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जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा: उमर अब्दुल्ला ने केंद्र से कहा- सब्र को कमजोरी

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राष्ट्रीय
📅 11 जुलाई 2026 | HeadlinesNow Desk
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा: उमर अब्दुल्ला ने केंद्र से कहा- सब्र को कमजोरी - HeadlinesNow Hindi News

🔑 मुख्य बातें

  • उमर अब्दुल्ला ने केंद्र से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की मांग की, कहा उनके सब्र को कमजोरी न समझें।
  • फारूक अब्दुल्ला ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए और बातचीत में कमी बताई।

श्रीनगर में राजनीतिक पारा एक बार फिर चढ़ गया है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को सीधे निशाने पर लिया है, खासकर राज्य का दर्जा बहाल करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर। यह सब उनकी दादी अकबर जहां की 26वीं पुण्यतिथि के मौके पर हुआ, जहाँ उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।

सब्र की सीमा, सवालों का दौर

हजरतबल में अपने दादा-दादी की मजार पर पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हुए उमर अब्दुल्ला ने साफ कहा, “हमारे सब्र को कमजोरी समझने की भूल न करे केंद्र।” उन्होंने केंद्र से पूछा कि आखिर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा कब मिलेगा और इस पर स्थिति कब स्पष्ट होगी। यह एक बड़ा सवाल है, जो लंबे समय से अनुत्तरित है।

अब्दुल्ला ने केंद्र की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। अगर लद्दाख के लोगों से बात हो सकती है, तो फिर जम्मू-कश्मीर के लोगों से बातचीत क्यों नहीं? उन्होंने अपनी दादी से मिली धैर्य की सीख को याद किया, पर साथ ही जोड़ा कि धैर्य का मतलब चुपचाप बैठना या अपने हक के लिए आवाज़ न उठाना नहीं होता। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, सब्र उनकी ताकत है और यही कामयाबी का जरिया बनेगा।

नेशनल कॉन्फ्रेंस को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों करना पड़ा, उमर ने केंद्र से इस पर आत्ममंथन करने को कहा। — जो कि उम्मीद से अलग है — उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने हमेशा हिंसा के बजाय बातचीत का रास्ता चुना, भले ही इसमें उनके राजनीतिक करियर के लिए बड़ा जोखिम था। यह एक मुश्किल फैसला था, जिसे उन्होंने लोगों के लिए लिया।

बातचीत का रास्ता, विश्वास की कमी

इस दौरान, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और उमर के पिता, फारूक अब्दुल्ला भी केंद्र सरकार पर बरसे। उन्होंने जून 2021 की सर्वदलीय बैठक को याद दिलाया, जहाँ प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बीच विश्वास की कमी को दूर करने की बात कही थी। फारूक ने पूछा, क्या सच में वह दूरी कम हुई है? जम्मू-कश्मीर के लोग भारत का ताज हैं, पैर के जूते नहीं, उन्होंने अपनी बात दमदार तरीके से रखी, जो एक राष्ट्रीय भावना को दर्शाती है।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल

फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर उपराज्यपाल के जरिए राज्य की शासन-व्यवस्था चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, अगर राजभवन से ही लोगों को परेशान करना था, नौकरियाँ छीननी थीं, और बुलडोजर चलाने थे, तो फिर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बात क्यों की गई? उमर अब्दुल्ला ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने कहा, केंद्र को पहले ही बता देना चाहिए था कि वे चुनी हुई सरकार के हाथ बांधकर काम कराएंगे और ऐसे अधिकारी देंगे जो फैसलों को लागू नहीं करेंगे। स्थानीय चुनावों पर भी उमर ने अपनी बात रखी। वे भी चुनाव चाहते हैं, लेकिन सही समय का फैसला जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार ही करेगी।

कुल मिलाकर, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों और राज्य के दर्जे की बहाली के लिए अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे। यह राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है, और केंद्र को अब इन सवालों का जवाब देना होगा, क्योंकि उनके मुताबिक, केंद्र ने उनकी शालीनता और चुप्पी का मज़ाक बनाया है।

🔍 खबर का विश्लेषण

यह बयान जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ दिखाता है। नेशनल कॉन्फ्रेंस का यह कड़ा रुख केंद्र पर दबाव बढ़ाएगा कि वह राज्य के दर्जे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करे। यह आने वाले समय में केंद्र और स्थानीय पार्टियों के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकता है, खासकर चुनाव से पहले। यह मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा में बना रहेगा।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

❓ उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से क्या मांग की है?

उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने और इस पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनके सब्र को कमजोरी न समझा जाए।

❓ फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?

फारूक अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उपराज्यपाल के माध्यम से जम्मू-कश्मीर की शासन-व्यवस्था को नियंत्रित कर रही है और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रही है।

❓ नेशनल कॉन्फ्रेंस ने केंद्र पर बातचीत न करने को लेकर क्या सवाल उठाया?

उमर अब्दुल्ला ने पूछा कि अगर केंद्र सरकार लद्दाख के लोगों से बातचीत कर सकती है, तो फिर जम्मू-कश्मीर के लोगों से बातचीत करने में क्या परेशानी है।

❓ स्थानीय चुनावों को लेकर उमर अब्दुल्ला का क्या रुख है?

उमर अब्दुल्ला स्थानीय चुनाव कराने के पक्ष में हैं, लेकिन उनका कहना है कि इन चुनावों को कराने के उपयुक्त समय का फैसला जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार ही करेगी।

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Published: 11 जुलाई 2026 | HeadlinesNow.in

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Journalist covering politics and technology.
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