📅 19 जुलाई 2026 | HeadlinesNow Desk

🔑 मुख्य बातें
- सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा में तैनात बीमार पुलिसकर्मियों को वापस भेज दिया।
- बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर इस ‘लापरवाही’ पर सवाल उठाए हैं।
- उन्होंने तीन सुरक्षाकर्मियों की गंभीर बीमारियों का जिक्र करते हुए चिंता जताई है।
📋 इस खबर में क्या है
जरा सोचिए, एक सांसद अपनी सुरक्षा में लगे जवानों को खुद वापस भेज दे? ये सुनने में अजीब लग सकता है, पर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने ठीक ऐसा ही किया है। उन्होंने न केवल अपनी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को वापस भेज दिया, बल्कि इस मामले को लेकर सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक तगड़ा खत भी लिखा है। उनकी चिंता सिर्फ अपनी सुरक्षा को लेकर नहीं है, बल्कि उन पुलिसवालों की सेहत को लेकर भी है, जो कथित तौर पर बीमार हालत में उनकी सुरक्षा में लगाए गए थे।
बेनीवाल ने अपने पत्र में साफ-साफ लिखा है कि उनकी सुरक्षा में ऐसे जवान लगाए जा रहे हैं, जो पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। उनका सीधा सवाल है कि जो खुद बीमार हैं, वो मेरी सुरक्षा कैसे करेंगे? सांसद का आरोप है कि यह न सिर्फ उनकी सुरक्षा से गंभीर खिलवाड़ है, बल्कि उन्हें लगता है कि किसी अनहोनी की स्थिति में उन्हें ही बेवजह जिम्मेदार ठहराकर उनकी छवि खराब करने की सोची-समझी साजिश हो सकती है। यह मामला अब पूरे राजस्थान में वायरल हो रहा है और इस पर चर्चा तेज हो गई है।
बीमारों के सहारे सुरक्षा? सांसद का सवाल
बेनीवाल ने अपने खत में तीन जवानों के नाम और उनकी बीमारियों का पूरा ब्यौरा दिया है, जो वाकई चौंकाने वाला है। उन्होंने बताया कि कांस्टेबल सुनील बिश्नोई पहले से ही न्यूरोलॉजी से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। 11 जुलाई को जयपुर में उनकी तबीयत इतनी खराब हुई कि खुद सांसद को रात में उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाना पड़ा और उनके इलाज का पूरा इंतजाम करवाना पड़ा। ये दिखाता है कि स्थिति कितनी गंभीर थी।
फिर उन्होंने दूसरे जवान बलवीर गुर्जर का जिक्र किया। 15 जुलाई को जयपुर से लौटते समय बलवीर की तबीयत भी बिगड़ गई। सांसद ने बिना देर किए उन्हें नागौर के अस्पताल में भर्ती करवाया और बाद में जोधपुर एम्स रेफर करवाया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें दिल से जुड़ी कोई पुरानी बीमारी हो सकती है। ऊपर से, तीसरे सुरक्षाकर्मी कांस्टेबल सीताराम भी इन दिनों अस्वस्थ चल रहे हैं। ये सब सुनने के बाद सवाल उठना लाज़मी है कि क्या वाकई ऐसी स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रह पाएगी?
सुरक्षा में लापरवाही, या कुछ और?
हनुमान बेनीवाल ने अपनी चिट्ठी में यह भी बताया है कि पहले राजस्थान पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग को उनकी सुरक्षा को लेकर बड़े खतरे के इनपुट मिले थे। उस समय उन्हें पुलिस एस्कॉर्ट और हथियारबंद कमांडो दिए गए थे। लेकिन फिर बिना उनकी जानकारी के यह सुरक्षा हटा दी गई। उन्हें न तो खतरे की स्थिति के बारे में बताया गया और न ही यह कि वो इनपुट अब किस स्थिति में हैं। यह अपने आप में बड़ी लापरवाही है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
सांसद बेनीवाल ने यह भी बताया कि उन्होंने इन सभी घटनाओं की जानकारी फोन पर राजस्थान पुलिस के डीजीपी और एडीजी इंटेलिजेंस को भी दी थी, लेकिन जिला स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे उन्हें लगता है कि नागौर के कुछ जिम्मेदार पुलिस अधिकारी निष्पक्ष रूप से काम करने के बजाय किसी राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहे हैं। यह आरोप अपने आप में काफी गंभीर है और पूरे प्रशासन पर सवाल खड़े करता है।
बेनीवाल का बड़ा कदम और सरकार पर सवालिया निशान
इस पूरी स्थिति को देखते हुए हनुमान बेनीवाल ने एक बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने अपनी सुरक्षा में तैनात उन सभी राजस्थान पुलिस के जवानों को तत्काल प्रभाव से नागौर की रिजर्व पुलिस लाइन वापस भेज दिया है। उनका साफ कहना है कि वो किसी भी बीमार पुलिसकर्मी के स्वास्थ्य को खतरे में नहीं डालना चाहते। यह कदम दर्शाता है कि वह सिर्फ राजनीति नहीं कर रहे, बल्कि मानवीय पक्ष पर भी ध्यान दे रहे हैं।
इस घटना ने VVIP सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई बिना सोचे-समझे बीमार जवानों को ड्यूटी पर भेजा जा रहा है? क्या इसमें राजनीतिक दबाव है? यह पूरी खबर इस समय खूब वायरल हो रही है और इसकी गूंज जयपुर से दिल्ली तक पहुंच सकती है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं और क्या ऐसी लापरवाही पर लगाम लगेगी।
🔍 खबर का विश्लेषण
यह घटना सार्वजनिक प्रतिनिधियों की सुरक्षा प्रोटोकॉल में गंभीर चूक को दर्शाती है। बेनीवाल का बीमार कर्मियों को वापस भेजने का कदम न केवल उनके स्वास्थ्य की रक्षा करता है, बल्कि राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को मुश्किल में भी डालता है। यह संसाधनों के आवंटन, खतरे के आकलन में पारदर्शिता, और प्रशासनिक कार्यों में संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप पर सवाल खड़े करता है। इससे राजस्थान में वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा हो सकती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
❓ हनुमान बेनीवाल ने सुरक्षाकर्मी क्यों वापस भेजे?
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के बीमार होने के कारण उन्हें वापस भेज दिया है। उनका कहना है कि ऐसे में उनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो सकती है।
❓ मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में क्या शिकायत की गई है?
पत्र में बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा में तैनात लगातार बीमार पुलिसकर्मियों की तैनाती पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इसे अपनी सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ बताया है और संभावित अप्रिय घटना के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराने की साजिश भी करार दिया।
❓ किन पुलिसकर्मियों की बीमारियों का जिक्र किया गया?
उन्होंने सुनील बिश्नोई (न्यूरोलॉजी), बलवीर गुर्जर (हृदय संबंधी) और सीताराम (अस्वस्थ) नामक तीन कांस्टेबलों की बीमारियों का जिक्र किया है, जिनकी तबीयत खराब होने पर बेनीवाल ने खुद अस्पताल पहुंचाया।
❓ क्या पहले भी बेनीवाल की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं?
हां, बेनीवाल के अनुसार पहले उन्हें बड़े खतरे के इनपुट के आधार पर कमांडो सुरक्षा दी गई थी, जिसे बाद में बिना उनकी जानकारी के हटा दिया गया, जिससे उनकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
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Published: 19 जुलाई 2026 | HeadlinesNow.in

