📅 17 जुलाई 2026 | HeadlinesNow Desk

🔑 मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री योगी ने बिजनौर को पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा ‘अपशकुनी’ मानने के मिथक को नकारा, जिसे वे विकास में बाधा मानते थे।
- उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वे देर से उठते हैं और जनता के लिए समय नहीं निकालते, सिर्फ जिम जाते हैं।
- योगी ने ‘जिन्ना नहीं, गन्ना’ का नारा दिया और विभाजन के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए, जातिवादी राजनीति को ‘जोगेंद्र नाथ मंडल’ का काम बताया।
📋 इस खबर में क्या है
क्या कोई शहर किसी मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने का कारण बन सकता है? उत्तर प्रदेश के बिजनौर में ऐसा ही एक अजीबोगरीब राजनीतिक विश्वास पिछले कई दशकों तक प्रचलित रहा है। यह बात शुक्रवार को तब एक बार फिर चर्चा में आई, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने के बाद एक जनसभा को संबोधित किया। अपने भाषण के दौरान, योगी ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला, खासकर उन पूर्व मुख्यमंत्रियों पर जो बिजनौर आने से कतराते थे, यह मानकर कि यह उनकी कुर्सी के लिए अशुभ है।
सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले कोई मुख्यमंत्री बिजनौर नहीं आता था, क्योंकि उन्हें डर था कि बिजनौर आने से उनकी कुर्सी जा सकती है। उन्होंने इस धारणा को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा, जिस बिजनौर की पावन भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने साग खाया हो, और मां गंगा का सानिध्य हो, वह भूमि अपशकुनी कैसे हो सकती है? उनका यह बयान सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और पिछली सरकारों पर कटाक्ष था। योगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह मुख्यमंत्री ही अपशकुनी थे, जिन्होंने बिजनौर के विकास को रोका। उन्होंने यह भी बताया कि वह पिछले नौ साल में नौ बार बिजनौर आ चुके हैं, जो इस क्षेत्र के प्रति उनकी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह बयान तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
‘अपशकुनी’ बिजनौर और मुख्यमंत्री की कुर्सी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में अखिलेश यादव पर व्यक्तिगत हमला भी किया। उन्होंने कहा कि बिजनौर की धरती को अपशकुनी बताने वाले ‘बबुआ’ तो दोपहर बारह बजे उठते हैं, फिर कुछ खा पीकर दो बजे जिम चले जाते हैं। इसके बाद उनकी अपनी मंडली बैठ जाती थी, तो विकास कहां से कराते? योगी ने कटाक्ष किया कि उनके पास जनता के लिए समय ही नहीं था। यह टिप्पणी सीधे तौर पर विपक्ष पर सुस्त कार्यप्रणाली और जनता से दूरी बनाने का आरोप लगाती है, जिसका मकसद मतदाताओं के मन में पिछली सरकारों के प्रति नकारात्मक धारणा को और मजबूत करना था।
जिन्ना नहीं, गन्ना – विकास और विभाजन पर वार
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में ‘जिन्ना नहीं, गन्ना’ का नारा भी दिया। उन्होंने कहा कि यह जिन्ना का नहीं, गन्ना का क्षेत्र है। जो लोग कहते हैं कि उन्हें जिन्ना पसंद है, हम उनसे कहते हैं कि हमें जिन्ना नहीं, गन्ना पसंद है। यह बयान उन राजनीतिक दलों पर निशाना था, जिन पर अक्सर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगता है। योगी ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने माफियाओं को कुचलने का काम किया है। उन्होंने दावा किया कि कभी देश में दसवें नंबर पर रहने वाला उत्तर प्रदेश आज देश की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक समृद्धि वाला प्रदेश बन गया है, और बहुत जल्दी पहले नंबर पर भी आएगा। यह बयान भी जमकर वायरल हुआ।
देश के विभाजन के मुद्दे पर भी योगी ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि देश का विभाजन कांग्रेस के पाप के कारण हुआ, जिसका खामियाजा पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले लोगों ने भुगता और आज भी भुगत रहे हैं। उन्होंने सिख बंधुओं और बांग्लादेश से आने वाले लोगों के दर्द को सामने रखा, और यह भी कहा कि आज जब बांग्लादेश में दलित मारे जाते हैं, तो इन लोगों के मुंह बंद हो जाते हैं।
जातिवादी राजनीति और ‘जोगेंद्र नाथ मंडल’ का जिक्र
मुख्यमंत्री योगी ने कुछ नेताओं पर जाति-बिरादरी के नाम पर बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उन्हें ‘जोगेंद्र नाथ मंडल’ बनने की कोशिश बताया। — जो कि उम्मीद से अलग है — उन्होंने कहा कि ऐसे लोग नाम ‘भारत रत्न’ बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का लेंगे, लेकिन काम ‘जोगेंद्र नाथ मंडल’ का करेंगे। जोगेंद्र नाथ मंडल विभाजन से पहले और बाद में पाकिस्तान में एक प्रमुख दलित नेता थे, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदाय के उत्पीड़न के कारण अपनी राजनीतिक भूमिका छोड़ने को मजबूर हुए। योगी का यह संदर्भ उन लोगों को चेतावनी देने के लिए था जो दलित वोट बैंक को लुभाने के लिए बाबा साहब का नाम लेते हैं, लेकिन वास्तव में उनके आदर्शों के विपरीत काम करते हैं, जिससे समाज में विभाजन और अराजकता फैलती है।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बिजनौर दौरा केवल विकास योजनाओं का अनावरण नहीं था, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए एक मजबूत राजनीतिक शंखनाद था। उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया और विपक्ष पर तीखे हमलों से अपने समर्थकों में जोश भरने का प्रयास किया। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके ये बयान और आरोप आगामी राजनीतिक बहसों में किस तरह से गूंजते हैं और जनता इन्हें कैसे लेती है।
🔍 खबर का विश्लेषण
योगी आदित्यनाथ का बिजनौर दौरा सिर्फ विकास परियोजनाओं का लोकार्पण नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। विपक्ष पर उनके तीखे हमले, खासकर अखिलेश यादव को व्यक्तिगत रूप से निशाने पर लेना, भाजपा के कोर मतदाताओं को एकजुट करने और विपक्षी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश है। ‘जिन्ना बनाम गन्ना’ और ‘जोगेंद्र नाथ मंडल’ जैसे जुमलों से वे सीधे-सीधे पहचान की राजनीति और राष्ट्रवाद का मुद्दा उछाल रहे हैं, जिसका आने वाले समय में राजनीतिक गलियारों में वायरल होना तय है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ बिजनौर को क्यों ‘अपशकुनी’ माना जाता था?
पूर्ववर्ती सरकारों में कुछ मुख्यमंत्रियों का यह अंधविश्वास था कि बिजनौर का दौरा करने से उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ सकती है। यह एक राजनीतिक मिथक था, जिसे योगी आदित्यनाथ ने खारिज किया।
❓ योगी आदित्यनाथ ने इस धारणा का खंडन कैसे किया?
उन्होंने बिजनौर की पवित्र भूमि का हवाला दिया, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने साग खाया था और मां गंगा का सानिध्य है। उन्होंने कहा कि असली अपशकुनी वे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने बिजनौर का विकास रोका।
❓ ‘जिन्ना बनाम गन्ना’ बयान का क्या मतलब है?
इस बयान के माध्यम से योगी आदित्यनाथ ने उन लोगों पर निशाना साधा जो कथित तौर पर विभाजनकारी राजनीति करते हैं (‘जिन्ना’ का प्रतीक)। उन्होंने बिजनौर को गन्ना उत्पादक क्षेत्र बताया, जो विकास और समृद्धि का प्रतीक है।
❓ योगी ने देश के विभाजन के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के विभाजन का दोष सीधे तौर पर कांग्रेस के ‘पाप’ पर मढ़ा। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले लोग आज भी भुगत रहे हैं।
❓ ‘जोगेंद्र नाथ मंडल’ का जिक्र क्यों किया गया?
योगी ने उन नेताओं पर कटाक्ष किया जो बाबा साहब आंबेडकर का नाम लेकर जाति-बिरादरी की राजनीति करते हैं। उनका इशारा उन लोगों की तरफ था जो दलितों का नाम लेकर समाज को बांटते हैं, जैसे जोगेंद्र नाथ मंडल विभाजन के समय हुए थे।
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Published: 17 जुलाई 2026 | HeadlinesNow.in

