📅 19 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow Desk
🔑 मुख्य बातें
- पीएम मोदी ने विपक्ष पर महिला आरक्षण बिल को रोकने का आरोप लगाया, कहा कि यह महिलाओं के आत्मसम्मान पर चोट है।
- उन्होंने कांग्रेस को परिवारवादी पार्टी बताते हुए कहा कि उन्हें डर है कि महिलाओं के सशक्त होने से उनका नेतृत्व खतरे में आ जाएगा।
📋 इस खबर में क्या है
पिछले कुछ समय से महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर विपक्ष को जमकर घेरा और कई गंभीर आरोप लगाए। आईये, आपको बताते हैं कि पीएम मोदी ने अपने संबोधन में क्या-क्या कहा।
विपक्ष पर पीएम मोदी का वार
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वो आम परिवारों की बहनों को संसद और विधानसभाओं में लाना चाहते थे, लेकिन विपक्ष ने इस नेक प्रयास को विफल कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि 21वीं सदी की नारी देश की हर राजनीतिक घटना पर पैनी नजर रख रही है और महिला आरक्षण का विरोध करके विपक्ष ने जो पाप किया है, उसकी सजा उन्हें जनता जरूर देगी। मोदी ने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि कैसे नारी शक्ति की उड़ान को रोकने की साजिश रची गई।
उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि उनके भरसक प्रयासों के बाद भी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया और इसके लिए वे देश की सभी माताओं और बहनों से हृदय से क्षमाप्रार्थी हैं। मोदी ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ दलों ने देशहित से ऊपर अपना स्वार्थ रखा। नारी शक्ति ने विपक्ष का रवैया देखा है और वो ये भी देख रही हैं कि बिल गिरने पर विपक्ष मेज थपथपा रहा था।
मोदी ने कहा कि यह बिल किसी से कुछ लेने का नहीं, बल्कि सभी को अधिकार देने का था और 40 साल से लंबित महिलाओं के हक को लागू करना था। उन्होंने इसे महिलाओं के हितों के खिलाफ कदम बताया और कहा कि देश इसे हमेशा याद रखेगा। पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष बिल गिरने पर ताली बजाकर जश्न मना रहा था, जो नारी आत्मसम्मान पर सीधा हमला है। उन्होंने इसे एक ईमानदार प्रयास की भ्रूण हत्या बताया और कहा कि विपक्ष को अपने इस कदम की सजा जरूर मिलेगी।
कांग्रेस पर तीखा हमला
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर विशेष रूप से हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपना वजूद खो चुकी है और उसने देश को गुमराह किया है। मोदी ने कहा कि कांग्रेस का मुखौटा अब उतर चुका है और वह महिला आरक्षण के विषय से नफरत करती है। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने साफ नीयत से पवित्र प्रयास किया था। पीएम मोदी ने कहा कि यह महिलाओं को 2029 से उनका हक देने का बिल था, लेकिन विपक्ष ने इसे पास नहीं होने दिया। राजनीति में अक्सर आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं, लेकिन इस बार पीएम मोदी ने विपक्ष पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।
मोदी ने कहा कि विपक्षी दल खुशी से तालियां बजा रहे थे, क्योंकि कुछ लोगों के लिए देशहित से बढ़कर दलहित है, जबकि उनके लिए देशहित सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि उन्हें आशा थी कि शायद कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेगी, लेकिन उसने इतिहास रचने का सुनहरा अवसर खो दिया। पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है और परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों के सहारे जिंदा है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगे क्या होगा? क्या सरकार महिला आरक्षण बिल को फिर से लाने की कोशिश करेगी? और क्या विपक्ष इस बार सरकार का साथ देगा? ये देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति किस करवट बैठती है। एक बात तो तय है कि महिला आरक्षण बिल एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और इस पर जल्द ही कोई फैसला लेना जरूरी है। देश की महिलाओं को उनका हक मिलना ही चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि इन परिवारवादी पार्टियों को डर है कि अगर महिलाएं सशक्त हो गईं तो उनका राजनीतिक नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा और वे कभी नहीं चाहेंगे कि ऐसा हो। राजनीति के जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी का यह बयान विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
🔍 खबर का विश्लेषण
पीएम मोदी का यह बयान विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और भी गरमा सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार महिला आरक्षण बिल को फिर से लाने की कोशिश करती है और क्या विपक्ष इस बार सरकार का साथ देता है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ महिला आरक्षण बिल क्या है?
यह बिल संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव रखता है। इसका उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।
❓ विपक्ष इस बिल का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्ष का कहना है कि इस बिल में कुछ खामियां हैं और यह सभी वर्गों की महिलाओं को समान रूप से प्रतिनिधित्व नहीं देता है। कुछ दलों को यह भी डर है कि इससे उनका राजनीतिक प्रभाव कम हो जाएगा।
❓ आगे क्या हो सकता है?
सरकार इस बिल को फिर से लाने की कोशिश कर सकती है, लेकिन इसके लिए विपक्ष का समर्थन जरूरी होगा। यह भी संभव है कि सरकार इस बिल में कुछ संशोधन करे ताकि विपक्ष को साथ लिया जा सके।
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Published: 19 अप्रैल 2026 | HeadlinesNow.in

