📅 05 अगस्त 2026 | HeadlinesNow Desk

🔑 मुख्य बातें
- दिल्ली कोर्ट ने रहेजा डेवलपर्स के नवीन और नयन रहेजा को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी।
- अदालत ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए, कहा इसे यांत्रिक न बनाएं।
- आरोपियों को जांच में पूरा सहयोग करने और अगली सुनवाई 3 सितंबर को उपस्थित रहने के लिए निर्देश दिया गया है।
📋 इस खबर में क्या है
पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे माहौल में, दिल्ली की एक अदालत ने रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड के चेयरमैन नवीन एम. रहेजा और उनके बेटे, प्रबंध निदेशक (एमडी) नयन एन. रहेजा को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देकर सबको चौंका दिया है। यह अपने आप में एक महत्वपूर्ण फैसला है, जो ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पर बहस को फिर से जिंदा कर रहा है।
ईडी ने इन दोनों पिता-पुत्र के खिलाफ एक अनिश्चित समय-सीमा वाले गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी करने की मांग की थी। एजेंसी का आरोप था कि दोनों आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और 2022 में दर्ज ईसीआईआर (प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) के संबंध में जारी समन का भी पालन नहीं कर रहे थे। एक समय, ऐसा लग रहा था कि इनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी, लेकिन अदालत ने पूरे मामले को एक नए दृष्टिकोण से देखा।
गैर-जमानती वारंट पर अदालत का कड़ा रुख
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान की अदालत ने ईडी की इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में साफ कहा, किसी भी आरोपी के खिलाफ कोई भी कानूनी प्रक्रिया शुरू करने का मुख्य मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना होता है कि वह अदालत में उपस्थित हो। यह बहुत बड़ी बात है। अदालत ने विशेष रूप से गैर-जमानती वारंट जैसे उपायों के प्रयोग पर टिप्पणी की। न्यायाधीश ने जोर देकर कहा कि गैर-जमानती वारंट जारी करने के बहुत व्यापक प्रभाव होते हैं और यह व्यक्ति के मौलिक अधिकारों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। यही वजह है कि , इन्हें यांत्रिक ढंग से, बिना सोचे-समझे जारी नहीं किया जाना चाहिए। अदालत को ऐसे मामलों में सभी पहलुओं पर पूरी तरह से विचार करना बेहद जरूरी है, न कि सिर्फ एक औपचारिकता पूरी करनी।
वहीं, रहेजा पिता-पुत्र की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाहवा ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किलों ने जांच में पूरा सहयोग किया है। उन्होंने दलील दी कि दोनों 2025 में चार बार व्यक्तिगत रूप से ईडी के सामने पेश हुए और एजेंसी द्वारा मांगे गए सभी दस्तावेज भी उपलब्ध कराए। पाहवा ने यह भी बताया कि 2022 में ईसीआईआर दर्ज होने के बावजूद, ईडी अब, करीब चार साल बाद, गैर-जमानती वारंट जारी करने की मांग कर रही है। यह सीधा सवाल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपी न तो कानून से भाग रहे हैं और न ही कभी फरार होने की कोशिश की है। वे जब भी बुलाए जाएंगे, जांच में शामिल होने को तैयार हैं। वहीं दूसरी तरफ , उनकी अग्रिम जमानत याचिका और अन्य संबंधित याचिकाएं दिल्ली उच्च न्यायालय में अभी भी लंबित हैं।
अग्रिम सुनवाई तक मिली ढील
ईडी ने पर इन दलीलों का जोरदार विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि 2025 में कुछ मौकों पर जांच में शामिल होने के बाद, आरोपी चार और मौकों पर पेश नहीं हुए और अप्रैल 2026 में जारी किए गए समन का भी उन्होंने पालन नहीं किया। ईडी ने यह भी तर्क दिया कि अग्रिम जमानत याचिका दायर करने से जांच में शामिल होने की बाध्यता समाप्त नहीं हो जाती, और न ही इससे एजेंसी की कानूनी कार्रवाई रुकती है। यह प्रवर्तन एजेंसियों का मानक रुख रहा है।
लेकिन अदालत ने ईडी की दलीलों को सुनने के बाद, अपने पिछले रुख को दोहराया। अदालत ने कहा कि ईडी की अर्जी पर बहस अभी खत्म नहीं हुई है। खास बात — अदालत ने पाया कि दोनों आरोपियों ने भविष्य में जांच में शामिल होने और पूरा सहयोग करने की इच्छा जताई है। ऐसी स्थिति में, अदालत ने फैसला किया कि उन्हें अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत देना ही न्यायसंगत होगा। अदालत ने नवीन और नयन रहेजा को निर्देश दिया है कि जब भी जांच अधिकारी उन्हें बुलाएं, वे जांच में शामिल हों और पूरा सहयोग करें। नवीन रहेजा की अधिक उम्र को देखते हुए, अदालत ने ईडी को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले पर विचार करने को भी कहा है, जिसमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी का प्रावधान है। इस मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को तय की गई है, जिस पर राष्ट्रीय राजधानी की निगाहें टिकी रहेंगी।
🔍 खबर का विश्लेषण
दिल्ली कोर्ट का यह फैसला प्रवर्तन निदेशालय की कार्यप्रणाली पर एक अहम टिप्पणी है। यह दर्शाता है कि अदालतें गैर-जमानती वारंट जैसे सख्त कदमों को सिर्फ प्रक्रियात्मक रूप से लागू करने के बजाय, अभियुक्तों के अधिकारों और जांच के मूल उद्देश्य पर अधिक जोर दे रही हैं। यह उन कंपनियों और व्यक्तियों के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है, जो जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन समन या NBW के अत्यधिक प्रयोग का सामना कर रहे हैं। यह न्यायिक सतर्कता का एक अच्छा उदाहरण है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ रहेजा डेवलपर्स के चेयरमैन और एमडी को किस मामले में अंतरिम राहत मिली है?
नवीन एम. रहेजा और नयन एन. रहेजा को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दर्ज किए गए एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की एक अदालत से गिरफ्तारी पर अंतरिम राहत मिली है।
❓ अदालत ने गैर-जमानती वारंट (NBW) के बारे में क्या महत्वपूर्ण टिप्पणी की?
अदालत ने कहा कि गैर-जमानती वारंट का आरोपी के अधिकारों पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और इन्हें बिना सोचे-समझे या यांत्रिक ढंग से जारी नहीं किया जाना चाहिए।
❓ ईडी ने आरोपियों पर जांच में सहयोग न करने के क्या आरोप लगाए थे?
ईडी ने आरोप लगाया था कि दोनों आरोपियों ने 2022 में दर्ज ईसीआईआर से जुड़े समन का पालन नहीं किया और वे जांच में शामिल नहीं हुए।
❓ बचाव पक्ष ने अदालत के सामने क्या दलीलें पेश कीं?
बचाव पक्ष ने बताया कि आरोपियों ने 2025 में चार बार जांच में सहयोग किया था, फरार नहीं हैं, और उनकी अग्रिम जमानत याचिका दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है।
❓ मामले की अगली सुनवाई कब होगी और आरोपियों को क्या निर्देश दिए गए हैं?
मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर को तय की गई है। अदालत ने आरोपियों को जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर जांच में शामिल होने और पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है।
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Published: 05 अगस्त 2026 | HeadlinesNow.in

