📅 15 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- भोपाल में एक युवक ज़ॉम्बी ड्रग के सेवन के बाद मनोचिकित्सक के पास पहुंचा।
- इंदौर में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां युवा इस ड्रग के शिकार हो रहे हैं।
- यह ड्रग दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर को अनियंत्रित कर देता है, जिससे व्यक्ति सुस्त हो जाता है।
📋 इस खबर में क्या है
क्या देश में युवाओं के बीच एक नए तरह के नशे की लत लग रही है? क्या ये ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है? हाल ही में भोपाल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने चिंता बढ़ा दी है।
गोवा से लौटा और बदल गया
दरअसल, भोपाल का एक 24 वर्षीय युवक गोवा से लौटा। लौटने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ दिनों से उसे बेचैनी और घबराहट की शिकायत थी। वो चिड़चिड़ा होने के साथ-साथ हिंसक भी हो रहा था। सबसे बड़ी बात, वो बार-बार गोवा जाने की जिद कर रहा था। जब परिजनों ने मना किया, तो उसने उनके साथ मारपीट करने की कोशिश की।
परेशान माता-पिता ने डॉक्टर से बात की तो उन्होंने मनोचिकित्सक के पास जाने की सलाह दी। इस केस में दावा किया जा रहा है कि युवक ने गोवा में ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ का सेवन किया था। जब उसे भोपाल में यह ड्रग नहीं मिला, तो उसे दिक्कतें होने लगीं। डॉक्टर के सामने उसने खुलासा किया कि गोवा में उसने एक खास तरह के ड्रग का सेवन किया था जिसे ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ कहा जाता है।
इंदौर में भी मामले
बताया जा रहा है कि इंदौर समेत दूसरे शहरों में भी इसी तरह के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे लोग काउंसलिंग के लिए मनोचिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं। भोपाल के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी ने बताया कि उनके पास एक ऐसा मामला आया था, जिसमें युवक ने गोवा में ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ लिया था। उसके व्यवहार में बदलाव और एंजायटी जैसे साइड इफेक्ट्स देखने को मिले थे। उसने बताया कि उसने दोस्तों के साथ यह ड्रग लिया था।
कितना खतरनाक है ये ड्रग?
इंदौर के मनोचिकित्सक डॉ. वीएस पॉल का कहना है कि उनकी जानकारी में आया है कि इसमें ट्रंकुलाइजर ड्रग का इस्तेमाल किया जा रहा है। ये आमतौर पर जानवरों और इंसानों को बेहोश करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। — सोचने वाली बात है — इसकी उपलब्धता आसान नहीं है, लेकिन इसका सेवन मानसिक क्षमता को कम कर देता है।
सेवन करने वाला व्यक्ति एग्रेसिव हो सकता है। अनैतिक और आपराधिक गतिविधियों में शामिल हो सकता है। वाहन चलाते समय हादसे हो सकते हैं। मनोचिकित्सक डॉ. रामगुलाम राजदान का कहना है कि उनके पास ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ का कोई मामला नहीं आया है, लेकिन दूसरे ड्रग्स लेने के बाद लोग काउंसलिंग के लिए आते हैं।
क्या है ये ट्रंकुलाइजर दवा?
‘ज़ॉम्बी ड्रग’ कोई आधिकारिक नाम नहीं है, बल्कि एक खतरनाक नशे के लिए इस्तेमाल होने वाला आम शब्द है। इस ड्रग में जाइलेजीन नामक केमिकल को किसी अन्य ड्रग के साथ लिया जाता है। जाइलेजीन का उपयोग आमतौर पर जानवरों को ट्रंकुलाइज करने के लिए किया जाता है। इसके सेवन से व्यक्ति घंटों एक ही जगह स्थिर हो जाता है। ये ड्रग शरीर और दिमाग को इतना धीमा कर देता है कि व्यक्ति की प्रतिक्रिया क्षमता लगभग खत्म हो जाती है।
दिमाग पर कैसे करता है असर?
यह ड्रग दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर जैसे नोरएपिनेफ्रिन, सिरोटोटिन और डोपामिन को अनियंत्रित कर देता है। इससे दिमाग की गतिविधियां धीमी हो जाती हैं और व्यक्ति सुस्त और भ्रमित हो जाता है। व्यक्ति अर्ध-बेहोशी या बेहोशी की स्थिति में चला जाता है। राजनीति में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है, विरोधियों को शांत करने के लिए।
पशुओं के लिए इस्तेमाल
जानकारी के मुताबिक (ट्रंकुलाइज) जाइलेजिन मूल रूप से पशुओं को बेहोश करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग शेर, बाघ, घोड़े, गाय जैसे बड़े जानवरों के इलाज या सर्जरी के दौरान किया जाता है। इंसानों के लिए यह दवा सुरक्षित नहीं मानी जाती।राजनीति में भी आजकल नैतिकता का स्तर गिरता जा रहा है।
इसका असर क्या होगा?
कुल मिलाकर, ‘ज़ॉम्बी ड्रग’ का खतरा बढ़ रहा है और इस पर ध्यान देना ज़रूरी है। युवाओं को इस नशे से बचाने के लिए जागरूकता फैलानी होगी और सही कदम उठाने होंगे। राजनीति में युवाओं को सही दिशा देने की ज़रूरत है।
🔍 खबर का विश्लेषण
ज़ॉम्बी ड्रग का खतरा युवाओं के लिए एक गंभीर चुनौती है। सरकार और समाज को मिलकर इस समस्या से निपटना होगा। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सही मार्गदर्शन और अवसर प्रदान करने की ज़रूरत है। राजनीति में भी इस मुद्दे को गंभीरता से लेना होगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ ज़ॉम्बी ड्रग क्या है?
ज़ॉम्बी ड्रग एक खतरनाक नशा है जिसमें जाइलेजीन नामक केमिकल का इस्तेमाल होता है, जो जानवरों को ट्रंकुलाइज करने के लिए उपयोग होता है।
❓ यह ड्रग दिमाग पर कैसे असर करता है?
यह ड्रग दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर को अनियंत्रित कर देता है, जिससे व्यक्ति सुस्त, भ्रमित और अर्ध-बेहोशी की हालत में चला जाता है।
❓ इससे कैसे बचा जा सकता है?
युवाओं को नशे के खतरों के बारे में जागरूक करके, उन्हें सही मार्गदर्शन देकर और नशे से दूर रखने के लिए सकारात्मक माहौल बनाकर इससे बचा जा सकता है।
📰 और पढ़ें:
Health Tips & Wellness | Business & Market | Education Updates
ताज़ा और विश्वसनीय समाचारों के लिए HeadlinesNow.in से जुड़े रहें।
Published: 15 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

