारसेवा में शामिल होने के लिए क्या शर्त रखी है?
काली सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि अगर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 9 अगस्त से पहले मंदिर निर्माण की तारीख घोषित कर दें, तो कारसेवा की जरूरत नहीं पड़ेगी, वरना वे प्रतीकात्मक कारसेवा करेंगे।
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Published: 16 जुलाई 2026 | HeadlinesNow.in

